Harivamsha Purana
243
अध्याय 243 / 318

Parva 3, Adhyāya 60

73 श्लोक

पूर्ण अध्याय पाठ73 श्लोक

अध्याय 243

श्लोक 1

कुबेरस्य अनुह्रादेन सार्द्धं भयङ्करं युद्धं धनाध्यक्षमनुह्रादः प्रह्रादस्यानुजो बली ।ससैन्यं योधयामास क्षोभयन् यक्षवाहिनीम्

kuberasya anuhrādena sārddhaṃ bhayaṅkaraṃ yuddhaṃ dhanādhyakṣamanuhrādaḥ prahrādasyānujo balī | sasainyaṃ yodhayāmāsa kṣobhayan yakṣavāhinīm

हिन्दी अर्थ

वैशम्पायनजी कहते हैं—जनमेजय! प्रह्मादका बलवान्‌ भाई अनुह्ाद यक्षसेनाकों क्षोभमें डालता हुआ मेनासहित धनाध्यक्ष कुबेरके साथ युद्ध करने लगा

अध्याय 243

श्लोक 2

महता च बलौघेन त्वनुह्रादोऽसुरोत्तमः ।अर्दयामास सङ्क्रुद्धो धनाध्यक्षं प्रतापवान्

mahatā ca balaughena tvanuhrādo'surottamaḥ | ardayāmāsa saṅkruddho dhanādhyakṣaṃ pratāpavān

हिन्दी अर्थ

मसुरोंमें श्रेष्ठ प्रतापी अनुह्ाद कुपित हो अपने विशाल पैन्यसमूहद्वारा कुबेरको पीड़ा देने लगा

अध्याय 243

श्लोक 3

अमृष्यमाणस्त्रिदशानाहवस्थानुदायुधान् ।चकार कदनं घोरं धनुष्पाणिर्महासुरः

amṛṣyamāṇastridaśānāhavasthānudāyudhān | cakāra kadanaṃ ghoraṃ dhanuṣpāṇirmahāsuraḥ

हिन्दी अर्थ

वह महान्‌ मसुर युद्धस्थलमें खड़े हुए देवताओंको शस्त्र उठाये देख उन्हें सहन न कर सका। उसने हाथमें धनुष लेकर नका घोर संहार मचाया

अध्याय 243

श्लोक 4

आवर्त इव सञ्जज्ञे बलस्य महतो महान् ।क्षुभितस्याप्रमेयस्य सागरस्येव सम्प्लवे

āvarta iva sañjajñe balasya mahato mahān | kṣubhitasyāprameyasya sāgarasyeva samplave

हिन्दी अर्थ

जैसे प्रलयकालमें क्षुब्ध डुए अपार महासागरमें भँवरें उठने लगती हैं, उसी [कार उस क्षुब्ध हुई विशाल सेनामें आवर्त (मन्थन)- मा होने लगा॥ '

अध्याय 243

श्लोक 5

त्रिदशानां शरीरैस्तु दानवानां च मेदिनी ।बभूव निचिता घोरैः पर्वतैरिव सम्प्लवे

tridaśānāṃ śarīraistu dānavānāṃ ca medinī | babhūva nicitā ghoraiḥ parvatairiva samplave

हिन्दी अर्थ

देवताओं और दानवोंकी लाशोंसे हहाँकी धरती पट गयी, मानो प्रलयकालमें ढहे हुए गयंकर पर्वतोंसे आच्छादित हो गयी हो

अध्याय 243

श्लोक 6

मेरुपृष्ठं तु रक्तेन रञ्जितं सम्प्रकाशते ।सर्वतो माधवे मासि पुष्पितैरिव किंशुकः

merupṛṣṭhaṃ tu raktena rañjitaṃ samprakāśate | sarvato mādhave māsi puṣpitairiva kiṃśukaḥ

हिन्दी अर्थ

मेरुपर्वतकी हह घाटी रक्तसे रज्ञित होकर वैशाखमासमें सब ओरसे नाल फूलोंसे युक्त पलाशवृक्षकी भाँति प्रकाशित हो रही ी

अध्याय 243

श्लोक 7

हतैर्वीरैर्गजैरश्वैः प्रावर्तत महानदी ।शोणितौघा महाघोरा यमराष्ट्रविवर्धिनी

hatairvīrairgajairaśvaiḥ prāvartata mahānadī | śoṇitaughā mahāghorā yamarāṣṭravivardhinī

हिन्दी अर्थ

मारे गये वीरों, हाथियों और घोड़ोंसे वहाँ बूनकी एक महानदी बह चली, जिसमें जलके स्थानमें क्तका स्रोत बह रहा था। वह महाघोर नदी यमराजके ज्यकी वृद्धि करनेवाली थी

अध्याय 243

श्लोक 8

शकृन्मेदोमहापङ्का सम्प्रकीर्णान्त्रशैवला ।छिन्नकायशिरोमीना अङ्गावयवशाद्वला

śakṛnmedomahāpaṅkā samprakīrṇāntraśaivalā | chinnakāyaśiromīnā aṅgāvayavaśādvalā

हिन्दी अर्थ

उसमें विष्ठा और रबी बड़ी भारी कीचड़के समान प्रतीत होती थी। सब मोर बिखरी हुई आँतें सेवार-सी जान पड़ती थीं। कटे ए सिर और धड़ ही उस नदीके मत्स्य थे। अज्लोंके मवयव ही घास थे

अध्याय 243

श्लोक 9

गृध्रहंससमाकीर्णा केकिसारसनादिता ।वसाफेनसमाकीर्णा प्रोत्क्रुष्टस्तनितस्वरा

gṛdhrahaṃsasamākīrṇā kekisārasanāditā | vasāphenasamākīrṇā protkruṣṭastanitasvarā

हिन्दी अर्थ

गीधरूपी हंस वहाँ छा रहे [| मोरों और सारसोंके कलरवोंसे वह मुखरित हो रही ी। वसारूपी फेन उसमें व्याप्त थे। चारों ओर मची हुई गीख-पुकार ही उसका कलकलनाद थी

अध्याय 243

श्लोक 10

तां कापुरुषदुस्तारां युद्धभूमौ महानदीम् ।नदीमिवातपापाये हंससङ्घोपशोभिताम्

tāṃ kāpuruṣadustārāṃ yuddhabhūmau mahānadīm | nadīmivātapāpāye haṃsasaṅghopaśobhitām

हिन्दी अर्थ

युद्धभूमिमें हनेवाली वह महानदी कायरोंके लिये दुस्तर थी। ठीक से ही जैसे वर्षा-ऋतुमें बढ़ी हुई नदीको पार करना कसीको भी कठिन हो जाता है। हंस आदि पक्षियोंके मुदाय उसकी शोभा बढ़ाते थे

अध्याय 243

श्लोक 11

त्रिदशा दानवाश्चैव तेरुस्ते दुस्तरां नदीम् ।यथा पद्मरजोध्वस्तां नलिनीं गजयूथपाः

tridaśā dānavāścaiva teruste dustarāṃ nadīm | yathā padmarajodhvastāṃ nalinīṃ gajayūthapāḥ

हिन्दी अर्थ

देवता और [नव उस दुस्तर नदीको उसी प्रकार पार कर गये जैसे ममलोंके परागसे धूसर वर्णवाली पुष्करिणीको गजयूथपति ँच जाते हैं

अध्याय 243

श्लोक 12

ततः सृजन्तं बाणौघाँननुह्रादं रथे स्थितम् ।ददर्श तरसा देवो निघ्नन्तं यक्षवाहिनीम्

tataḥ sṛjantaṃ bāṇaughā~nanuhrādaṃ rathe sthitam | dadarśa tarasā devo nighnantaṃ yakṣavāhinīm

हिन्दी अर्थ

रथपर बैठा हुआ अनुह्ाद बाणसमूहोंकी षा करके यक्षसेनाका वेगपूर्वक विनाश कर रहा था। ह बात स्वयं कुबेरने देखी

अध्याय 243

श्लोक 13

क्रुद्धस्ततो दैत्यबलं सूदयामास वित्तपः ।विक्षिपन्निव खे वायुर्महाभ्रपटलं बलात्

kruddhastato daityabalaṃ sūdayāmāsa vittapaḥ | vikṣipanniva khe vāyurmahābhrapaṭalaṃ balāt

हिन्दी अर्थ

फिर तो जैसे वायु आकाशमें फैली हुई मेघोंकी भारी घटाको बलपूर्वक छिन्न-भिन्न कर देती है, उसी प्रकार क्रोधमें भरे हुए धनाध्यक्ष कुबेरने दैत्योंकी सेनाका संहार कर डाला

अध्याय 243

श्लोक 14

समीक्ष्य तुमुलं युद्धमनुह्रादश्च वीर्यवान् ।रथेनादित्यवर्णेन कुबेरमभिदुद्रुवे

samīkṣya tumulaṃ yuddhamanuhrādaśca vīryavān | rathenādityavarṇena kuberamabhidudruve

हिन्दी अर्थ

वह भयंकर युद्ध देखकर पराक्रमी अनुह्ादने सूर्यके समान तेजस्वी रथके द्वारा कुबेरपर धावा किया

अध्याय 243

श्लोक 15

स धनुर्धन्विनां श्रेष्ठो विकृष्य रणमूर्धनि ।उत्ससर्ज शितान् बाणान्वित्तेशस्य महात्मनः

sa dhanurdhanvināṃ śreṣṭho vikṛṣya raṇamūrdhani | utsasarja śitān bāṇānvitteśasya mahātmanaḥ

हिन्दी अर्थ

धनुर्धारियोंमें श्रेष्ठ उस दैत्यवीरने युद्धके मुहानेपर अपने धनुषको खींचकर महामनस्वी धनाध्यक्ष कुबेरपर पैने बाणोंका प्रहार किया

अध्याय 243

श्लोक 16

कुबेरं प्राप्य ते बाणा निर्भिद्य सुसमाहिताः ।अपरान्पृष्ठतो जघ्नुर्व्यासक्तान्यक्षराक्षसान्

kuberaṃ prāpya te bāṇā nirbhidya susamāhitāḥ | aparānpṛṣṭhato jaghnurvyāsaktānyakṣarākṣasān

हिन्दी अर्थ

वे बाण कुबेरके पास पहुँचकर उनके शरीरको विदीर्ण करते हुए पीठकी ओरसे निकल गये और युद्धमें लगे हुए दूसरे-दूसरे यक्षों तथा राक्षसोंको एकाग्रतापूर्वक घायल करने लगे

अध्याय 243

श्लोक 17

देवः शरैरभिहतो निशितैर्ज्वलनोपमैः ।अनुह्रादं प्रत्युदियात् सङ्क्रुद्धः परमाहवे

devaḥ śarairabhihato niśitairjvalanopamaiḥ | anuhrādaṃ pratyudiyāt saṅkruddhaḥ paramāhave

हिन्दी अर्थ

अग्िके समान तेजस्वी तथा पैने बाणोंसे घायल हुए धनाध्यक्ष कुबेर उस महासमरमें बहुत कुपित हुए और अनुह्ादका सामना करनेके लिये आगे बढ़े

अध्याय 243

श्लोक 18

ततो वैश्रवणो राजा क्रुद्धो यक्षगणैः सह ।ववर्ष शरवर्षाणि दानवं प्रति वीर्यवान्

tato vaiśravaṇo rājā kruddho yakṣagaṇaiḥ saha | vavarṣa śaravarṣāṇi dānavaṃ prati vīryavān

हिन्दी अर्थ

क्रोधमें भरे हुए पराक्रमी राजा कुबेरने यक्षोंके साथ रहकर उस दानवपर बाणोंकी वर्षा आरम्भ कर दी

अध्याय 243

श्लोक 19

तद्यथा शारदं वर्षं गोवृषः शीघ्रमागतम् ।अपारयन् वारयितुं प्रतिगृह्णन् निमीलितः

tadyathā śāradaṃ varṣaṃ govṛṣaḥ śīghramāgatam | apārayan vārayituṃ pratigṛhṇan nimīlitaḥ

श्लोक 19–20 का हिन्दी अर्थ

जैसे साँड़ शीघ्र आयी हुई शरद्‌-ऋतुकी वृष्टिको रोकनेमें असमर्थ हो आँख बन्द करके उसके आघातको चुपचाप. ग्रहण करता है, उसी प्रकार वह महान्‌ असुर दैत्य कुबेरद्वारा सहसा की गयी. भयंकर बाणवर्षाकों नेत्र मूँदकर चुपचाप सहन करने लगा

अध्याय 243

श्लोक 20

एवमेव कुबेरस्य शरवर्षं महासुरः ।निमीलिताक्षः सहसा दैत्यः सहति दारुणम्

evameva kuberasya śaravarṣaṃ mahāsuraḥ | nimīlitākṣaḥ sahasā daityaḥ sahati dāruṇam

अर्थ श्लोक 19 के साथ

अध्याय 243

श्लोक 21

रोषितः शरवर्षेण धनदेन महासुरः ।इन्द्रकेतुप्रतीकाशमभीतोऽपश्यत द्रुमम्

roṣitaḥ śaravarṣeṇa dhanadena mahāsuraḥ | indraketupratīkāśamabhīto'paśyata drumam

श्लोक 21–26 का हिन्दी अर्थ

समस्त देवता दानव-योद्धाओंको रौंदकर जोर-जोरसे गर्जना करते थे। इसी प्रकार कुपित हुए दानवोंने भी देवताओंको पृथ्वीपर मार गिराया था

अध्याय 243

श्लोक 23

प्रवृद्धशाखाविटपं तरुणाङ्कुरपल्लवम् ।उत्पाट्य कुपितो दैत्यस्तरुं फलसमन्वितं २२॥ निजघान हयाञ्छ्रेष्ठान् कुबेरस्य महात्मनः ।तस्य कर्म महाघोरं दृष्ट्वा सर्वे महासुराः

pravṛddhaśākhāviṭapaṃ taruṇāṅkurapallavam | utpāṭya kupito daityastaruṃ phalasamanvitaṃ 22|| nijaghāna hayāñchreṣṭhān kuberasya mahātmanaḥ | tasya karma mahāghoraṃ dṛṣṭvā sarve mahāsurāḥ

अर्थ श्लोक 21 के साथ

अध्याय 243

श्लोक 24

सिंहनादं नदन्ति स्म अनुह्रादप्रहर्षिताः ।तयोस्तु तुमुलं युद्धं सञ्जज्ञे देवदैत्ययोः

siṃhanādaṃ nadanti sma anuhrādapraharṣitāḥ | tayostu tumulaṃ yuddhaṃ sañjajñe devadaityayoḥ

अर्थ श्लोक 21 के साथ

अध्याय 243

श्लोक 25

ततस्तौ क्रोधरक्ताक्षावन्योन्यवधकाङ्क्षिणौ ।अन्योन्यं विविधैः शस्त्रैर्घोरैर्जघ्नतुराहवे

tatastau krodharaktākṣāvanyonyavadhakāṅkṣiṇau | anyonyaṃ vividhaiḥ śastrairghorairjaghnaturāhave

अर्थ श्लोक 21 के साथ

अध्याय 243

श्लोक 26

त्रिदशा दानवान् सर्वे मथित्वा प्राणदंस्तदा ।दानवैस्त्रिदशाश्चापि क्रुद्धैर्भुवि निपातिताः

tridaśā dānavān sarve mathitvā prāṇadaṃstadā | dānavaistridaśāścāpi kruddhairbhuvi nipātitāḥ

अर्थ श्लोक 21 के साथ

अध्याय 243

श्लोक 27

दानवास्त्वथ सङ्क्रुद्धास्त्रिदशान् निशितैः शरैः ।विव्यधुर्वज्रसङ्काशैः कङ्कपत्रैरजिह्मगैः

dānavāstvatha saṅkruddhāstridaśān niśitaiḥ śaraiḥ | vivyadhurvajrasaṅkāśaiḥ kaṅkapatrairajihmagaiḥ

हिन्दी अर्थ

दानव अत्यन्त कुपित हो वज्के तुल्य तेजस्वी तथा कड्पत्र लगे हुए सीधे जानेवाले तीखे बाणोंसे देवताओंको घायल करने लगे

अध्याय 243

श्लोक 28

विदार्यमाणा दैत्यौघैस्त्रिदशास्तु महाबलाः ।अमर्षिततराश्चक्रुर्युद्धकर्माण्यभीतवत्

vidāryamāṇā daityaughaistridaśāstu mahābalāḥ | amarṣitatarāścakruryuddhakarmāṇyabhītavat

हिन्दी अर्थ

दैत्यसमूहोंद्वारा घायल किये जाते हुए महाबली देवता अत्यन्त अमर्षमें भरकर निर्भयकी भाँति युद्धकर्म करने लगे

अध्याय 243

श्लोक 29

तैर्गदाभिः सुभीमाभिः पट्टिशैः शूलमुद्गरैः ।परिघैश्च सुतीक्ष्णाग्रैर्दानवाः पीडिताः शरैः

tairgadābhiḥ subhīmābhiḥ paṭṭiśaiḥ śūlamudgaraiḥ | parighaiśca sutīkṣṇāgrairdānavāḥ pīḍitāḥ śaraiḥ

हिन्दी अर्थ

उन्होंने भयंकर गदा, पट्टिश, शूल, मुद्रर, परिघ तथा तेज धारवाले बाणोंद्वारा दानवोंको बड़ी पीड़ा दी

अध्याय 243

श्लोक 30

शरनिर्भिन्नगात्राश्च खड्गविच्छिन्नवक्षसः ।जगृहुस्ते शिलाश्चैव द्रुमाश्चासुरसत्तमाः

śaranirbhinnagātrāśca khaḍgavicchinnavakṣasaḥ | jagṛhuste śilāścaiva drumāścāsurasattamāḥ

हिन्दी अर्थ

उन असुरशिरोमणि योद्धाओंके अज्भ बाणोंसे क्षत-विक्षत हो रहे थे। उनकी छाती खड्गसे छिन्न-भिन्न हो गयी थी; अतः उन्होंने भी बड़ी-बड़ी शिलाएँ और वृक्ष हाथमें ले लिये

अध्याय 243

श्लोक 31

ते भीमवेगा दितिजा नर्दमानाः पुनः पुनः ।ममन्थुस्त्रिदशान् वीर्याच्छतशोऽथ सहस्रशः

te bhīmavegā ditijā nardamānāḥ punaḥ punaḥ | mamanthustridaśān vīryācchataśo'tha sahasraśaḥ

हिन्दी अर्थ

उन भयंकर वेगवाले सैकड़ों और हजारों दैत्योंने बारम्बार गर्जना करके अपने बल-पराक्रमसे देवताओंको मथ डाला

अध्याय 243

श्लोक 32

ततस्तु तुमुलं युद्धं तेषां समभिवर्तत ।शिलाभिर्विपुलाभिश्च शतशश्चैव पादपैः

tatastu tumulaṃ yuddhaṃ teṣāṃ samabhivartata | śilābhirvipulābhiśca śataśaścaiva pādapaiḥ

श्लोक 32–35 का हिन्दी अर्थ

तदनन्तर उनमें घमासान युद्ध आरम्भ हो गया। वे बड़ी- बड़ी शिलाओं, सैकड़ों वृक्षों तथा परिघ, पट्िश, भल्ल, भिन्दिपाल और फरसोंद्वारा एक-दूसरेको मारने लगे। किसीके सिर उड़ गये, कोई विदीर्ण हो गये, कोई भूमिपर गिराकर मार डाले गये। इस प्रकार सभी देवता और असुर खूनसे लथपथ हो रहे थे। परस्परकी मारसे पीड़ित हो कितने ही योद्धा समराज्णसे भाग गये। किन्हींके हृदय विदीर्ण हो गये। कोई पैर कट जानेसे पृथ्वीपर सो रहे थे और कितने ही त्रिशूलोंसे विदीर्ण हो वहाँ प्राणोंसे हाथ धो बैठे थे

अध्याय 243

श्लोक 33

परिघैः पट्टिशैर्भल्लैर्भिन्दिपालैः परश्वधैः ।केचिन्निवृत्तशिरसः केचिच्च विदलीकृताः

parighaiḥ paṭṭiśairbhallairbhindipālaiḥ paraśvadhaiḥ | kecinnivṛttaśirasaḥ kecicca vidalīkṛtāḥ

अर्थ श्लोक 32 के साथ

अध्याय 243

श्लोक 34

केचिद् विनिहता भूमौ रुधिरार्द्राः सुरासुराः ।केचिद् रणाजिरान्नष्टाः परस्परवधार्दिताः

kecid vinihatā bhūmau rudhirārdrāḥ surāsurāḥ | kecid raṇājirānnaṣṭāḥ parasparavadhārditāḥ

अर्थ श्लोक 32 के साथ

अध्याय 243

श्लोक 35

विभिन्नहृदयाः केचिच्छिन्नपादाश्च शेरते ।विदारितास्त्रिशूलैश्च केचित् तत्र गतासवः

vibhinnahṛdayāḥ kecicchinnapādāśca śerate | vidāritāstriśūlaiśca kecit tatra gatāsavaḥ

अर्थ श्लोक 32 के साथ

अध्याय 243

श्लोक 36

तत् सुभीमं महद्युद्धं देवदानवसङ्कुलम् ।बभूव तुमुलं युद्धं शिलापादपसङ्कुलम्

tat subhīmaṃ mahadyuddhaṃ devadānavasaṅkulam | babhūva tumulaṃ yuddhaṃ śilāpādapasaṅkulam

हिन्दी अर्थ

वह देवताओं और दानवोंसे भरा हुआ महायुद्ध बड़ा भयंकर प्रतीत होता था; शिलाओं और वृक्षोंके प्रहारसे व्याप्त होनेके कारण उसकी भयंकरता और भी बढ़ गयी थी

अध्याय 243

श्लोक 37

धनुर्ज्यातन्त्रिमधुरं हिक्कातालसमन्वितम् ।आर्तस्तनितघोषाढ्यं युद्धं गान्धर्वमाबभौ

dhanurjyātantrimadhuraṃ hikkātālasamanvitam | ārtastanitaghoṣāḍhyaṃ yuddhaṃ gāndharvamābabhau

हिन्दी अर्थ

वहाँ धनुषकी प्रत्यज्ञारूपी वीणाकी मधुर तान छिड़ी हुई थी। योद्धाओंको जो हिचकियाँ आती थीं, वे ही मानो ताल थीं। पीड़ितोंके आर्तनाद ही मृदज॒ आदि वादोंके घोष एवं आलाप थे । इस प्रकार वह युद्ध गान्धर्वमहोत्सव (संगीतसमारोह )-के समान प्रतीत होता था

अध्याय 243

श्लोक 38

कुबेरः स धनुष्पाणिर्दानवान् रणमूर्धनि ।दिशो विद्रावयामास सङ्क्रुद्धः शरवृष्टिभिः

kuberaḥ sa dhanuṣpāṇirdānavān raṇamūrdhani | diśo vidrāvayāmāsa saṅkruddhaḥ śaravṛṣṭibhiḥ

हिन्दी अर्थ

उस समय क्रोधमें भरे हुए कुबेर हाथमें धनुष लेकर युद्धके मुहानेपर बाणोंकी वर्षा करके दानवोंको सम्पूर्ण दिशाओंमें खदेड़ने लगे

अध्याय 243

श्लोक 39

कुबेरेणार्दितं सैन्यं विद्रुतं प्रेक्ष्य दानवः ।अम्यद्रवदनुह्रादः प्रगृह्य महतीं शिलाम्

kubereṇārditaṃ sainyaṃ vidrutaṃ prekṣya dānavaḥ | amyadravadanuhrādaḥ pragṛhya mahatīṃ śilām

हिन्दी अर्थ

अपनी सेनाको कुबेरसे पीड़ित हुई देख दानव अनुहाद एक बहुत बड़ी शिला हाथमें लेकर कुबेरकी ओर दौड़ा

अध्याय 243

श्लोक 40

क्रोधाद् द्विगुणरक्ताक्षः पितृतुल्यपराक्रमः ।शिलां तां पातयामास कुबेरस्य रथोत्तमे

krodhād dviguṇaraktākṣaḥ pitṛtulyaparākramaḥ | śilāṃ tāṃ pātayāmāsa kuberasya rathottame

हिन्दी अर्थ

उस समय उसके नेत्र क्रोधसे दुगुने लाल हो रहे थे। वह अपने पिता हिरण्यकशिपुके समान पराक्रमी था। उसने कुबेरके उत्तम रथपर उस शिलाको दे मारा

अध्याय 243

श्लोक 41

आपतन्तीं शिलां दृष्ट्वा गदापाणिर्धनाधिपः ।रथादाप्लुत्य वेगेन वसुधायां व्यतिष्ठत

āpatantīṃ śilāṃ dṛṣṭvā gadāpāṇirdhanādhipaḥ | rathādāplutya vegena vasudhāyāṃ vyatiṣṭhata

हिन्दी अर्थ

उस शिलाको आती देख हाथमें गदा लिये हुए कुबेर अपने रथसे नरेगपूर्वक कूदकर पृथ्वीपर खड़े हो गये

अध्याय 243

श्लोक 42

सचक्रकूबरहयं सध्वजं सशरासनम् ।भङ्क्त्वा रथोत्तमं तस्य निपपात शिला भुवि

sacakrakūbarahayaṃ sadhvajaṃ saśarāsanam | bhaṅktvā rathottamaṃ tasya nipapāta śilā bhuvi

हिन्दी अर्थ

वह शिला कुबेरके उत्तम रथको चक्र, कूबर, घोड़े, ध्वज और धनुषबाणसहित तोड़-फोड़कर भूमिपर गिर पड़ी

अध्याय 243

श्लोक 43

विमथ्य तु कुबेरस्य प्रह्रादस्यानुजो रथम् ।शूराणां कदनं चक्रे सस्कन्धविटपैर्द्रुमैः

vimathya tu kuberasya prahrādasyānujo ratham | śūrāṇāṃ kadanaṃ cakre saskandhaviṭapairdrumaiḥ

हिन्दी अर्थ

कुबेरके रथको नष्ट-भ्रष्ट करके प्रह्नादके छोटे भाई अनुह्ादने तनों और शाखाओंसहित वृक्षोंद्वारा देवपक्षके शूरवीरोंका संहार आरम्भ किया

अध्याय 243

श्लोक 44

निर्भिन्नशिरसो भग्नास्त्रिदशाः शोणितोक्षिताः ।द्रुमप्रव्यथिताङ्गाश्च निपेतुर्धरणीतले

nirbhinnaśiraso bhagnāstridaśāḥ śoṇitokṣitāḥ | drumapravyathitāṅgāśca nipeturdharaṇītale

हिन्दी अर्थ

देवताओंके सिर फूट गये। अद्भ-भड्ड हो गये। वे रक्तसे नहा गये। वृक्षोंकी मारसे उनके सारे अज्ज व्यधित होने लगे और वे पृथ्वीपर गिर पड़े

अध्याय 243

श्लोक 45

विद्राव्य विपुलं सैन्यमनुह्रादो महासुरः ।गिरिशृङ्गं गृहीत्वा तु कुबेरमभिदुद्रुवे

vidrāvya vipulaṃ sainyamanuhrādo mahāsuraḥ | giriśṛṅgaṃ gṛhītvā tu kuberamabhidudruve

हिन्दी अर्थ

महानू असुर अनुह्ादने देवताओंकी विशाल सेनाको भगाकर एक पर्वतका शिखर हाथमें ले लिया और कुबेरपर धावा किया

अध्याय 243

श्लोक 46

तमापतन्तं धनदो गदामुद्यम्य वीर्यवान् ।विनदित्वाऽऽह्वयामास दानवेन्द्रं महाबलम्

tamāpatantaṃ dhanado gadāmudyamya vīryavān | vinaditvā''hvayāmāsa dānavendraṃ mahābalam

हिन्दी अर्थ

उसे आते देख पराक्रमी कुबेरने गदा उठा ली और बड़े जोरसे गरजकर उस महाबली दानवराजको ललकारा

अध्याय 243

श्लोक 47

तस्य दैत्यस्य सङ्क्रुद्धो गदां तां बहुकण्टकाम् ।न्यपातयत वित्तेशो दानवस्योरसि प्रभो

tasya daityasya saṅkruddho gadāṃ tāṃ bahukaṇṭakām | nyapātayata vitteśo dānavasyorasi prabho

हिन्दी अर्थ

प्रभो ! धनके स्वामी कुबेरने कुपित होकर उस दैत्य एवं दानवकी छातीपर उस गदाकों दे मारा, जिसमें बहुत- से काँटे लगे हुए थे

अध्याय 243

श्लोक 48

दैत्यः सक्रोधताम्राक्षस्तं प्रहारमचिन्तयन् ।वित्तेशस्योपरि तदा गिरिशृङ्गमपातयत्

daityaḥ sakrodhatāmrākṣastaṃ prahāramacintayan | vitteśasyopari tadā giriśṛṅgamapātayat

हिन्दी अर्थ

परंतु क्रोधसे लाल आँखें किये उस दैत्यने उनके उस प्रहारकी कोई परवा नहीं की और धनके स्वामी कुबेरपर तत्काल ही उस पर्वतशिखरको गिरा दिया

अध्याय 243

श्लोक 49

स विह्वलितसर्वाङ्गो गिरिशृङ्गेण ताडितः ।पपात सहसा भूमौ विशीर्ण इव पर्वतः

sa vihvalitasarvāṅgo giriśṛṅgeṇa tāḍitaḥ | papāta sahasā bhūmau viśīrṇa iva parvataḥ

हिन्दी अर्थ

पर्वतशिखरकी चोट खाकर कुबेरके सारे अद्ध विह्नल हो गये और वे चूर- चूर हुए पर्वतकी भाँति सहसा पृथ्वीपर गिर पड़े

अध्याय 243

श्लोक 50

वित्तेशं विह्वलं दृष्ट्वा सर्वे ते यक्षराक्षसाः ।परिवार्य महात्मानं ररक्षुर्भीमविक्रमाः

vitteśaṃ vihvalaṃ dṛṣṭvā sarve te yakṣarākṣasāḥ | parivārya mahātmānaṃ rarakṣurbhīmavikramāḥ

हिन्दी अर्थ

महात्मा धनेशको विह्नल हुआ देख वे भयंकर पराक्रमी समस्त यक्ष और राक्षस उन्हें चारों ओरसे घेरकर उनकी रक्षा करने लगे

अध्याय 243

श्लोक 51

मुहूर्तं विह्वलो भूत्वा पुनर्विश्रवसः सुतः ।उपतस्थे च सहसा धनदः क्रोधमूर्च्छितः

muhūrtaṃ vihvalo bhūtvā punarviśravasaḥ sutaḥ | upatasthe ca sahasā dhanadaḥ krodhamūrcchitaḥ

श्लोक 51–52 का हिन्दी अर्थ

दो घड़ीतक व्याकुल रहनेके पश्चात्‌ विश्रवाके पुत्र धनदाता कुबेर सहसा उठकर खड़े हो गये और पुन: क्रोधसे मूर््छित हो तीनों लोकोंको प्रतिध्वनित करते हुए बड़े जोर-जोरसे सिंहनाद करने लगे। उस समय वे मेघोंकी गम्भीर गर्जनाके समान घोष उत्पन्न करने और पर्वतोंको भी ताप-सा देने लगे

अध्याय 243

श्लोक 52

स ननाद महानादं त्रैलोक्यमभिनादयन् ।जनयन्निव निर्घोषं विधमन्निव पर्वतान्

sa nanāda mahānādaṃ trailokyamabhinādayan | janayanniva nirghoṣaṃ vidhamanniva parvatān

अर्थ श्लोक 51 के साथ

अध्याय 243

श्लोक 53

तमवध्यं तु विज्ञाय निहन्तुं पुनरुत्थितम् ।प्रेक्ष्य पिङ्गाक्षमायान्तं दानवा विप्रदुद्रुवुः

tamavadhyaṃ tu vijñāya nihantuṃ punarutthitam | prekṣya piṅgākṣamāyāntaṃ dānavā vipradudruvuḥ

हिन्दी अर्थ

पिज्ल नेत्रवाले कुबेर अवध्य हैं और पुन: दानवोंका संहार करनेके लिये उठ गये हैं। यह जानकर उन्हें आते देख समस्त दानव सहसा भाग खड़े हुए

अध्याय 243

श्लोक 54

तांस्तु विद्रवतो दृष्ट्वानुह्रादो ह्यसुरोऽब्रवीत् ।कालनेमिं दानवं च वीर्यदर्पसमन्वितम्

tāṃstu vidravato dṛṣṭvānuhrādo hyasuro'bravīt | kālanemiṃ dānavaṃ ca vīryadarpasamanvitam

श्लोक 54–56 का हिन्दी अर्थ

उन सबको भागते देख असुर अनुह्ादने कहा—' महापराक्रमी दानवो! तुमलोग बल और दर्पसे भरे हुए दानव कालनेमिको, अपनेको तथा अपने पराक्रम और कुलको भूलकर निम्नश्रेणीके मनुष्योंकी भाँति भयभीत होकर कहाँ भागे जा रहे हो। लौट आओ ! क्यों अपने प्राण बचानेकी चेष्टामें लगे हो ? यह यक्ष युद्ध करनेमें समर्थ नहीं है, यह गर्जना इसकी महती विभीषिका- मात्र है

अध्याय 243

श्लोक 55

आत्मानं चैव वीर्यं च विस्मृत्याभिजनं तथा ।क्व गच्छथ भयत्रस्ताः प्राकृता इव दानवाः

ātmānaṃ caiva vīryaṃ ca vismṛtyābhijanaṃ tathā | kva gacchatha bhayatrastāḥ prākṛtā iva dānavāḥ

अर्थ श्लोक 54 के साथ

अध्याय 243

श्लोक 56

निवर्तध्वं महावीर्याः किं प्राणान् परिरक्षथ ।नालं युद्धाय यक्षोऽयं महतीयं विभीषिका

nivartadhvaṃ mahāvīryāḥ kiṃ prāṇān parirakṣatha | nālaṃ yuddhāya yakṣo'yaṃ mahatīyaṃ vibhīṣikā

अर्थ श्लोक 54 के साथ

अध्याय 243

श्लोक 57

एतां विभीषिकामद्य दानवानां समुत्थिताम् ।विक्रम्य विधमिष्यामि निवर्तध्वं महासुराः

etāṃ vibhīṣikāmadya dānavānāṃ samutthitām | vikramya vidhamiṣyāmi nivartadhvaṃ mahāsurāḥ

हिन्दी अर्थ

महानू असुरो! तुमलोग लौट आओ मैं यक्षाजकी इस विभीषिकाको, जो दानवोंके लिये उठी हुई है, पराक्रमपूर्वक नष्ट कर दूँगा '

अध्याय 243

श्लोक 58

तेऽसुराः सन्निवृत्ताश्च समदा इव कुञ्जराः ।निजघ्नुः परमक्रुद्धा देवसैन्यं महासुराः

te'surāḥ sannivṛttāśca samadā iva kuñjarāḥ | nijaghnuḥ paramakruddhā devasainyaṃ mahāsurāḥ

हिन्दी अर्थ

यह सुनकर मतवाले हाधियोंके समान वे असुर लौट आये और अत्यन्त क्रोधमें भरकर वे महान्‌ असुर देवसेनाका संहार करने लगे

अध्याय 243

श्लोक 59

क्षीणप्रहरणाः केचिन्महामेघनिभस्वनाः ।दर्पोत्कटा भुजैरेव सम्प्रहारं प्रचक्रिरे

kṣīṇapraharaṇāḥ kecinmahāmeghanibhasvanāḥ | darpotkaṭā bhujaireva samprahāraṃ pracakrire

हिन्दी अर्थ

कितने ही दैत्य आयुधोंके नष्ट हो जानेसे महान्‌ मेघके समान केवल गर्जना कर रहे थे। कितने ही उत्कट दर्पसे युक्त हो भुजाओंसे ही प्रहार करते थे

अध्याय 243

श्लोक 60

प्रांशुभिश्चैव काष्ठैश्च शिलाभिश्च महाबलाः ।बाहुभिश्च तथान्योन्यमाक्षिपन्ति स्म वेगिताः

prāṃśubhiścaiva kāṣṭhaiśca śilābhiśca mahābalāḥ | bāhubhiśca tathānyonyamākṣipanti sma vegitāḥ

हिन्दी अर्थ

वे महान्‌ बलशाली वेगवान्‌ योद्धा ऊँचे-ऊँचे काष्टों, शिलाओं तथा भुजाओंद्वारा एक-दूसरेपर प्रहार करते थे

अध्याय 243

श्लोक 61

मुष्टिभिश्च तलैश्चैव नखपातैर्महाबलाः ।पादपैश्च महाशाखैरयुध्यन्त रणाजिरे

muṣṭibhiśca talaiścaiva nakhapātairmahābalāḥ | pādapaiśca mahāśākhairayudhyanta raṇājire

हिन्दी अर्थ

महाबली सैनिक उस समराज्णमें मुक्कों, थप्पड़ों, नखप्रहारों तथा बड़ी- बड़ी शाखाऑवाले वृश्षोंद्वारा युद्ध करते थे

अध्याय 243

श्लोक 62

अनुह्रादस्तु सङ्क्रुद्धो देवतानां महाचमूम् ।ममन्थ परमायत्तो वनान्यग्निरिवोत्थितः

anuhrādastu saṅkruddho devatānāṃ mahācamūm | mamantha paramāyatto vanānyagnirivotthitaḥ

हिन्दी अर्थ

क्रोधमें भरा हुआ अनुहाद विजयके लिये परम प्रयत्शील हो देवताओंकी उस विशाल वाहिनीको उसी प्रकार मथने लगा, जैसे प्रज्वलित हुआ दावानल जंगलोंको जलाकर भस्म कर डालता है

अध्याय 243

श्लोक 63

रुधिरार्द्रास्तु बहवः शेरते योधसत्तमाः ।विकृताः पतिता भूमौ ताम्रपुष्पा इव द्रुमाः

rudhirārdrāstu bahavaḥ śerate yodhasattamāḥ | vikṛtāḥ patitā bhūmau tāmrapuṣpā iva drumāḥ

हिन्दी अर्थ

बहुत-से श्रेष्ठ योद्धा रक्तसे भीगकर विकृत अवस्थामें भूमिपर पड़े हुए सो रहे थे, जो लाल फूलवाले वृक्षोंके समान शोभा पाते थे

अध्याय 243

श्लोक 64

अनुह्रादस्य विक्रान्तो देवस्त्वाशीविषोपमान् ।युध्यमानस्य समरे व्यसृजन्निशिताञ्छरान्

anuhrādasya vikrānto devastvāśīviṣopamān | yudhyamānasya samare vyasṛjanniśitāñcharān

हिन्दी अर्थ

पराक्रमी देवता कुबेर समरभूमिमें जूझते हुए अनुहादपर विषधर सर्पोंक समान भयंकर और पैने बाणोंकी वर्षा करने लगे

अध्याय 243

श्लोक 65

धनाधिपेन विद्धस्य अनुह्रादस्य संयुगे ।अङ्गारमिश्राः क्रुद्धस्य मुखान्निश्चेरुरर्चिषः

dhanādhipena viddhasya anuhrādasya saṃyuge | aṅgāramiśrāḥ kruddhasya mukhānniścerurarciṣaḥ

हिन्दी अर्थ

युद्धमें धनाध्यक्ष कुबेरद्वारा घायल किये गये अनुह्वादके मुखसे क्रोधवश अड्ारयुक्त आगकी लपटें निकलने लगीं

अध्याय 243

श्लोक 66

अथ बाणसहस्रेण वित्तेशं दानवोत्तमः ।विव्याध स शरैः क्रुद्धो दण्डपाणिरिवान्तकः

atha bāṇasahasreṇa vitteśaṃ dānavottamaḥ | vivyādha sa śaraiḥ kruddho daṇḍapāṇirivāntakaḥ

हिन्दी अर्थ

तब कुपित हुए दण्डधारी यमराजके समान दानवशिरोमणि अनुह्वादने धनेश्वर कुबेरको अपने सहस््रों बाणोंसे घायल कर दिया

अध्याय 243

श्लोक 67

कुबेरस्तु शरैर्भिन्नः समन्तात्क्षतजोक्षितः ।रुधिरं परिसुस्राव गिरिः प्रस्रवणैरिव

kuberastu śarairbhinnaḥ samantātkṣatajokṣitaḥ | rudhiraṃ parisusrāva giriḥ prasravaṇairiva

हिन्दी अर्थ

सब ओरसे बाणोंद्वारा विदीर्ण हुए कुबेर रक्तसे नहा गये । जैसे झरनोंसे युक्त पर्वत पानीकी धारा बहाता है, उसी प्रकार कुबेर अपने अड्डोंसे रक्त बहाने लगे (और बेहोश हो गये)

अध्याय 243

श्लोक 68

लब्ध्वा स तु पुनः संज्ञां रोषरक्तेक्षणः सुरः ।गदामथ समासाद्य भीमां भीमपराक्रमः ।चिक्षेप दैत्यमुद्दिश्य बलात्क्रोधेन मूर्छितः

labdhvā sa tu punaḥ saṃjñāṃ roṣaraktekṣaṇaḥ suraḥ | gadāmatha samāsādya bhīmāṃ bhīmaparākramaḥ | cikṣepa daityamuddiśya balātkrodhena mūrchitaḥ

हिन्दी अर्थ

पुन: होशमें आनेपर रोषसे लाल आँखें किये भयानक पराक्रमी देवता कुबेरने भयंकर गदा हाथमें ले क्रोधसे अचेत-से होकर उस दैत्यको लक्ष्य करके उसे बलपूर्वक दे मारा

अध्याय 243

श्लोक 69

अप्राप्तामन्तरे सोऽथ तां गदां गदयासुरः ।बभञ्ज विनदन् क्रुद्धस्तदाश्चर्यमभूत् तदा

aprāptāmantare so'tha tāṃ gadāṃ gadayāsuraḥ | babhañja vinadan kruddhastadāścaryamabhūt tadā

हिन्दी अर्थ

किंतु सिंहनाद करते हुए उस दैत्यने निकट आनेसे पहले ही अपनी गदासे उस गदाको क्रोधपूर्वक बीचमें ही तोड़ डाला। उस समय वह एक आश्चर्यकी-सी बात हुई

अध्याय 243

श्लोक 70

प्रगृह्य तु गदां भूयो ह्यभिदुद्राव दानवम् ।तमापतन्तं दृष्ट्वैव अनुह्रादो महाबलः

pragṛhya tu gadāṃ bhūyo hyabhidudrāva dānavam | tamāpatantaṃ dṛṣṭvaiva anuhrādo mahābalaḥ

श्लोक 70–71 का हिन्दी अर्थ

कुबेर पुन: गदा लेकर उस दानवकी ओर दौड़े। महाबली अनुहाद उन्हें आक्रमण करते देख कैलास पर्वतके सदूश विशाल शैलशिखर-सा उखाड़कर मुँह बाये हुए कालके समान धनाध्यक्षकी ओर दौड़ा

अध्याय 243

श्लोक 71

गिरिशृङ्गमिवोत्पाट्य कैलासाचलसन्निभम् ।धनाधिपं प्रदुद्राव व्यादितास्य इवान्तकः

giriśṛṅgamivotpāṭya kailāsācalasannibham | dhanādhipaṃ pradudrāva vyāditāsya ivāntakaḥ

अर्थ श्लोक 70 के साथ

अध्याय 243

श्लोक 72

तमन्तकमिवायान्तमजेयं सकलैः सुरैः ।ग्रसन्तमिव तं दैत्यं त्रैलोक्यमखिलं रुषा

tamantakamivāyāntamajeyaṃ sakalaiḥ suraiḥ | grasantamiva taṃ daityaṃ trailokyamakhilaṃ ruṣā

श्लोक 72–73 का हिन्दी अर्थ

वह दैत्य समस्त देवताओंके लिये अजेय था और यमराजके समान रोषवश सम्पूर्ण त्रिलोकीको ग्रस लेनेके लिये उद्यत जान पड़ता था। उसे उस रूपमें आते देख धनाध्यक्ष कुबेर भयके कारण रणभूमिका त्यागकर उस स्थानपर चले गये, जहाँ देवराज इन्द्र युद्ध करते थे

अध्याय 243

श्लोक 73

तमालोक्य तथा भूतं धनाध्यक्षो रणं भयात् ।अपहाय ययौ तत्र यत्र शक्रः सुराधिपः

tamālokya tathā bhūtaṃ dhanādhyakṣo raṇaṃ bhayāt | apahāya yayau tatra yatra śakraḥ surādhipaḥ

अर्थ श्लोक 72 के साथ

अध्याय 243

श्लोक 74

तस्य चापि महत् कर्म दृष्ट्वा वित्तपतिस्तदा ।जगाम भयसन्त्रस्तो यत्र देवः शचीपतिः

tasya cāpi mahat karma dṛṣṭvā vittapatistadā | jagāma bhayasantrasto yatra devaḥ śacīpatiḥ

हिन्दी अर्थ

उसका महान्‌ पराक्रम देखकर धनपति कुबेर भयसे थर्र उठे और जहाँ शचीपति इन्द्र थे, वहीं चले गये

स्रोत: local proofread transcription: Sanskrit shlokas of the Harivamsa (Harivamsha, Vishnu and Bhavishya parvas) from sanskritdocuments.org. One chapter per adhyaya; verse numbers as printed in the source (restarting in each adhyaya). Appendix sections are not included. · प्राप्त 19/10/2026

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स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

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6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

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Collated with BORI Critical Edition of Mahabharata Khilaparvan.