Chandogya Upanishad
22
अध्याय 22 / 154

Adhyāya 22

प्रपाठक खण्ड 22

8 श्लोक

पूर्ण अध्याय पाठ8 श्लोक

अध्याय 22

श्लोक 2.9.1

॥ अथ खल्वमुमादित्यँसप्तविधँ सामोपासीत सर्वदा समस्तेन साम मां प्रति मां प्रतीति सर्वेण समस्तेन साम

|| atha khalvamumādityam̐saptavidham̐ sāmopāsīta sarvadā samastena sāma māṃ prati māṃ pratīti sarveṇa samastena sāma

हिन्दी अर्थ

तथा आदि्यका जो रूप मध्याहके पश्चात्‌ ओौर॒ अपराहके पूवं होता है बह प्रतिहार है । उसके उस्र खूपके धनुगामी गभ॑ है । इसीपे चे प्रतिहृत ८ ऊपरकी ओर जाङ्ृष्ट ) किये जनेषर नीचे नही गिरते, अथ यदृष्वं मच्यन्दिनात्राग- तथा जादित्यका जो रूप मध्याह- पराह्ायद्रूपं सवितुः स प्रति- के पृशवात्‌ भौर अपराडसे पूरव हारस्तदस्य गमां अन्वायत्ताः । होता है बह प्रतिहार है । उसके त्था आदियका जो रूप अपराहके पवात्‌ ओर सूरयसतते पूवं होता वह उपद्रव है । उसके उख रूपके अनुगामी वन्य पञ्च है । इसीसे वे पुरूषको देखकर भयवरा अरण्य अथवा गुहाम भाग जाते है,

English

Let a man meditate on the sevenfold Sâman as the sun. The sun is Sâman, because he is always the same (sama); he is Sâman because he is the same, everybody thinking he looks towards me, he looks towards me .

अध्याय 22

श्लोक 2.9.2

तस्मिन्निमानि सर्वाणि भूतान्यन्वायत्तानीति विद्यात्तस्य यत्पुरोदयात्स हिंकारस्तदस्य पशवोऽन्वायत्तास्तस्मात्ते हिं कुर्वन्ति हिंकारभाजिनो ह्येतस्य साम्नः

tasminnimāni sarvāṇi bhūtānyanvāyattānīti vidyāttasya yatpurodayātsa hiṃkārastadasya paśavo'nvāyattāstasmātte hiṃ kurvanti hiṃkārabhājino hyetasya sāmnaḥ

हिन्दी अर्थ

, राहके पश्चात्‌ सूर्यस्तके पूरं प होता है वह उपद्रव है । उसके पशचवोऽन्वायत्ताः । तस्मात्ते । उद रूपके अनुगामी वन्य पद है । तथा आदियक्य जो रूप घुर्यस्तसे पूं होता है वह निधन है। उसके उस खूपके अनुगत पितरृगण है; इसीसे भाद्धकामे उन्दं पिदृ-पितामह आदिरूपते दभेपर स्थापित करते है, क्योंकि वे पितृ- अथ यत्परथमास्तमितेऽदशनं तथा सूर्यस्तसे पूर्वं रथात्‌ स

English

Let him know that all beings are dependent on him (the sun). What he is before his rising, that is the hiṅkâra. On it animals are dependent. Therefore animals say hiṅ (before sunrise), for they share the hiṅkâra of that Sâman (the sun).

अध्याय 22

श्लोक 2.9.3

अथ यत्प्रथमोदिते स प्रस्तावस्तदस्य मनुष्या अन्वायत्तास्तस्मात्ते प्रस्तुतिकामाः प्रशँसाकामाः प्रस्तावभाजिनो ह्येतस्य साम्नः

atha yatprathamodite sa prastāvastadasya manuṣyā anvāyattāstasmātte prastutikāmāḥ praśam̐sākāmāḥ prastāvabhājino hyetasya sāmnaḥ

हिन्दी अर्थ

जव अदृश्य होना चाहता है उस सम उसका जो रूप है वह निषन है। उसके उस रूपके अनुगत पितृगण है मृत्युस अतीत सप्तविध सामकी उपासना शृत्युरादित्यः अद्ोरात्रादि- दिवस जौर रात्रि आदि श्रार्के द्वारा जगत्का प्रमापयिता अब यह बकाया जाता है फि समान भक्षरोवाले मृत्युसे अतीत सक्तविध ॒घामकी उपासना करे । “हिंकारः यह तीन अक्षरगल है तथा भ्रस्तावः यह भौ तीन अक्ष्रोवाख है, अतः उसके

English

What he is when first risen, that is the prastâva. On it men are dependent. Therefore men love praise (prastuti) and celebrity, for they share the prastâva of that Sâman.

अध्याय 22

श्लोक 2.9.4

अथ यत्संगववेलायाँ स आदिस्तदस्य वयाँस्यन्वायत्तानि तस्मात्तान्यन्तरिक्षेऽनारम्बणान्यादायात्मानं परिपतन्त्यादिभाजीनि ह्येतस्य साम्नः

atha yatsaṃgavavelāyām̐ sa ādistadasya vayām̐syanvāyattāni tasmāttānyantarikṣe'nārambaṇānyādāyātmānaṃ paripatantyādibhājīni hyetasya sāmnaḥ

हिन्दी अर्थ

8 , के विषयभूत सामकी उपासनके ८ सामावयवो ) की तुल्यताद्रारा परिमिति अथवा परमात्मखदशताके "जादि यह दो अक््रोवाख नाम है ओर श्रतिहार' यह चार अ्षरौवास नाम ह । इसमेखे एक अक्षर निकालकर आदिम मिखनेसे व आदिरिति द्रथक्षरं सप्तविध- आदि' यह दो अक्षरोवाला्‌ हे। र लाः स तः सात प्रकारके सामक संख्याको पूणं २ ६ र कृरनेमे ओङ्कार “भाद्रि' इस नामसे

English

What he is at the time of the saṅgava , that is the âdi, the first, the Om. On it birds are dependent. Therefore birds fly about in the sky without support, holding themselves, for they share the âdi (the Om) of that Sâman.

अध्याय 22

श्लोक 2.9.5

अथ यत्सम्प्रतिमध्यंदिने स उद्गीथस्तदस्य देवा अन्वायत्तास्तस्मात्ते सत्तमाः प्राजापत्यानामुद्गीथभाजिनो ह्येतस्य साम्नः

atha yatsampratimadhyaṃdine sa udgīthastadasya devā anvāyattāstasmātte sattamāḥ prājāpatyānāmudgīthabhājino hyetasya sāmnaḥ

हिन्दी अर्थ

“उदृगीय' यह तीन अक्षरो करा ओर “उपद्रव' यह्‌ चार जकषरो ङा नाम हे । ये दोनो वीन-तीन जक्षरोमे तो समान है; किंतु एक अक्षर बच रता है । अतः अक्षर होनेके कारण तीन अक्षरोवाख होनेसे तो उद्रीथ इति अ्यक्षरगुपद्रब “उद्गीथ यह नाम तीन अकषर. (५ वाला है भौर उपद्रवः यह चार भवत्यक्षरमतिशिष्यतेऽतिरिच्यते समान है, रतु एक अक्षर व्च निधन' यह नाम तीन अक्षरोका है, अतः यह उनके समान ही है । वे दी ये वादस जक्ष टै

English

What he is just at noon, that is the udgîtha. On it the Devas are dependent (because they are brilliant). Therefore they are the best of all the descendants of Pragâpati, for they share the udgîtha of that Sâman.

अध्याय 22

श्लोक 2.9.6

अथ यदूर्ध्वं मध्यंदिनात्प्रागपराह्णात्स प्रतिहारस्तदस्य गर्भा अन्वायत्तास्तस्मात्ते प्रतिहृतानावपद्यन्ते प्रतिहारभाजिनो ह्येतस्य साम्नः

atha yadūrdhvaṃ madhyaṃdinātprāgaparāhṇātsa pratihārastadasya garbhā anvāyattāstasmātte pratihṛtānāvapadyante pratihārabhājino hyetasya sāmnaḥ

हिन्दी अर्थ

ए्नचनामत ज्यक्षर॑तत्सम- 'निषन' यह तीन अक्रोवाग भेव भवति । एवं ज्यक्षरसमतया नाम दे, अतः यह उनके समान ही. है। इस प्रकारा तीन अक्षरि इक्कीस अक्षरोदारा साधक आदिव्यलोक परापत करता हे, क्योंकि इस लोकसे वह आदित्य निश्चय दी इक्कीस है । वाईस अकषद्ररा वह आदि्यसे परे उस दुःखदीन एवं शो वहाँ वह इक्छीस अक्षर-संख्याके द्वारा तो आदित्यरोकषूप मृल्युको प्राप्त करता है, क्योंकि इस रोककी अपेक्षा

English

What he is after midday and before afternoon, that is the pratihâra. On it all germs are dependent. Therefore these, having been conceived (pratihrita), do not fall, for they share the pratihâra of that Sâman.

अध्याय 22

श्लोक 2.9.7

अथ यदूर्ध्वमपराह्णात्प्रागस्तमयात्स उपद्रवस्तदस्यारण्या अन्वायत्तास्तस्मात्ते पुरुषं दृष्ट्वा कक्षँश्वभ्रमित्युपद्रवन्त्युपद्रवभाजिनो ह्येतस्य साम्नः

atha yadūrdhvamaparāhṇātprāgastamayātsa upadravastadasyāraṇyā anvāyattāstasmātte puruṣaṃ dṛṣṭvā kakṣam̐śvabhramityupadravantyupadravabhājino hyetasya sāmnaḥ

हिन्दी अर्थ

वह्‌ पष आादियलोककी जय प्राप्त करता ह तथा उते आदिर विजयसे भी उक्ृष्ट जय प्राप्त होती ह जो ईस उपासनाफो इस पर्न नाननेबाल होकर आत्मसम्मित ओर मृतयुसे अतीत सप्तविष सामी एकरविंशतिसंख्ययादित्यस्य , हवकोसवी भक्षः संसा द्र जयमामोति । परो हास्यैषंबिद आदिष्यरोककी जय परा का है आदित्यजयान अतः तातपयं यह है फि इस प्रभा सतविधस्य च साम्न उपासनञरु- एवं सविध सामकी उपासनाक 1 मग्रहणपूरवकं विशिष्टफलानि आदि नाम लेकर विचष्ट फर्वती अन्य सामोपसनाओंका उल्लेख किया

English

What he is after the afternoon and before sunset, that is the upadrava. On it the animals of the forest are dependent. Therefore, when they see a man, they run (upadravanti) to the forest as a safe hiding-place, for they share the upadrava of that Sâman.

अध्याय 22

श्लोक 2.9.8

अथ यत्प्रथमास्तमिते तन्निधनं तदस्य पितरोऽन्वायत्तास्तस्मात्तान्निदधति निधनभाजिनो ह्येतस्य साम्न एवं खल्वमुमादित्यँ सप्तविधँ सामोपास्ते

atha yatprathamāstamite tannidhanaṃ tadasya pitaro'nvāyattāstasmāttānnidadhati nidhanabhājino hyetasya sāmna evaṃ khalvamumādityam̐ saptavidham̐ sāmopāste

हिन्दी अर्थ

मन हिंकार है, वाक्‌ प्रस्ताव है, चक्षु उदुगीथ हे, श्रोत्र भतिहार है ओर प्राण निषन है । यह गायत्रसं्ञक साम प्राणोमे प्रतिष्ठित है मनो दहिकारो मनसः सव॑- समपू्णं इन्द्ियदृपियम मनकी करणट्त्तीनां प्राथम्यात्‌ । भरयमता होनेके कारण मन हकार = , = श , है, उक्ष होनेके कारण चक्षु उद्गीथ सर्वमायुरेति ज्योग्जीवति महान्प्रजया पशुभिर्भवति महान्कीर्त्या महामनाः स्यात्तद्‌नतम्‌

English

What he is when he first sets, that is the nidhana. On it the fathers are dependent. Therefore they put them down (nidadhati), for they share the nidhana of that Sâman. Thus a man meditates on the sevenfold Sâman as the sun.

स्रोत: https://sanskritdocuments.org/doc_upanishhat/chhandogya.itx · प्राप्त 3/6/2026

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शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।