अध्याय 82
श्लोक 1
श्रीकृष्णबलरामयोः मथुरायां प्रवेशः, ताभ्यां रजकस्य वधः, मालिनं वरदानं, कुब्जोपरि कृपा एवं कंसस्य धनुषस्य भञ्जनं ते तु युङ्क्त्वा रथवरं सर्व एवामितौजसः ।कृष्णेन सहिताः प्रायंस्तथा सङ्कर्षणेन च
śrīkṛṣṇabalarāmayoḥ mathurāyāṃ praveśaḥ, tābhyāṃ rajakasya vadhaḥ, mālinaṃ varadānaṃ, kubjopari kṛpā evaṃ kaṃsasya dhanuṣasya bhañjanaṃ te tu yuṅktvā rathavaraṃ sarva evāmitaujasaḥ | kṛṣṇena sahitāḥ prāyaṃstathā saṅkarṣaṇena ca
श्लोक 1–3 का हिन्दी अर्थ
वैशम्पायनजी कहते हैं—जनमेजय! वे सभी अमित तेजस्वी यात्री अपने श्रेष्ठ रथको जोतकर श्रीकृष्ण और संकर्षणके साथ राजा कंसके द्वारा सुरक्षित रमणीय मथुरापुरीमें जा पहुँचे। संध्याकालमें जब कि सूर्यदेव लाल हो गये थे, उन सबने उस रमणीय मथुरा-नगरीमें प्रवेश किया। बुद्धिमान् अक्रूर सूर्यतुल्य तेजस्वी श्रीकृष्ण और संकर्षण दोनों वीरोंको पहले अपने घरमें ले गये