Chandogya Upanishad
41
अध्याय 41 / 154

Adhyāya 41

प्रपाठक खण्ड 41

3 श्लोक

पूर्ण अध्याय पाठ3 श्लोक

अध्याय 41

श्लोक 3.4.1

॥ अथ येऽस्योदञ्चो रश्मयस्ता एवास्योदीच्यो मधुनाड्योऽथर्वाङ्गिरस एव मधुकृत इतिहासपुराणं पुष्पं ता अमृता आपः

|| atha ye'syodañco raśmayastā evāsyodīcyo madhunāḍyo'tharvāṅgirasa eva madhukṛta itihāsapurāṇaṃ puṣpaṃ tā amṛtā āpaḥ

हिन्दी अर्थ

अथ ततस्तस्मादनन्तरं प्रा- फिर उसके पर्चात्‌-प्राणियो- ण्यनुग्रहकालाद्ष्वः सन्नात्मन्यु- 9 हो देत्योट्रम्य यान््रतयुदेति तेषां अर्थात्‌ जिन प्राणि्योपर ८. प्यहोरात्राभ्यां परिवतमानः ब्रह्मलोकके विषयमे निद्रानका अनुमव देवास्तेनाह्सत्येन मा विराधिषि ब्रह्मणेति वहाँ निश्चय ही पेसा नहीं होता । वों सूयक न कमी अक्त होता है ओर न उद्य होता है । है देवगण इस स्के दवार मे

English

The northern rays of the sun are the honey-cells on the left. The (hymns of the) Atharvâṅgiras are the bees, the Itihâsa-purâna (the reading of the old stories) is the flower, the water is the nectar.

अध्याय 41

श्लोक 3.4.2

ते वा एतेऽथर्वाङ्गिरस एतदितिहासपूराणमभ्यतपँ स्तस्याभितप्तस्य यशस्तेज इन्द्रियां वीर्यमन्नाद्यँरसोऽजायत

te vā ete'tharvāṅgirasa etaditihāsapūrāṇamabhyatapam̐ stasyābhitaptasya yaśasteja indriyāṃ vīryamannādyam̐raso'jāyata

हिन्दी अर्थ

न वै तत्र यतोऽहं ब्रह्मलोका- उदयास्तमयवजितो ब्रह्मलोक प्रतिपेदे । है देवाः साक्षिणो उसने सत्य ही कहा है-- गह बात श्रुति बतल्मती है-- हेवास्मे भवति य एतामेवं ब्रह्मोपनिषद्‌" वेद्‌ जो इस पकार इस ब्रह्मोपनिषद्‌ ( वेदरहस्य ) छो जानता है उसके खयि न तो सुका उद्य होता है जर न॒ अस्त होता है । उसके स्थि सवेदा दिन ही रहता है

English

Those very hymns of the Atharvâṅgiras (as bees) brooded over the Itihâsa-purâna; and from it, thus brooded on, sprang as its (nectar) essence, fame, glory of countenance, vigour, strength, and health.

अध्याय 41

श्लोक 3.4.3

तद्व्यक्षरत्तदादित्यमभितोऽश्रयत्तद्वा एतद्यदेतदादित्यस्य परं कृष्णँरूपम्

tadvyakṣarattadādityamabhito'śrayattadvā etadyadetadādityasya paraṃ kṛṣṇam̐rūpam

हिन्दी अर्थ

न इ वा अस्मै यथोक्तब्रह्म- इसके अर्थात्‌ उपर्युक्त बरहवेत्ताके ल्यिन तो सूर्यं उदित होता है बस्कि इस ब्रहवेत्ताके ल्य सङ है, क्योंकि वह स्वयं प्रकाशस्वरूप होता है पेसा किसके स्थि होता मनुः परजाभ्यस्तद्धेतदुदाखकायारुणये ज्येष्ठाय पुत्राय

English

That flowed forth, and went towards the sun. And that forms what we call the extreme dark (parah krishnam) light of the sun.

स्रोत: https://sanskritdocuments.org/doc_upanishhat/chhandogya.itx · प्राप्त 3/6/2026

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शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।