Harivamsha Purana
239
अध्याय 239 / 318

Parva 3, Adhyāya 56

64 श्लोक

पूर्ण अध्याय पाठ64 श्लोक

अध्याय 239

श्लोक 1

देवदानवानां घोरसङ्ग्रामं - विरोचनस्य विष्वक्सेनेन सह, कुजम्भस्य अंशदेवेन सह युद्धकाले घोरपराक्रमस्य प्रदर्शनं तस्मिन् महाहवे रौद्रे तुमुले लोमहर्षणे ।ववर्षुः शरवर्षाणि संरब्धा देवदानवाः

devadānavānāṃ ghorasaṅgrāmaṃ - virocanasya viṣvaksenena saha, kujambhasya aṃśadevena saha yuddhakāle ghoraparākramasya pradarśanaṃ tasmin mahāhave raudre tumule lomaharṣaṇe | vavarṣuḥ śaravarṣāṇi saṃrabdhā devadānavāḥ

हिन्दी अर्थ

बैशम्पायनजी कहते हैं—जनमेजय ! वह महायुद्ध बड़ा ही भयंकर, तुमुल और रोमाज्कारी था। उसमें देवता और दानव उभय पक्षके योद्धा रोषमें भरकर बाणोंकी वर्षा करते थे

अध्याय 239

श्लोक 2

व्याक्रोशन्त गजास्तत्र शरघातप्रपीडिताः ।अश्वाश्च पर्यधावन्त हतारोहा दिशो दश

vyākrośanta gajāstatra śaraghātaprapīḍitāḥ | aśvāśca paryadhāvanta hatārohā diśo daśa

हिन्दी अर्थ

वहाँ बाणोंके आघातसे अत्यन्त पीड़ित हो हाथी घोर चीत्कार कर रहे थे और जिनके सवार मारे गये थे, वे घोड़े दसों दिशाओंनमें चक्कर लगा रहे थे

अध्याय 239

श्लोक 3

उत्पत्य निपतन्त्यन्ये शरवर्षप्रपीडिताः ।देवानां दानवानां च गजाश्वरथिनां रणे

utpatya nipatantyanye śaravarṣaprapīḍitāḥ | devānāṃ dānavānāṃ ca gajāśvarathināṃ raṇe

श्लोक 3–4 का हिन्दी अर्थ

कितने ही घोड़े बाणोंकी वर्षासे अत्यन्त व्यथित हो उछलकर गिर पड़ते थे। देवताओं और दानवोंके शूरवीर गजारोही, अश्वारोही तथा रथी पमराड्णमें एक-दूसरेपर धावा करते थे। उनके धनुषोंकी प्रत्यज्ञाके शब्दसे इतना कोलाहल होता था कि दूसरी किसी बातका ज्ञान नहीं होता था

अध्याय 239

श्लोक 4

समरे तत्र शूराणामन्योन्यमभिधावताम् ।धनुर्ज्यातलशब्देन न प्राज्ञायत किञ्चन

samare tatra śūrāṇāmanyonyamabhidhāvatām | dhanurjyātalaśabdena na prājñāyata kiñcana

अर्थ श्लोक 3 के साथ

अध्याय 239

श्लोक 5

शरशक्तिगदाभिस्ते खड्गैश्चामिततेजसः ।निजघ्नुर्महतीं सेनामन्योन्यस्य परन्तप

śaraśaktigadābhiste khaḍgaiścāmitatejasaḥ | nijaghnurmahatīṃ senāmanyonyasya parantapa

हिन्दी अर्थ

शत्रुओंको पंताप देनेवाले नरेश्वर! वे अमिततेजस्वी योद्धा बाण, शक्ति, गदा और खड्गोंसे एक-दूसरेकी विशाल सेनाका पंहार कर रहे थे

अध्याय 239

श्लोक 6

बाहूनामुत्तमाङ्गानां कार्मुकाणां च संयुगे ।राशयस्तत्र दृश्यन्ते देवदैत्यसमागमे

bāhūnāmuttamāṅgānāṃ kārmukāṇāṃ ca saṃyuge | rāśayastatra dṛśyante devadaityasamāgame

हिन्दी अर्थ

देवताओं और दैत्योंके उस पंग्राममें युद्धक्षेत्रके भीतर कटी हुई भुजाओं, मस्तकों और धनुषोंकी बहुत-सी राशियाँ दिखायी देती थीं

अध्याय 239

श्लोक 7

अश्वानां कुञ्जराणां च रथानां च वरूथिनाम् ।नान्तं समभिगच्छन्ति निहतानां सुरासुरैः

aśvānāṃ kuñjarāṇāṃ ca rathānāṃ ca varūthinām | nāntaṃ samabhigacchanti nihatānāṃ surāsuraiḥ

हिन्दी अर्थ

तरहाँ देवताओं और असुरोंद्वारा मारे गये घोड़ों, हाथियों, आावरणयुक्त रथों और रथियोंका कोई अन्त नहीं पाता था

अध्याय 239

श्लोक 8

गदाभिरसिभिः प्रासैर्भल्लैः सन्नतपर्वभिः ।योधास्तत्राभ्यहन्यन्त हस्त्यश्वं चामितं बहु

gadābhirasibhiḥ prāsairbhallaiḥ sannataparvabhiḥ | yodhāstatrābhyahanyanta hastyaśvaṃ cāmitaṃ bahu

हिन्दी अर्थ

उस युद्धमें गदाओं, तलबवारों, प्रासों और भुकी हुई गाँठवाले भल्लॉद्वारा बहुत-से योद्धा और असंख्य हाथी-घोड़े मारे गये

अध्याय 239

श्लोक 9

प्रावर्तत नदी घोरा शोणितौघा तरङ्गिणी ।तदा मध्ये तु सैन्यानां केशशैवलशाद्वला

prāvartata nadī ghorā śoṇitaughā taraṅgiṇī | tadā madhye tu sainyānāṃ keśaśaivalaśādvalā

हिन्दी अर्थ

उस समय दोनों पेनाओंके बीचमें खूनकी भयंकर नदी बह चली। जिसमें रक्तके स्रोत और तरज़ें दिखायी देती थीं। पोद्धाओंके केश उसमें सेवार और घासके समान प्रतीत होते थे

अध्याय 239

श्लोक 10

हाहाकारो महाशब्दो योधानामभवत् तदा ।दानवैर्हन्यमानानां त्रिदशानां महारणे

hāhākāro mahāśabdo yodhānāmabhavat tadā | dānavairhanyamānānāṃ tridaśānāṃ mahāraṇe

हिन्दी अर्थ

उस महायुद्धमें दानवोंद्वारा मारे जाते हुए देवयोद्धाओंका महान्‌ हाहाकार शब्द उस समय सब ओर गूँज रहा था

अध्याय 239

श्लोक 11

तेषां तदभवद् युद्धं देवानामसुरैः सह ।विभीषणं महारौद्रं विकृतं भीमदर्शनम्

teṣāṃ tadabhavad yuddhaṃ devānāmasuraiḥ saha | vibhīṣaṇaṃ mahāraudraṃ vikṛtaṃ bhīmadarśanam

हिन्दी अर्थ

वैशम्पायनजी कहते हैं—जनमेजय ! उन देवताओंका असुरोंके साथ बड़ा भयंकर, महारौद्र, विकराल तथा देखनेमें डरावना युद्ध हो रहा था

अध्याय 239

श्लोक 12

विरोचनस्तु तत्रैव विष्वक्सेनं महाहवे ।जघान रुधिराभाक्षं साध्यं परमधन्विनम्

virocanastu tatraiva viṣvaksenaṃ mahāhave | jaghāna rudhirābhākṣaṃ sādhyaṃ paramadhanvinam

हिन्दी अर्थ

वहीं उस महासमरमें विरोचनने लाल नेत्रवाले उत्तम धनुर्धर पाध्य देवता विष्वक्सेनको अपने बाणोंका निशाना बनाया

अध्याय 239

श्लोक 13

तमायान्तमभिप्रेक्ष्य विष्वक्सेनः सुरैर्वृतः ।अमेयात्मा सुरश्रेष्ठः प्रत्यविध्यत् स्तनान्तरे

tamāyāntamabhiprekṣya viṣvaksenaḥ surairvṛtaḥ | ameyātmā suraśreṣṭhaḥ pratyavidhyat stanāntare

हिन्दी अर्थ

मोडध्याय: + श१४९ देवताओंसे घिरे हुए अमेय आत्मबलसे सम्पन्न सुस्श्रेष्ठ विष्वक्सेनने विरोचनको आते देख उसकी छातीमें बाणोंद्वारा गहरी चोट पहुँचायी

अध्याय 239

श्लोक 14

साध्यस्य बाणाभिहतस्तोत्रार्पित इव द्विपः ।विरोचनः प्रजज्वाल क्रोधेनाग्निरिवाध्वरे

sādhyasya bāṇābhihatastotrārpita iva dvipaḥ | virocanaḥ prajajvāla krodhenāgnirivādhvare

हिन्दी अर्थ

साध्य देवताके बाणोंसे आहत हुए विरोचनको अड्भशकी मार खाये हाथीके समान बड़ा कोप हुआ। वह यज्ञशालामें अग्निकी भाँति उस रणभूमिमें क्रोधसे प्रज्वलित हो उठा

अध्याय 239

श्लोक 15

स कार्मुकविनिर्मुक्तैः शरैर्दानवसत्तमः ।विष्वक्सेनं बिभेदाजौ दीप्तैः सप्तभिराशुगैः

sa kārmukavinirmuktaiḥ śarairdānavasattamaḥ | viṣvaksenaṃ bibhedājau dīptaiḥ saptabhirāśugaiḥ

हिन्दी अर्थ

उस दानवशिरोमणिने अपने धनुषसे छूटे हुए सात तेजस्वी तथा शीघ्रगामी बाणोंद्वारा युद्धस्थलमें विष्वक्सेनको विदीर्ण कर दिया

अध्याय 239

श्लोक 16

सोऽतिविद्धो बलवता दानवेन सुरोत्तमः ।मूर्च्छामभिजगामाशु ध्वजं चाप्याश्रयत्प्रभुः

so'tividdho balavatā dānavena surottamaḥ | mūrcchāmabhijagāmāśu dhvajaṃ cāpyāśrayatprabhuḥ

हिन्दी अर्थ

उस बलवान्‌ दानवके द्वारा गहरा आघात पाकर प्रभावशाली सुरश्रेष्ठ विष्वक्सेनको तुरंत मूर्च्छा आ गयी और वे ध्वजका सहारा लेकर टिक गये

अध्याय 239

श्लोक 17

ततः स पुनराश्वस्य साध्यो युद्धे मनो दधे ।विस्फार्य च महाचापं दैत्यमध्ये व्यवस्थितः

tataḥ sa punarāśvasya sādhyo yuddhe mano dadhe | visphārya ca mahācāpaṃ daityamadhye vyavasthitaḥ

हिन्दी अर्थ

तदनन्तर पुनः होशमें आकर दैत्योंके बीचमें खड़े हुए साध्य देवताने अपने विशाल धनुषको तानकर युद्धमें मन लगाया

अध्याय 239

श्लोक 18

विरोचनस्तु बलवानभ्ययुध्यत सर्वशः ।क्षोभयन् सुरसैन्यानि समन्तान्निशितैः शरैः

virocanastu balavānabhyayudhyata sarvaśaḥ | kṣobhayan surasainyāni samantānniśitaiḥ śaraiḥ

हिन्दी अर्थ

उधर बलवान्‌ विरोचन अपने तीखे बाणोंद्वारा देवसेनाओंको सब ओरसे क्षोभमें डालता हुआ सबके सामने युद्ध करने लगा

अध्याय 239

श्लोक 19

ततस्तस्यासुरेन्द्रस्य युद्ध्यमानस्य संयुगे ।श्रूयते तुमुलः शब्दो जीमूतस्येव गर्जतः

tatastasyāsurendrasya yuddhyamānasya saṃyuge | śrūyate tumulaḥ śabdo jīmūtasyeva garjataḥ

हिन्दी अर्थ

युद्धस्थलमें जूझते हुए उस असुरशिरोमणिका गर्जते हुए मेघके समान भयंकर सिंहनाद सुनायी पड़ता था

अध्याय 239

श्लोक 20

जगर्ज च महाघोषो विनिघ्नन् देववाहिनीम् ।चण्डवेगाश्मवर्षी च सविद्युत्स्तनयित्नुमान्

jagarja ca mahāghoṣo vinighnan devavāhinīm | caṇḍavegāśmavarṣī ca savidyutstanayitnumān

हिन्दी अर्थ

वह महान्‌ घोष करनेवाला दैत्य प्रचण्ड बेगसे पत्थरोंकी वर्षा करनेवाले बिजलीसहित मेघसमूहकी भाँति देवसेनाका संहार करता हुआ जोर-जोरसे गर्जना करने लगा

अध्याय 239

श्लोक 21

दिशो विद्रावयामास शरवर्षेण दानवः ।सर्वसैन्यानि देवानामुद्यतास्त्रो महाहवे

diśo vidrāvayāmāsa śaravarṣeṇa dānavaḥ | sarvasainyāni devānāmudyatāstro mahāhave

हिन्दी अर्थ

उस महायुद्धमें अस्त्र उठाये हुए उस दानवने अपने बाणोंकी वर्षासे देवताओंकी समस्त सेनाओंको मार भगाया

अध्याय 239

श्लोक 22

ते प्राद्रवन्त वित्रस्ता रथेभ्यो रथिनस्तदा ।सादिनश्चाश्वपृष्ठेभ्यो भूमौ चापि पदातयः

te prādravanta vitrastā rathebhyo rathinastadā | sādinaścāśvapṛṣṭhebhyo bhūmau cāpi padātayaḥ

हिन्दी अर्थ

वे देवसैनिक रथी रथोंसे और घुड़सवार घोड़ोंकी पीठोंसे उतरकर भयभीत होकर भागे, भूमिपर खड़े हुए पैदल योद्धा भी पलायन करने लगे

अध्याय 239

श्लोक 23

श्रुत्वा कार्मुकनिर्घोषं विस्फूर्जितमिवाशनेः ।सर्वसैन्यानि भीतानि निव्यलीयन्त संयुगे

śrutvā kārmukanirghoṣaṃ visphūrjitamivāśaneḥ | sarvasainyāni bhītāni nivyalīyanta saṃyuge

हिन्दी अर्थ

वज्रकी गड़गड़ाहटके समान उसके धनुषकी टंकार सुनकर सारी देवसेनाएँ भयभीत हो युद्धस्थलमें लुकने-छिपने लगीं

अध्याय 239

श्लोक 24

विरोचनभयत्रस्ता रथेभ्यो रथिनस्तदा ।पदातीनां ययुः सङ्घा यत्र देवः शचीपतिः

virocanabhayatrastā rathebhyo rathinastadā | padātīnāṃ yayuḥ saṅghā yatra devaḥ śacīpatiḥ

हिन्दी अर्थ

विरोचनके भयसे डरे हुए रथी रथोंसे उतरकर पैदलसमूहोंको साथ ले उस स्थानपर चले गये, जहाँ शचीवल्लभ इन्द्रदेव विराजमान थे

अध्याय 239

श्लोक 25

विष्वक्सेनस्य साध्यस्य सर्वतः सुमहाबलः ।पदा रक्षःसहस्राणि निजघान चतुर्दश

viṣvaksenasya sādhyasya sarvataḥ sumahābalaḥ | padā rakṣaḥsahasrāṇi nijaghāna caturdaśa

हिन्दी अर्थ

साध्य देवता विष्वक्सेनके चारों ओर जो चौदह हजार राक्षस (कुबेरकी सेनामें देव- पक्षकी ओरसे आये) थे, उन्हें महाबली विरोचनने लातोंसे ही मार गिराया

अध्याय 239

श्लोक 26

अश्ववृन्देषु नागेषु रथानीकेषु चाभिभूः ।पदातीनां च सङ्घेषु विनिघ्नन् प्रत्यदृश्यत

aśvavṛndeṣu nāgeṣu rathānīkeṣu cābhibhūḥ | padātīnāṃ ca saṅgheṣu vinighnan pratyadṛśyata

हिन्दी अर्थ

शत्रुओंको पराजित करनेवाला विरोचन देवताओंके अश्वसमूहों, नागों, स्थसमुदायों तथा पैदलोंके दलोंमें भी मारकाट मचाता हुआ दृष्टिगोचर होता था

अध्याय 239

श्लोक 27

वितत्य श्येनवत् पक्षौ सर्वतः स वरूथिनीम् ।भित्त्वा छित्त्वा महाबाहुः शिरांस्याजौ ह्यकृन्तत

vitatya śyenavat pakṣau sarvataḥ sa varūthinīm | bhittvā chittvā mahābāhuḥ śirāṃsyājau hyakṛntata

हिन्दी अर्थ

वह महाबाहु वीर पंख फैलाकर आक्रमण करनेवाले बाजकी भाँति देवसेनाको सब ओरसे छिन्न- भिन्न करके योद्धाओंके सिर काट लेता था

अध्याय 239

श्लोक 28

सादिनश्च पदाताश्च हतशेषा रथास्तथा ।विष्वक्सेनेन सहिता विरोचनमथाद्रवन्

sādinaśca padātāśca hataśeṣā rathāstathā | viṣvaksenena sahitā virocanamathādravan

हिन्दी अर्थ

मरनेसे बचे हुए घुड़सवार, पैदल और रथी विष्वक्सेनके साथ होकर विरोचनपर टूट पड़े

अध्याय 239

श्लोक 29

तेऽसिचर्मगदाशक्तिपरिघप्रासतोमरैः ।तमेकमभ्यधावन्त सिंहनादं प्रचक्रिरे

te'sicarmagadāśaktiparighaprāsatomaraiḥ | tamekamabhyadhāvanta siṃhanādaṃ pracakrire

हिन्दी अर्थ

वे ढाल, तलवार, गदा, शक्ति, परिघ, प्रास और तोमरोंद्वारा उस एकमात्र विरोचनकी ओर दौड़े तथा सिंहनाद करने लगे

अध्याय 239

श्लोक 30

ततः सोऽसिं समुद्यम्य जवमास्थाय दानवः ।वकर्त रथिनामाजौ शिरांसि च धनूंषि च

tataḥ so'siṃ samudyamya javamāsthāya dānavaḥ | vakarta rathināmājau śirāṃsi ca dhanūṃṣi ca

हिन्दी अर्थ

परंतु उस दानवने उत्तम वेगका आश्रय ले तलवार उठाकर युद्धस्थलमें शत्रुपक्षके रथी योद्धाओंके सिर और धनुष काट लिये

अध्याय 239

श्लोक 31

रथनागाश्ववृन्देषु बलवानरिसूदनः ।विरोचनश्चरन् मार्गान् प्रकारानेकविंशतिम्

rathanāgāśvavṛndeṣu balavānarisūdanaḥ | virocanaścaran mārgān prakārānekaviṃśatim

श्लोक 31–32 का हिन्दी अर्थ

बलवान्‌ शत्रुसूदन विरोचन रथ, नाग तथा अश्वोंके समुदायमें विचरता हुआ श्रान्त, उद्भ्रान्त, आविद्ध, आप्लुत, विप्लुत, प्लुत, सम्पात और समुदीर्ण आदि तलवारके इक्कीस* पैंतरे दिखाने लगा

अध्याय 239

श्लोक 32

भ्रान्तमुद्भ्रान्तमाविद्धमाप्लुतं विप्लुतं प्लुतम् ।सम्पातं समुदीर्णं च दर्शयामास दानवः

bhrāntamudbhrāntamāviddhamāplutaṃ viplutaṃ plutam | sampātaṃ samudīrṇaṃ ca darśayāmāsa dānavaḥ

अर्थ श्लोक 31 के साथ

अध्याय 239

श्लोक 33

केचिद् वरासिना रुग्णा दानवेन महात्मना ।विनेदुश्छिन्नवर्माणो निपेतुश्च गतासवः

kecid varāsinā rugṇā dānavena mahātmanā | vineduśchinnavarmāṇo nipetuśca gatāsavaḥ

हिन्दी अर्थ

उस महामनस्वी दानवने कितनोंको अपनी उत्तम तलवारसे बहुत ही घायल कर दिया, उनके कवच भी छिन्न- भिन्न कर दिये, अत: वे आर्तनाद करने लगे और प्राणशून्य होकर पृथ्वीपर गिर पड़े

अध्याय 239

श्लोक 34

छिन्नपृष्ठा हतारोहा दानवेन महात्मना ।विद्रुताः स्वान्यनीकानि जघ्नुस्त्रिदशवारणाः

chinnapṛṣṭhā hatārohā dānavena mahātmanā | vidrutāḥ svānyanīkāni jaghnustridaśavāraṇāḥ

हिन्दी अर्थ

उस महाकाय दैत्य विरोचनने देवताओंके हाथियोंके पृष्ठभागमें घाव कर दिये और उनके सवारोंको मार डाला, अतः वे भागते हुए अपनी ही सेनाओंको कुचलने लगे

अध्याय 239

श्लोक 35

निपेतुरुर्व्यामाकाशे निकृता दृढधन्विना ।विविधास्तोमराश्चापा महामात्रशिरांसि च

nipetururvyāmākāśe nikṛtā dṛḍhadhanvinā | vividhāstomarāścāpā mahāmātraśirāṃsi ca

हिन्दी अर्थ

सुदृढ़ धनुष धारण करनेवाले उस दानव वीरने नाना प्रकारके तोमर, धनुष और महावतोंके सिर आकाशमें ही काट दिये। वे कटे हुए तोमर आदि पृथ्वीपर गिर पड़े

अध्याय 239

श्लोक 36

प्रतीपमाहरन्नागानश्वांश्च दृढविक्रमान् ।चकर्त रथिनः कांश्चित् परामृश्य महाबलः ।सूतांश्चिच्छेद खड्गेन रथानपि च दानवः

pratīpamāharannāgānaśvāṃśca dṛḍhavikramān | cakarta rathinaḥ kāṃścit parāmṛśya mahābalaḥ | sūtāṃściccheda khaḍgena rathānapi ca dānavaḥ

हिन्दी अर्थ

महाबली दानव विरोचन सुदृढ़ पराक्रमवाले हाथियों और घोड़ोंको भी पीछे खींच लेता था। कितने ही रथियोंको पकड़कर तलवारसे काट डालता था तथा सारथियों और रथोंके भी टुकड़े-टुकड़े कर देता था

अध्याय 239

श्लोक 37

मुहुरुत्पततो दिक्षु धावतश्च यशस्विनः ।मार्गांश्चरति वैचित्रान् व्यस्मयन्त ततोऽसुराः

muhurutpatato dikṣu dhāvataśca yaśasvinaḥ | mārgāṃścarati vaicitrān vyasmayanta tato'surāḥ

हिन्दी अर्थ

सम्पूर्ण दिशाओंमें बारम्बार उछलते और दौड़ते हुए यशस्वी वीरोंको भी उसने तलवारके घाट उतार दिया। वह विचित्र मार्गों (पैंतरों )-से चलता था, जिससे असुर भी विस्मयमें पड़ जाते थे

अध्याय 239

श्लोक 38

निजघान पदा काश्चिदाक्षिप्यान्यानपोथयत् ।खड्गेन चान्यांश्चिच्छेद नादेनान्यांश्च भीषयन्

nijaghāna padā kāścidākṣipyānyānapothayat | khaḍgena cānyāṃściccheda nādenānyāṃśca bhīṣayan

हिन्दी अर्थ

उसने कितने ही वीरोंको पैरोंसे कुचल डाला, दूसरे बहुत- से योद्धाओंको घुमाकर पृथ्वीपर दे मारा, कितनोंको तलवारसे काट डाला और अन्य कितने ही सैनिकोंको भीषण सिंहनादसे डरा दिया

अध्याय 239

श्लोक 39

ऊरुस्तम्भगृहीताश्च निपतन्त्यपरे भुवि ।अपरे दैत्यमालोक्य भयात्प्राणानवासृजन्

ūrustambhagṛhītāśca nipatantyapare bhuvi | apare daityamālokya bhayātprāṇānavāsṛjan

हिन्दी अर्थ

कितने ही योद्धाओंकी जाँघें अकड़ गयीं और वे पृथ्वीपर गिर पड़े। दूसरे बहुत-से सैनिकोंने उस दैत्यको देखते ही भयके मारे प्राण त्याग दिये

अध्याय 239

श्लोक 40

तस्मिंस्तथा वर्तमाने युद्धे महति दारुणे ।रथौघगजपत्तीनां सुराणां च महाक्षये

tasmiṃstathā vartamāne yuddhe mahati dāruṇe | rathaughagajapattīnāṃ surāṇāṃ ca mahākṣaye

श्लोक 40–41 का हिन्दी अर्थ

प॒ हाथ बताये गये हैं। उन्हींमेंसे इक्कीसको यहाँ समझ रथसमूह, हाथी और पैदल योद्धाओं तथा देवताओंका महान्‌ विनाश करनेवाला वह अत्यन्त भयंकर महायुद्ध अभी चल ही रहा था कि दानवशिरोमणि कुजम्भ युद्धस्थलमें आकर अंश नामक आदित्यके साथ युद्ध करने लगा, जैसे एक साँड़ अपने विरोधी सॉडसे जा भिड़ा हो

अध्याय 239

श्लोक 42

कुजम्भो दानवश्रेष्ठो ह्यंशमादित्यमाहवे ।योधयामास समरे वृषः प्रतिवृषं यथा ४१॥ जघानाचलसङ्काशो मत्तवारणविक्रमः ।स्फुरद्भिर्निशितैस्तीक्ष्णशरैर्बहुभिराशुगैः

kujambho dānavaśreṣṭho hyaṃśamādityamāhave | yodhayāmāsa samare vṛṣaḥ prativṛṣaṃ yathā 41|| jaghānācalasaṅkāśo mattavāraṇavikramaḥ | sphuradbhirniśitaistīkṣṇaśarairbahubhirāśugaiḥ

श्लोक 42–44 का हिन्दी अर्थ

पर्वतके समान विशालकाय अर मतवाले हाथीके समान पराक्रमी कुजम्भने अपने तीखे चमकीले, बहुसंख्यक, शीघ्रगामी और पैने बाणोंद्रर उस महासमरमें देवसेनाके सहस्रों योद्धाओंका रथों- सहित संहार कर डाला। उसके बाणके मार्गमें पड़ऊर कोई भी ठहर न सका। सभी प्राणी आर्तनाद करने लगे तथा समस्त दिशाओंमें अन्धकार छा गया देवताओंको बड़ी ही कठोर एवं भयंकर पराजय प्र हुई॥ ४र—

अध्याय 239

श्लोक 43

देवसैन्यसहस्राणि सरथानि महाहवे ।तस्य बाणपथं प्राप्य नाभ्यवर्तन्त सर्वशः

devasainyasahasrāṇi sarathāni mahāhave | tasya bāṇapathaṃ prāpya nābhyavartanta sarvaśaḥ

अर्थ श्लोक 42 के साथ

अध्याय 239

श्लोक 44

प्रणेदुः सर्वभूतानि बभूवुस्तिमिरा दिशः ।देवानामजयः क्रूरः प्रत्यपद्यत दारुणः

praṇeduḥ sarvabhūtāni babhūvustimirā diśaḥ | devānāmajayaḥ krūraḥ pratyapadyata dāruṇaḥ

अर्थ श्लोक 42 के साथ

अध्याय 239

श्लोक 45

अंशस्तु दानवेन्द्रस्य जघानोत्तमविक्रमः ।अनीकं दशसाहस्रं कुञ्जराणां तरस्विनाम्

aṃśastu dānavendrasya jaghānottamavikramaḥ | anīkaṃ daśasāhasraṃ kuñjarāṇāṃ tarasvinām

हिन्दी अर्थ

उत्तम पराक्रमी अंशने दानवगऊ कुजम्भके दस हजार वेगशाली हाथियोंकी सेना संहार कर डाला

अध्याय 239

श्लोक 46

आपतन्तं गजानीकं कुजम्भो वीक्ष्य दानवः ।गदापाणिरवारोहद् रथोपस्थादरिन्दमः

āpatantaṃ gajānīkaṃ kujambho vīkṣya dānavaḥ | gadāpāṇiravārohad rathopasthādarindamaḥ

हिन्दी अर्थ

देवताओंकी गजसेनाको अपन ऊपर आक्रमण करती देख शत्रुओंका दमन करनेवा दानव कुजम्भ हाथमें गदा लेकर रथकी बैठकसे उतर पड़ा

अध्याय 239

श्लोक 47

अद्रिसारमयीं गुर्वीं प्रगृह्य महतीं गदाम् ।अभ्यद्रवद् गजानीकं व्यादितास्य इवान्तकः

adrisāramayīṃ gurvīṃ pragṛhya mahatīṃ gadām | abhyadravad gajānīkaṃ vyāditāsya ivāntakaḥ

श्लोक 47–48 का हिन्दी अर्थ

पर्वतके सारभूत लोहेकी बनी हुई उस भर एवं विशाल गदाको हाथमें लेकर कुजम्भ मुँह बाये हुए कालके समान देवताओंकी गजसेनाकी ओर दौड़ा ॥ ४८ दानवशिरोमणि कुजम्भ बलमें बहुत बढ़ा-चढ़ा था। द5 गदाधारी बलवान्‌ वीर गदासे हाथियोंका वध करता हुआ समराडणमें विचरने लगा

अध्याय 239

श्लोक 48

स गजान् गदया निघ्नन् व्यचरत्समरे बली ।कुजम्भो दानवश्रेष्ठो गदापाणिर्बलाधिकः

sa gajān gadayā nighnan vyacaratsamare balī | kujambho dānavaśreṣṭho gadāpāṇirbalādhikaḥ

अर्थ श्लोक 47 के साथ

अध्याय 239

श्लोक 49

विशीर्णदन्तांश्च वद्वन्भिन्नकुम्भाम्बदारुणान् ।अकरोद् दानवश्रेष्ठ उद्दिश्योद्दिश्य तान् बली

viśīrṇadantāṃśca vadvanbhinnakumbhāmbadāruṇān | akarod dānavaśreṣṭha uddiśyoddiśya tān balī

हिन्दी अर्थ

बलवान्‌ दानवशिरोम कुजम्भने नाम ले-लेकर बहुतेरे भयंकर गजराजोंके दाँत तोड़ दिये और कुम्भस्थल फोड़ डाले

अध्याय 239

श्लोक 50

विशीर्णदन्ता बहवो भिन्नकुम्भास्तथा परे ।कुजम्भेनार्दिता नागा व्यद्रवन्त दिशो दश

viśīrṇadantā bahavo bhinnakumbhāstathā pare | kujambhenārditā nāgā vyadravanta diśo daśa

हिन्दी अर्थ

कुजम्भरे पीड़ित हो टूटे दाँत और फूटे कुम्भस्थलवाले बहुत-रे हाथी दसों दिशाओंमें भाग रहे थे

अध्याय 239

श्लोक 51

कुजम्भस्य च येऽमात्या दानवा घोरविक्रमाः ।नाराचैर्विविधैस्तीक्ष्णैरपास्तगजयोधिनः

kujambhasya ca ye'mātyā dānavā ghoravikramāḥ | nārācairvividhaistīkṣṇairapāstagajayodhinaḥ

श्लोक 51–52 का हिन्दी अर्थ

कुजम्भके जो मन्त्री थे, उन घोर पराक्रमी दानवोंने नाना प्रकारके तीखे नाराचोंसे गजारोहियोंको धराशायी कर दिया॥ ५१ दानवराज कुजम्भने क्षुर, क्षुरप्र, भल्ल, पात तथा तीखे अज्जलिक नामक बाणोंसे शत्रुपक्षके हाथियोंके मस्तक काट डाले

अध्याय 239

श्लोक 52

क्षुरैः क्षुरप्रैर्भल्लैश्च पातैरञ्जलिकैः शितैः ।चिच्छेद चोत्तमाङ्गानि कुजम्भो दानवोत्तमः

kṣuraiḥ kṣuraprairbhallaiśca pātairañjalikaiḥ śitaiḥ | ciccheda cottamāṅgāni kujambho dānavottamaḥ

अर्थ श्लोक 51 के साथ

अध्याय 239

श्लोक 53

शिरोभिः प्रपतद्भिस्तु गगनं प्रत्यपूर्यत ।अश्मवृष्टिरिवाकाशे बहुभिश्च सहाङ्कुशैः

śirobhiḥ prapatadbhistu gaganaṃ pratyapūryata | aśmavṛṣṭirivākāśe bahubhiśca sahāṅkuśaiḥ

हिन्दी अर्थ

अड्भ्शोंसहित हाथियोंके बहुसंख्यक | मस्तकोंके गिरनेसे सारा आकाश भर गया। उस समय ऐसा जान पड़ता था, मानो आकाशभमें पत्थरोंकी वर्षा हो रही हो

अध्याय 239

श्लोक 54

कृत्तोत्तमाङ्गाः स्कन्धेषु गजानां गजयोधिनः ।अदृश्यन्त महाराज ताला विशिरसो यथा

kṛttottamāṅgāḥ skandheṣu gajānāṃ gajayodhinaḥ | adṛśyanta mahārāja tālā viśiraso yathā

हिन्दी अर्थ

महाराज! हाथियोंके कंधोंपर बैठे हुए गजारोही योद्धा मस्तकोंके कट जानेपर शिखारहित ताड़-वृक्षोंके समान जान पड़ते थे

अध्याय 239

श्लोक 55

आपतन्तं महानागमंशस्यासुरसत्तमः ।जघानैकेषुणा क्रुद्धस्ततः स विमुखोऽभवत्

āpatantaṃ mahānāgamaṃśasyāsurasattamaḥ | jaghānaikeṣuṇā kruddhastataḥ sa vimukho'bhavat

हिन्दी अर्थ

अपनी ओर आते हुए अंशके महान्‌ गजराजको असुर-शिरोमणि कुजम्भने कुपित होकर एक बाण मारा, जिससे वह युद्धसे विमुख हो गया

अध्याय 239

श्लोक 56

विगाह्यैवं गजानीकं कुजम्भो दानवोत्तमः ।विनिघ्नन्प्रवरान्सैन्यान्गदया बलिनां वरः

vigāhyaivaṃ gajānīkaṃ kujambho dānavottamaḥ | vinighnanpravarānsainyāngadayā balināṃ varaḥ

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार हाथियोंकी सेनामें प्रविष्ट होकर बलवानों में श्रेष्ठ दानवप्रवर कुजम्भ गदासे उस सेनाके बड़े-बड़े गजराजोंका वध करता हुआ वहाँ विचरने लगा

अध्याय 239

श्लोक 57

एकप्रहाराभिहतान् कुजम्भेन महागजान् ।अपश्यन्त सुराः सर्वे पर्वतानिव पातितान्

ekaprahārābhihatān kujambhena mahāgajān | apaśyanta surāḥ sarve parvatāniva pātitān

हिन्दी अर्थ

कुजम्भके एक ही प्रहारसे मारे गये महान्‌ गजराजोंको समस्त देवताओंने धराशायी हुए पर्वतोंके समान देखा

अध्याय 239

श्लोक 58

कुजम्भस्य च मार्गेषु विशीर्णास्ते महागजाः ।वज्राहता इवेन्द्रेण विशीर्णा इव पर्वताः

kujambhasya ca mārgeṣu viśīrṇāste mahāgajāḥ | vajrāhatā ivendreṇa viśīrṇā iva parvatāḥ

हिन्दी अर्थ

कुजम्भके मार्गॉपर छिन्न-भिन्न होकर पड़े हुए महान्‌ गज इन्द्रके वज़से आहत एवं चूर-चूर होकर ढहे हुए पर्वतोंके समान प्रतीत होते थे

अध्याय 239

श्लोक 59

अपश्यंस्त्रिदशाः सर्वे मूर्तिमन्तमिवान्तकम् ।गजास्तथा व्यदीर्यन्त सिंहस्येवेतरे मृगाः

apaśyaṃstridaśāḥ sarve mūrtimantamivāntakam | gajāstathā vyadīryanta siṃhasyevetare mṛgāḥ

हिन्दी अर्थ

समस्त देवता कुजम्भको मूर्तिमान्‌ कालके समान देखने लगे। जैसे सिंहके डरसे दूसरे वन्य पशु भाग जाते हैं, उसी प्रकार उसे देखकर हाथियोंकी सेनामें दरार पड़ जाती थी

अध्याय 239

श्लोक 60

स बभौ तां गदां बिभ्रत् प्रोक्षितां गजशोणितैः ।व्यादितास्योऽनदत्क्रुद्धो रौद्ररूपो भयानकः

sa babhau tāṃ gadāṃ bibhrat prokṣitāṃ gajaśoṇitaiḥ | vyāditāsyo'nadatkruddho raudrarūpo bhayānakaḥ

हिन्दी अर्थ

हाथियोंके खूनसे रँँगी हुई उस गदाको धारण किये रौद्रूपधारी भयानक दैत्य कुजम्भ कुपित हो मुँह बाकर जोर-जोरसे गर्जना कर रहा था

अध्याय 239

श्लोक 61

यथा हि भगवान्क्रुद्धः प्रजानां सङ्क्षये पुरा ।विक्रीडमानो गदया रणमध्ये महासुरः

yathā hi bhagavānkruddhaḥ prajānāṃ saṅkṣaye purā | vikrīḍamāno gadayā raṇamadhye mahāsuraḥ

हिन्दी अर्थ

जैसे पूर्वकालमें प्रजाओंके संहारके समय कुषपित हुए भगवान्‌ रुद्र क्रीडा करते हैं, उसी प्रकार उस रणभूमिमें महान्‌ असुर कुजम्भ गदासे खेल रहा था

अध्याय 239

श्लोक 62

गोपाल इव दण्डेन कालयन्स महागजान् ।क्रुद्धं कालमिवाकाले दण्डमुद्यम्य दानवम् ।अपश्यन्त सुराः सर्वे कुजम्भं भीमविक्रमम्

gopāla iva daṇḍena kālayansa mahāgajān | kruddhaṃ kālamivākāle daṇḍamudyamya dānavam | apaśyanta surāḥ sarve kujambhaṃ bhīmavikramam

हिन्दी अर्थ

जैसे ग्वाला डंडेसे गौओंको हाँकता है, उसी प्रकार वह गदासे बड़े-बड़े गजराजोंको खदेड़ रहा था। उस समय सब देवता भयंकर पराक्रमी दानव कुजम्भको असमयमें कुपित हो कालदण्ड उठाये हुए कालके समान देखते थे

अध्याय 239

श्लोक 63

हतारोहास्तु तत्रान्ये प्रभिन्ना वारणोत्तमाः ।ते हन्यमाना गदया बाणैश्च भृशविक्षताः

hatārohāstu tatrānye prabhinnā vāraṇottamāḥ | te hanyamānā gadayā bāṇaiśca bhṛśavikṣatāḥ

हिन्दी अर्थ

जिनके सवार मारे गये थे, वे दूसरे-दूसरे मदवर्षी गजराज उसकी गदासे आहत और बाणोंसे बहुत ही क्षत-विक्षत हो गये थे

अध्याय 239

श्लोक 64

असहन्तः कुजम्भस्य गदावेगं महाहवे ।स्वान्यनीकानि मृद्नन्तः प्राद्रवन्त महागजाः

asahantaḥ kujambhasya gadāvegaṃ mahāhave | svānyanīkāni mṛdnantaḥ prādravanta mahāgajāḥ

हिन्दी अर्थ

उस महासमरमें कुजम्भकी गदाके वेगको सहन न कर सकनेके कारण बड़े-बड़े गजराज अपनी ही सेनाओंको कुचलते हुए भागने लगे

अध्याय 239

श्लोक 65

महावात इवाभ्राणि विधमन् गदया गजान् ।अतिष्ठत्समरे दैत्यः कालः संवर्तको यथा

mahāvāta ivābhrāṇi vidhaman gadayā gajān | atiṣṭhatsamare daityaḥ kālaḥ saṃvartako yathā

हिन्दी अर्थ

जैसे आँधी बादलोंको छिन्न-भिन्न कर देती है, उसी प्रकार गदाके आघातसे गजराजोंको विदीर्ण करता हुआ वह दैत्य समराज्ञणमें संहारकारी कालके समान खड़ा था

स्रोत: local proofread transcription: Sanskrit shlokas of the Harivamsa (Harivamsha, Vishnu and Bhavishya parvas) from sanskritdocuments.org. One chapter per adhyaya; verse numbers as printed in the source (restarting in each adhyaya). Appendix sections are not included. · प्राप्त 19/10/2026

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शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

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पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

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शोध टिप्पणीResearch note

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Collated with BORI Critical Edition of Mahabharata Khilaparvan.