Chandogya Upanishad
23
अध्याय 23 / 154

Adhyāya 23

प्रपाठक खण्ड 23

6 श्लोक

पूर्ण अध्याय पाठ6 श्लोक

अध्याय 23

श्लोक 2.10.1

॥ अथ खल्वात्मसंमितमतिमृत्यु सप्तविधँ सामोपासीत हिंकार इति त्र्यक्षरं प्रस्ताव इति त्र्यक्षरं तत्समम्

|| atha khalvātmasaṃmitamatimṛtyu saptavidham̐ sāmopāsīta hiṃkāra iti tryakṣaraṃ prastāva iti tryakṣaraṃ tatsamam

हिन्दी अर्थ

वह लो इस प्रकार गायत्रसं्ञक सामको प्राणो प्रतिष्ठित जानता है, प्राणवान्‌ होता है, पूरणं आयुका उपमोग करता है, परशस्त जीवनखाम करा हे, प्रना जर पञ्चओंद्ारा महान्‌ होता है तथा कीतिके द्वारा मी महान्‌ कलकरणो मवतीत्येतत्‌ । सर्व. उयोगुज्ज्वलं जीवति । महा- नभवति प्रजादिमिमंहां च कीर्त्या वह जो हस पकार इस गाः जानता है, प्राणवान्‌ होता है अविक इद्दियवान्‌ होता ह, ३

English

Next let a man meditate on the sevenfold Sâman which is uniform in itself and leads beyond death. The word hiṅkâra has three syllables, the word prastâva has three syllables: that is equal (sama).

अध्याय 23

श्लोक 2.10.2

आदिरिति द्व्यक्षरं प्रतिहार इति चतुरक्षरं तत इहैकं तत्समम्

ādiriti dvyakṣaraṃ pratihāra iti caturakṣaraṃ tata ihaikaṃ tatsamam

हिन्दी अर्थ

करता है यह हिंकार ह, घूम उत्पन्न -- यष पस्ताव है, परज्वसिति त प्रतिहार है तथा शान्त होने र्गता है अग्निका अभिमन्थन करता है- यह सर्वप्रथम होनेके कारण हिकार है । अग्निस्ते नो धुं उखन्न भवति सवमायुरेति ज्योग्जीवति महान्ध्रजया पशुभिभवति महान्कीत्या न प्रत्यङ्डन्निमाचामेन्न निष्ठीवेत्तदू्रतम्‌।२। वह, जो पुरष इस प्रकारं इस॒रथन्तरसामको अग्निमे अनुप्यूत

English

The word âdi (first, Om) has two syllables, the word pratihâra has four syllables. Taking one syllable from that over, that is equal (sama).

अध्याय 23

श्लोक 2.10.3

उद्गीथ इति त्र्यक्षरमुपद्रव इति चतुरक्षरं त्रिभिस्त्रिभिः समं भवत्यक्षरमतिशिष्यते त्र्यक्षरं तत्समम्

udgītha iti tryakṣaramupadrava iti caturakṣaraṃ tribhistribhiḥ samaṃ bhavatyakṣaramatiśiṣyate tryakṣaraṃ tatsamam

हिन्दी अर्थ

. वयः इत्यादि मन्त्रका - अर्थ पूर्वत्‌ समञ्चना चाहिये । ब्र्षर्चसी -सदाचार ओर स्वाध्यायके उपमन्त्रयते स हिकारो ज्ञपयते स स्तावः शिया सह शेतेस उद्वोथःपति चरी सह शेते स प्रतिहारःकाटं गच्छति पर्ष. जो संकेत करता है, वह्‌ हिकार है; जो तोष देता (भष उपमन्त्रयते संकेतं करोति प्रा निमित्से पराप्त हुभा तेज नक्ष "वह प्रस्ताव है; खीके साथ नोषो

English

The word udgîtha has three syllables, the word upadrava has four syllables. With three and three syllables it should be equal. One syllable being left over, it becomes trisyllabic. Hence it is equal.

अध्याय 23

श्लोक 2.10.4

निधनमिति त्र्यक्षरं तत्सममेव भवति तानि ह वा एतानि द्वाविँशतिरक्षराणि

nidhanamiti tryakṣaraṃ tatsamameva bhavati tāni ha vā etāni dvāvim̐śatirakṣarāṇi

हिन्दी अर्थ

वति महान्प्रजया पशुभिभवति महान्कीर्त्या न काचन जो पुरुष इस प्रकार इस वामदेव्य सामको मिथुन ओतप्रोत जानता है, वह मिथुनवान्‌ ( दाम्प्य-घुखते सम्पन्न ) होता है, प्रत्येक मेधुनते संतानो जन्म देता है 1 सारी आयुका उपभोग करता है, उज्वल जीवन भवत्यविधुरोमवतीत्यथेः ् कभी विधुर ( पलीके संयोग-सुखसे बश्चित) नहीं होता है । मिथुत-मिथुन- न्मिथुनात्मजायत इत्यमोषरेतस्त्व से संतानको जन्म देता है, इक्त कथनके

English

The word nidhana has three syllables, therefore it is equal. These make twenty-two syllables.

अध्याय 23

श्लोक 2.10.5

एकविँशत्यादित्यमाप्नोत्येकविँशो वा इतोऽसावादित्यो द्वाविँशेन परमादित्याज्जयति तन्नाकं तद्विशोकम्

ekavim̐śatyādityamāpnotyekavim̐śo vā ito'sāvādityo dvāvim̐śena paramādityājjayati tannākaṃ tadviśokam

हिन्दी अर्थ

तिर बहत्सामकी उपाच्ना उयन्हकार उदितः प्रस्तावो मध्यन्दिन उद्गीथोऽ उदित होता हुआ सूरं हिकार है, उदित इआ प्रस्ताव हे, मध्याहकालिकि सूय उद्गीथ है, मध्याहोत्तरकालिक प्रतिहार ह ओर नो अस्तमित होने- बारा सूयं हे, वह निषन है । यहं बृहरसाम सुमे स्थित है उयन्सविता स हिंकारः उदित होता हआ जो सूयं हं वह प्राथम्यादशनस्य । उदितः । ० क्योंकि उसा दरशन सव- भस्तापरस्तवनहेतुत्वाद्कर्मणा- से पहले होता ह । उदित हुमा सूय

English

With twenty-one syllables a man reaches the sun (and death), for the sun is the twenty-first from here; with the twenty-second he conquers what is beyond the sun: that is blessedness, that is freedom from grief

अध्याय 23

श्लोक 2.10.6

आप्नोती हादित्यस्य जयं परो हास्यादित्यजयाज्जयो भवति य एतदेवं विद्वानात्मसंमितमतिमृत्यु सप्तविधँ सामोपास्ते सामोपास्ते

āpnotī hādityasya jayaṃ paro hāsyādityajayājjayo bhavati ya etadevaṃ vidvānātmasaṃmitamatimṛtyu saptavidham̐ sāmopāste sāmopāste

हिन्दी अर्थ

भवति सर्वमायुरेति ज्योग्जीवति महान्प्रजया पशुभि- वति महान्कीर्त्या तपन्तं न निन्देत्तद्नतम्‌ वह्‌ पुरुष, जो इस प्रकार इस बहतसामको सूर्यम स्थित जानता ह, तेजस्वी ओर अन्नका भोग करनेवाला होता है । वह पूण युको भ्रा होता है, उज्ज्वल जीवन व्यतीत करता है, प्रना ओर पञ्युभकि स य इत्यादि पूवेवत्‌। तपन्त , (स॒ यः? इत्यादि श्रुतिका अथं पूर्ववत्‌ है । तपते हुए सुक निन्दा न करे--यद इहत्सामो-

English

He obtains here the victory over the sun (death), and there is a higher victory than the victory over the sun for him, who knowing this meditates on the sevenfold Sâman as uniform in itself, which leads beyond death, yea, which leads beyond death.

स्रोत: https://sanskritdocuments.org/doc_upanishhat/chhandogya.itx · प्राप्त 3/6/2026

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शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।