Mahabharata
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अध्याय 4 / 18

Virata Parva

विराटपर्व

6 श्लोक

पूर्ण अध्याय पाठ6 श्लोक

अध्याय 4

श्लोक 1

श्रूयतां धर्मसर्वस्वं श्रुत्वा चैव अनुवर्त्यताम् ।आत्मनः प्रतिकूलानि परेषां न समाचरेत्

śrūyatāṃ dharmasarvasvaṃ śrutvā caiva anuvartyatam | ātmanaḥ pratikūlāni pareṣāṃ na samācaret

हिन्दी अर्थ

संपूर्ण धर्म का सार सुनो, और सुनकर उसका पालन करो: जो अपने को अप्रिय हो, वह दूसरों के साथ मत करो।

English

Hear the essence of all dharma, and having heard, follow it: do not do to others what is unpleasant to yourself.

अध्याय 4

श्लोक 1.2

आयुर्हरति वै पुंसां उद्यन्नस्तं च यन् रविः ।तस्मात् दिवसं मर्त्यः कार्यमेव समाचरेत्

āyurharati vai puṃsāṃ udyannastam ca yan raviḥ | tasmāt divasaṃ martyaḥ kāryameva samācaret

हिन्दी अर्थ

उगता और अस्त होता सूर्य प्रतिदिन मनुष्यों की आयु को हरता है। इसलिए मरणशील व्यक्ति को प्रतिदिन कर्तव्य-कर्म में लगे रहना चाहिए।

English

The rising and setting sun daily takes away human lifespan. Therefore, a mortal person should employ the day in worthy deeds.

अध्याय 4

श्लोक 1.7

यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत ।अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्

yadā yadā hi dharmasya glānirbhavati bhārata | abhyutthānamadharmasya tadātmānaṃ sṛjāmyaham

हिन्दी अर्थ

जब भी धर्म की हानि होती है और अधर्म बढ़ता है, हे भारत, तब मैं अपने आप को प्रकट करता हूँ।

English

Whenever dharma declines and adharma rises, O Bharata, then I manifest myself.

अध्याय 4

श्लोक 1.8

कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन ।मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि

karmaṇyevādhikāraste mā phaleṣu kadācana | mā karmaphalaheturbhūrmā te saṅgo'stvakarmaṇi

हिन्दी अर्थ

तुम्हें कर्म करने का अधिकार है, फल का कभी नहीं। फल को कर्म का कारण मत बनाओ, अकर्म में आसक्ति भी मत रखो।

English

You have the right to action alone, never to its fruits. Let not the fruits of action be your motive, nor let there be attachment to inaction.

अध्याय 4

श्लोक 1.9

योगस्थः कुरु कर्माणि सङ्गं त्यक्त्वा धनञ्जय ।सिद्ध्यसिद्ध्योः समो भूत्वा समत्वं योग उच्यते

yogasthaḥ kuru karmāṇi saṅgaṃ tyaktvā dhanañjaya | siddhyasiddhyoḥ samo bhūtvā samatvaṃ yoga ucyate

हिन्दी अर्थ

योग में स्थित होकर कर्म करो, धनञ्जय, आसक्ति छोड़कर। सफलता और असफलता में समभाव रखो; यह समत्व ही योग कहलाता है।

English

Established in yoga, perform action, O Dhananjaya, abandoning attachment. Be equipoised in success and failure; this equanimity is called yoga.

अध्याय 4

श्लोक 1.10

विद्याविनयसम्पन्ने ब्राह्मणो गति भारत ।शूद्रो विद्याविनयहीनो निस्तरति न विन्दति

vidyāvinayasaṃpanne brāhmaṇo gati bhārata | śūdro vidyāvinayahīnaḥ niṣtarati na vindati

हिन्दी अर्थ

विद्या और विनय से युक्त ब्राह्मण — वही मार्ग है, हे भारत। विद्या और विनय रहित शूद्र मुक्ति नहीं पाता।

English

A Brahmin with learning and humility — that is the path, O Bharata. A Shudra without learning and humility does not attain liberation.

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 1/6/2026

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शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।