अध्याय 42
श्लोक 3.5.1
॥ अथ येऽस्योर्ध्वा रश्मयस्ता एवास्योर्ध्वा मधुनाड्यो गुह्या एवादेशा मधुकृतो ब्रह्मैव पुष्पं ता अमृता आपः
|| atha ye'syordhvā raśmayastā evāsyordhvā madhunāḍyo guhyā evādeśā madhukṛto brahmaiva puṣpaṃ tā amṛtā āpaḥ
हिन्दी अर्थ
वह यह मृजा तरहमने विराट भ्जापतिसे का आ, परनापतिन मनुसे कहा ओर मनुने प्रजावर्गके प्रति कहा । तथा अपने.ज्ये्ठ पत्र अरुणनन्दन उदालकको उसके पिताने ईस ्रहमविज्ञानका उपदेश दिया था तद्धतन्मधुक्ानं ब्रह्मा हिरण्य- , वह यह मधुशान रह्मा-दिरण्य- गर्भने विराट् प्रनापतिको घुनाय। था । गभो विराजे प्रजापतय उवाच। । उने भी इसे मनुको सुनाया ओर इद वाव तज्ज्येष्ठाय पुत्राय पिता ब्रह्म परब्र
English
The upward rays of the sun are the honey cells above. The secret doctrines are the bees, Brahman (the Om) is the flower, the water is the nectar.