Chandogya Upanishad
122
अध्याय 122 / 154

Adhyāya 122

प्रपाठक खण्ड 122

2 श्लोक

पूर्ण अध्याय पाठ2 श्लोक

अध्याय 122

श्लोक 7.9.1

॥ अन्नं वाव बलाद्भूयस्तस्माद्यद्यपि दश रात्रीर्नाश्नीयाद्यद्यु ह जीवेदथवाद्रष्टाश्रोतामन्ताबोद्धाकर्ताविज्ञाता भवत्यथान्नस्यायै द्रष्टा भवति श्रोता भवति मन्ता भवति बोद्धा भवति कर्ता भवति विज्ञाता भवत्यन्नमुपास्स्वेति

|| annaṃ vāva balādbhūyastasmādyadyapi daśa rātrīrnāśnīyādyadyu ha jīvedathavādraṣṭāśrotāmantāboddhākartāvijñātā bhavatyathānnasyāyai draṣṭā bhavati śrotā bhavati mantā bhavati boddhā bhavati kartā bhavati vijñātā bhavatyannamupāssveti

हिन्दी अर्थ

स्मरणसे आश्चाकी महता कर्माणि रुते पुत्राश्च पडुडश्चेच्छत इमं इ आशा ही स्मरणकौ शपेक्षा उक्छृष्ट है । धाशासे दीप्त इभा ए ही मर्न््रोका पाठ करता है, कमं करता है, पुत्र लोर पुर्भोकी इच्छ करता है तथा इस रोक घोर परलोककी कामना करता है । तुम भशर आजप्राप्तवस्त्वाकाङ्क्षा, आशा द्णा काम इति यामाहुः पयायः; कथम्‌ ? आच्या हन्तःकरण-

English

'Food (anna) is better than power. Therefore if a man abstain from food for ten days, though he live, he would be unable to see, hear, perceive, think, act, and understand. But when he obtains food, he is able to see, hear, perceive, think, act, and understand. Meditate on food.

अध्याय 122

श्लोक 7.9.2

स योऽन्नं ब्रह्मेत्युपास्तेऽन्नवतो वै स लोकान्पानवतोऽभिसिध्यति यावदन्नस्य गतं तत्रास्य यथाकामचारो भवति योऽन्नं ब्रह्मेत्युपास्तेऽस्ति भगवोऽन्नाद्भूय इत्यन्नाद्वाव भूयोऽस्तीति तन्मे भगवान्ब्रवीत्विति

sa yo'nnaṃ brahmetyupāste'nnavato vai sa lokānpānavato'bhisidhyati yāvadannasya gataṃ tatrāsya yathākāmacāro bhavati yo'nnaṃ brahmetyupāste'sti bhagavo'nnādbhūya ityannādvāva bhūyo'stīti tanme bhagavānbravītviti

हिन्दी अर्थ

जध्ययन करता है तथा उनका अध्ययन कर ओर ब्राक्षणोके मुखसे उनका अथं एवं विधि श्रवण कर स य आशां ब्रह्मदयुपास्त आशयास्य सवे कामाः तत्रास्य यथाकामचारो भवति य॒ आशां बह्मत्यु-

English

'He who meditates on food as Brahman, obtains the worlds rich in food and drink; he is, as it were, lord and master as far as food reaches--he who meditates on food as Brahman.' 'Sir, is there something better than food 'Yes, there is something better than food.' 'Sir, tell it me.' Next: VII, 10 Sacred Texts | Hinduism

स्रोत: https://sanskritdocuments.org/doc_upanishhat/chhandogya.itx · प्राप्त 3/6/2026

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शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।