Atharva Veda
10
अध्याय 10 / 20

Kanda 10

काण्ड 10

350 श्लोकभाग 6/7 · श्लोक 8.1–8.44

पूर्ण अध्याय पाठ44 श्लोक

अध्याय 10

श्लोक 8.1

ज्येष्ठब्रह्मवर्णनम्।१-४४ कुत्सः।आत्मा।त्रिष्टुप्, १ उपरिष्टाद्विराड्बृहती, २ बृहतीगर्भानुष्टुप्, ५ भुरिगनुष्टुप्, ६, १४, १९-२१, २३, २५, २९, ३१-३४, ३७-३८, ४१, ४३ अनुष्टुप्, ७ पराबृहती, १० अनुष्टुब्गर्भा, ११ जगती, १२ पुरोबृहती त्रिष्टुब्गर्भाऽऽर्षी पङ्क्तिः, १५, २७ भुरिग्बृहती, २२ पुर उष्णिक्, २६ द्व्युष्णिग्गर्भानुष्टुप्, ३० भुरिक्, ३९ बृहतीगर्भा, ४२ विराड् गायत्री।यो भू॒तं च॒ भव्यं॑ च॒ सर्वं॒ यश्चा॑धि॒तिष्ठ॑ति ।स्व॑१र्यस्य॑ च॒ केव॑लं॒ तस्मै॑ ज्ये॒ष्ठाय॒ ब्रह्म॑णे॒ नमः॑

jyeṣṭhabrahmavarṇanam| 1-44 kutsaḥ| ātmā| triṣṭup, 1 upariṣṭādvirāḍbṛhatī, 2 bṛhatīgarbhānuṣṭup, 5 bhuriganuṣṭup, 6, 14, 19-21, 23, 25, 29, 31-34, 37-38, 41, 43 anuṣṭup, 7 parābṛhatī, 10 anuṣṭubgarbhā, 11 jagatī, 12 purobṛhatī triṣṭubgarbhā''rṣī paṅktiḥ, 15, 27 bhurigbṛhatī, 22 pura uṣṇik, 26 dvyuṣṇiggarbhānuṣṭup, 30 bhurik, 39 bṛhatīgarbhā, 42 virāḍ gāyatrī| yo bhūtaṃ ca bhavyaṃ ca sarvaṃ yaścādhitiṣṭhati | sva1ryasya ca kevalaṃ tasmai jyeṣṭhāya brahmaṇe namaḥ

हिन्दी अर्थ

दोनो “स्वारौ, हैप रमेदवेरीय नियम् रा. स्वेममेव सुरण करती रहूती ˆ , (न विजानामि) जै यथा्थंूप भँ नहीं जानता कि (यतरा) उन दोनो मसे ही, इस संसार पट को निगल. जाता है । (पुमान्) परमेश्वर-पुदष ने ही नाचैती हुई कहा है । ऋगवेद १४।७२।६ में जगत् के सर्जन में दिव्य-रावि्तियों के नाचने का वर्णेन हुमा है ।यथा--. -- ९ , : ; . थव् देवा यतयो यथा भुवनान्यपिन्वत ॥ :

English

To whom the Deities with hands, with feet, and voice, and ear, and eye. Present unmeasured tribute in the measured hall of sacrifice? Darkness is chased away from him: he is exempt from all dist- ress.

अध्याय 10

श्लोक 8.2

स्क॒म्भेने॒मे विष्ट॑भिते॒ द्यौश्च॒ भूमि॑श्च तिष्ठतः ।स्क॒म्भ इ॒दं सर्व॑मात्म॒न्वद् यत् प्रा॒णन्नि॑मि॒षच्च॒ यत्

skambheneme viṣṭabhite dyauśca bhūmiśca tiṣṭhataḥ | skambha idaṃ sarvamātmanvad yat prāṇannimiṣacca yat

हिन्दी अर्थ

मः ५४ हो पकपाव् रथात् › भर केष हो शनिाद्” , तो परस्र विरोष कां° १०। सुऽ. । भथरवेवेद-माष्य . २४३ : (या) जो (पुरस्तात्) सामने (गुलयत) शुती हृ है (या च) भौर बो / (पदचात्) पीछे की भ्रोर (ग्रा) .जो (विदवतः) विव. म (युज्यते) अती (त्वा). तु (पृच्कामि) म-पुता हूं कि (सा) वह (ऋचाम्) वेदवाणियो मँ परतिपादित्र (कतमा) कौन सी है १.५. ,

English

Though manifest, it lies concealed in the vast place they call the old: Therein is firmly stationed all the moving, breathing universe.

अध्याय 10

श्लोक 8.3

ति॒स्रो ह॑ प्र॒जा अ॑त्या॒यमा॑य॒न् न्य॑१न्या अ॒र्कम॒भितो॑ऽविशन्त ।बृ॒हन् ह॑ तस्थौ॒ रज॑सो वि॒मानो॒ हरि॑तो॒ हरि॑णी॒रा वि॑वेश

tisro ha prajā atyāyamāyan nya1nyā arkamabhito'viśanta | bṛhan ha tasthau rajaso vimāno harito hariṇīrā viveśa

हिन्दी अर्थ

यो देवभुत्तरा्न्तसुपासाति सनेतिन॑भ ।२ रं का (श्र॑दत्) भक्षण.करे, पान कर । - - प्राकृतिक रन्न का बहुभक्षण उपासन भे उपकारी “लघुत्व” (वेता ० उप, कृते है (उत) तथाः (भ्रद्य) वतमान कालं. मँ वरह . (पूनणवेः) पुनः-पुन नया भी. (स्यात्) होता रहता है । जसे कि ( भ्रहोरात्रे) दिन शरीर रात भिन्न (ख्पयोः) कूपो मेँ या एकमदूसंरे के रूप मे :(परजंयेति ). पुनःपुनः प्रकट

English

Those who in recent times, midmost, or ancient, on all sides. greet the sage who knows the Veda, One and all, verily discuss Āditya, the second Agni, and the threefold Hansa.

अध्याय 10

श्लोक 8.4

द्वाद॑श प्र॒धय॑श्च॒क्रमेकं॒ त्रीणि॒ नभ्या॑नि॒ क उ॒ तच्चि॑केत ।तत्राह॑ता॒स्त्रीणि॑ श॒तानि॑ श॒ङ्कवः॑ ष॒ष्टिश्च॒ खीला॒ अवि॑चाचला॒ ये

dvādaśa pradhayaścakramekaṃ trīṇi nabhyāni ka u tacciketa | tatrāhatāstrīṇi śatāni śaṅkavaḥ ṣaṣṭiśca khīlā avicācalā ye

हिन्दी अर्थ

जलो क नेता वे देव (कतमे) कौन से १ हैष + 1 मुखं वाला शेर तथा पञ्नि व्यक्तीकरणं (भ्वादिः) । अथवा "क देवो दारा दिशां का ज्ञान होता है 1 जहा से सूर्योदय होता ह चह न्= है,जहां वह भस्त होता-है वह प्र्चिम दिशा है। जिधर षिः ५ उत्तर दिया है, उसके सामने की "५ दक्षिण.दिशाहै। इ री ०५७२५ वायु.तथा सूर --ये.तीन .देव ब्ञिय-भाहुतिय । को फलदायी ४५५ को णुदध करते, रोगरनगश करते, वरषा करते, तथा स्वास्थ्य प्रदान करते भानो ये ३ देव यज्ञियाहृति्यौ को भ्रतिमान प्रदान करते 1.1 १, श्नापः का भथं “यक्त” भी होताः हं 1 यथा (अथवृं° म इजा सया (भवर १०२ , ११।२।१ १) 3 भ्रतः ९५०८ भंयववेदभाष्य की५.१०१ सृण

English

As sole God dwelling in the mind, first born, he still is in the womb. Forth from the full he lifts the full, the full he sprinkles with the full.

अध्याय 10

श्लोक 8.5

इ॒दं स॑वित॒र्वि जा॑नीहि॒ षड् य॒मा एक॑ एक॒जः ।तस्मि॑न् हापि॒त्वमि॑छन्ते॒ य ए॑षा॒मेक॑ एक॒जः

idaṃ savitarvi jānīhi ṣaḍ yamā eka ekajaḥ | tasmin hāpitvamichante ya eṣāmeka ekajaḥ

हिन्दी अर्थ

त्मा वाला, जीवात्मा का सखा परमेरवर । ¦ भंथववंवेद-भष्यि का०.१०। सुऽ ठ अकामो धीरो शतः स्वयम रसेन त्तो नं कत॑श्चनोनः । . जरारहित, (युवानम्) सदा युवाः (तम एव) उस परभेदवर को ही म रहता है, काय को धारण नहीं करता) परभेरेवरज्ञं व्यक्तिं मृत्यु से . भयभीत नहीं होता, क्योक्रिःशरीर त्यागः के पचत् उसने परमेदवर के -भनन्द्रसःका पान करना है 4 । ।

English

Who gave command unto the wind that blowet! Who ranged the five united heavenly regions?

अध्याय 10

श्लोक 8.6

आ॒विः सन्निहि॑तं॒ गुहा॒ जर॒न्नाम॑ म॒हत् प॒दम्।तत्रे॒दं सर्व॒मार्पि॑त॒मेज॑त् प्रा॒णत् प्रति॑ष्ठितम्

āviḥ sannihitaṃ guhā jarannāma mahat padam| tatredaṃ sarvamārpitamejat prāṇat pratiṣṭhitam

हिन्दी अर्थ

के यज्ञिय भ्रङ्खो का वणेन (२,३) । (४)- शतौदना. माता के “शमितारः तथा पक्तार (५) सब लोकलोकान्तरों-में जाने की क्षमता, (६, १०). । प्रदान करने वाली पारमेश्वरी मातां लोक, अन्तरिक्ष, तथा भूमि के. देवों को क्षीर, सपिः, मधु प्रदान करती है (१२) ) । (८) पारमेश्वरी; माता . का, पक्षिरूप् मे, उपासक को हृदयःचक्र से. मानो उड़ा कर, सर्हल्ार चक्र.मे पहुचाना (२५) । ॥

English

Who were the Gods who cared not for oblations! Which of them brought the sacrificial waters? 165

अध्याय 10

श्लोक 8.7

एक॑चक्रं वर्तत॒ एक॑नेमि स॒हस्रा॑क्षरं॒ प्र पु॒रो नि प॒श्चा ।अ॒र्धेन॒ विश्वं॒ भुव॑नं ज॒जान॒ यद॑स्या॒र्धं क्व॑१तद् ब॑भूव

ekacakraṃ vartata ekanemi sahasrākṣaraṃ pra puro ni paścā | ardhena viśvaṃ bhuvanaṃ jajāna yadasyārdhaṃ kva1tad babhūva

हिन्दी अर्थ

त्रदान तथा भार्लीवाद की प्रार्थना । (२६, २७) । . . (भधायताम् ) पापकम चाहने वालों के ( ५ न मुखानि) मुखो को (श्रपि „ विचारो, कमो का हनन करने वाली है पारमेदवरी मातः! तु हो, तथा ( यजमानस्य) यजमान के लिये (गातुः) मार्गेख्पहो 1 सम्पण करता है, उसेतु हि पारमेश्वरी मातः ! मागं प्रदं करती है । उन पर प्रतिबन्ध लगा देना ताकि वे प्रापो का प्रचार न कर सकं । सपत्नेषु = पापकम, शतु हैँ । इन परतुहे मातः वज्र प्रहार कर

English

One God inhabiteth the earth we live on; another hath encom- passed air’s mid-region. One, the Supporter, takes the heaven and bears it: some keep- ing watch guard all the quarters

अध्याय 10

श्लोक 8.8

प॒ञ्च॒वा॒ही व॑ह॒त्यग्र॑मेषां॒ प्रष्ट॑यो यु॒क्ता अ॑नु॒संव॑हन्ति ।अया॑तमस्य ददृ॒शे न या॒तं परं॒ नेदी॒योऽव॑रं॒ दवी॑यः

pañcavāhī vahatyagrameṣāṃ praṣṭayo yuktā anusaṃvahanti | ayātamasya dadṛśe na yātaṃ paraṃ nedīyo'varaṃ davīyaḥ

हिन्दी अर्थ

शतौदना है पारभेद्वरी माता । वह सैकड़ों प्रकार के श्रोदन भोज्य रूप पाप विचारों तथा पापको का हनन करती है । “व्यन्सपले” (भ्रष्टा ; १. सायणावायं के ब्दो ; ४. खायणानायं के बमो क्त का माश मिमिमोग । यमा का० १०। सू०९ भरथरवेवेद-माष्य ३६५ है । इस प्रकार सुक्व ९ मे पारमेश्वरी माता का वणन शतौदना गौ के

English

safely. The man who knows the drawn-out string on which these crea- tures all are strung, The man who knows the thread’s thread, he may know the mighty Brāhmana.

अध्याय 10

श्लोक 8.9

ति॒र्यग्बि॑लश्चम॒स ऊ॒र्ध्वबु॑ध्न॒स्तस्मि॒न् यशो॒ निहि॑तं वि॒श्वरू॑पम्।तदा॑सत॒ ऋष॑यः स॒प्त सा॒कं ये अ॒स्य गो॒पा म॑ह॒तो ब॑भू॒वुः

tiryagbilaścamasa ūrdhvabudhnastasmin yaśo nihitaṃ viśvarūpam| tadāsata ṛṣayaḥ sapta sākaṃ ye asya gopā mahato babhūvuḥ

हिन्दी अर्थ

गौ मी सैकड़ों प्रकार के भोदन भादि भोज्य पदार्थं देती है । यथा-- विशेषण है । कयो “्रथो" द्वारा इस का वर्णेन पृथक् रूपं भरा . है । वेदिषटे च भवतु बिलोमानि यानि ते । हे पारमेदवरी मातः ! (वेदिः) यज्ञ की वेदि (ते) तेरा (चमं) चमड़ मेदवरी-माता का स्तवन होता है । इसलिये वेदि, बहिः रशना भौर प्रावा किमा जाताहै, भौर रस्सी द्वारागौ को बान्धा जाताहै। यज्ञँ सोम प्रोषधि को पीसने के लिये सिल-बट्टे की श्रावदय॑कता होती है । पीसने में बटटे को शिला पर भ्रागे-पीछे किया जाता है भौर इस रगड़ में भावाज होती है, मानो बट्टा स्तुति करता हु्रा नाचता है । रदना--?0118प6

English

I know the drawn-out string, the thread whereon these creatures all are strung. I know the thread’s thread also, thus I know the mighty Brah- ma na.

अध्याय 10

श्लोक 8.10

या पु॒रस्ता॑द् यु॒ज्यते॒ या च॑ प॒श्चाद् या वि॒श्वतो॑ यु॒ज्यते॒ या च॑ स॒र्वतः॑ ।यया॑ य॒ज्ञः प्राङ् ता॒यते॒ तां त्वा॑ पृछामि कत॒मा सर्चाम्

yā purastād yujyate yā ca paścād yā viśvato yujyate yā ca sarvataḥ | yayā yajñaḥ prāṅ tāyate tāṃ tvā pṛchāmi katamā sarcām

हिन्दी अर्थ

नाका वणेन सामिप्रायष्ै। ...- र '..-न.विजानामि- सर्जन गौर प्रलयन में कौन धवं का है भौर कौन सकता । सजन के लिये भरावश्यक है क्रि इसं से पूवं प्रलयन विद्यमान हो भौर प्रलयनःके लिये भ्रावश्यक है.कि इस से पूवं कोई सजंन हृभ्रा हो । भरर प्रलयन, विना किसी नियामक चेतन-तत्त्व के,स्वतः हो रहे है । इसलिये उद् गृणत्ति- गृणत्ति मे “गृ” काः प्रथं है निगलना । है" । तृतीय धाम है परमेदवर पहला धाम है प्राकृतिक जगत् । द्वितीय :

English

In him are all the lights, the three abiding in Prajāpati. 163

अध्याय 10

श्लोक 8.11

यदेज॑ति॒ पत॑ति॒ यच्च॒ तिष्ठ॑ति प्रा॒णदप्रा॑णन्निमि॒षच्च॒ यद् भुव॑त्।तद् दा॑धार पृथि॒वीं वि॒श्वरू॑पं॒ तत् सं॒भूय॑ भ॒वत्येक॑मे॒व

yadejati patati yacca tiṣṭhati prāṇadaprāṇannimiṣacca yad bhuvat| tad dādhāra pṛthivīṃ viśvarūpaṃ tat saṃbhūya bhavatyekameva

हिन्दी अर्थ

साध्याः सन्ति देवाः” 1 (यजुं० ३११६) ) अर्थात् “वै परमेदवरयाजी, , ॥॥ , (इमे) .इन (मयूखाः). ज्ञानरदिभयों. ते दिवम्) ज्योतिमंय नाक कां (उपतस्तभुः) थामा हुशरा है, इन ज्ञानरदिमर्यो ने (वातवे). बाना बनने के लिये (सामानि) साभगानों को (तसराणि) वेमा (चक्रुः) किया है । नाक भर्थात् मोक्ष॒पट के लिये “ज्ञान”. ह ताना. भौर उपासना हं “८इरकी"" नौर “सर” कहते है । यह बनने का उपकरण हं जिस द्वारा ताना म बाना बुना जाता है, पिरोया.जाता है । ज्ञानं के सम्बन्धमे कटाहैकि उपासना है “ध्येय के समीप बैठना” उप +भ्रासना, “सुभीप उपविष्ट नहीं कर लेता तब तक उसकी मुक्ति नहीं हो सकती । इस उपासना का साधन है “सामवेद के भक्तिगान' । ४ , =, ‡ काण्ड १० । सुक्त ७1 समाप्त

English

He verily who knows the Reed of Gold that stands amid the flood, is the mysterious Lord of Life. Singly the two young Maids of different colours approach the six-pegged warp in turns and

अध्याय 10

श्लोक 8.12

अ॒न॒न्तं वित॑तं पुरु॒त्रान॒न्तमन्त॑वच्चा॒ सम॑न्ते ।ते ना॑कपा॒लश्च॑रति विचि॒न्वन् वि॒द्वान् भू॒तमु॒त भव्य॑मस्य

anantaṃ vitataṃ purutrānantamantavaccā samante | te nākapālaścarati vicinvan vidvān bhūtamuta bhavyamasya

हिन्दी अर्थ

कर होने का कारण .२४) । परमेश्वर की सूक्ष्मता. (२५) । विश्वतोमुख जीवात्मा (२७, २८) । संसारवक्ष का सिञ्चन (२९) । श्रविनामक देवता सूरय ३६) देव काः काव्य (३२) ।; वेदवाणि्यो . का . उदृगमम भौर ३२३८ । भ्रथववेद-बाष्यं कां० १०। सु9 (1 शेष्ठ ब्रह्म के लिये (नमः) नमस्कार हो ।

English

weave it. The one draws out the threads, the other lays them: they break them not, they reach no end of

अध्याय 10

श्लोक 8.13

प्र॒जाप॑तिश्चरति॒ गर्भे॑ अ॒न्तरदृ॑श्यमानो बहु॒धा वि जा॑यते ।अ॒र्धेन॒ विश्वं॒ भुव॑नं ज॒जान॒ यद॑स्या॒र्धं क॑त॒मः स के॒तुः

prajāpatiścarati garbhe antaradṛśyamāno bahudhā vi jāyate | ardhena viśvaṃ bhuvanaṃ jajāna yadasyārdhaṃ katamaḥ sa ketuḥ

हिन्दी अर्थ

(निमिषत्) निभैषोन्मेषक्रिया कर रहाहै। दान्त नि विष्ट हुई है, भरपने-्पने स्थानों मे निवेश पाई हई है । (बृहन्) करता है (तस्थौ) स्थित है (हरितः) वह इन तौर्नो का हरण करता हभ्रा सूयं से भित्र है । ये.सुयं के भरभिमुल हए निज स्थानो: मेः निविष्ट । सूयं . १. सुं पूवं से परिम की भ्रोर गति करता भ्रा दीखता है, परन्तु है यह्

English

labour. Of these two, dancing round as ‘twere, I cannot distinguish whether ranks before the other. A Male in weaves this web, a Male divides it: a Male hath stretched it to the cope of heaven

अध्याय 10

श्लोक 8.14

ऊ॒र्ध्वं भर॑न्तमुद॒कं कु॒म्भेने॑वोदहा॒र्यऽम्।पश्य॑न्ति॒ सर्वे॒ चक्षु॑षा॒ न सर्वे॒ मन॑सा विदुः

ūrdhvaṃ bharantamudakaṃ kumbhenevodahārya'm| paśyanti sarve cakṣuṣā na sarve manasā viduḥ

हिन्दी अर्थ

कां०.१० । सु० प प्रथवेवेद-भाष्य ३३९ इन सक्सेबड़ाहै परिमाणे. महाकाय है, भौर तस्थौ" स्थित है गति- रहित है । यह निजस्थान में स्थित हृभा तीन प्रजाभ्रों काहरण किये हये इन का भ्रपह्रण किये हृए है । हरिणीः = दिच्लाएं ( ऋ० -८। १० १।१४ वेंकट- माधव ने “दिशः"” किया है । अथववेद मे “हूरितः के स्थान में “हरिणीः पाठ है, अतः वेक्कुटमाषव के अथं के अनुरूप हरिणीः का प्रथं दिद्याएं किया है । तथा हरितः' “दिङ्नाम"” (निषं० ११६) । रजः ज्योतिः (निख्क्त तत्राहैतासतरीणं शंताति शङ्व॑ः षष्टिश्च खीला अविचाचला ये ॥४॥ तीन (नभ्यानि) नाभि के हिस्से (क, उ तत्, चिकेत) कौन उसे जातता है ।

English

These pegs have buttressed up the sky. The Sāmans have turned them into shuttles for the weaving.

अध्याय 10

श्लोक 8.15

दू॒रे पू॒र्णेन॑ वसति दू॒र ऊ॒नेन॑ हीयते ।म॒हद् य॒क्षं भुव॑नस्य॒ मध्ये॒ तस्मै॑ ब॒लिं रा॑ष्ट्र॒भृतो॑ भरन्ति

dūre pūrṇena vasati dūra ūnena hīyate | mahad yakṣaṃ bhuvanasya madhye tasmai baliṃ rāṣṭrabhṛto bharanti

हिन्दी अर्थ

है, (षष्टिः, च . भौर साठ (खीलाः) कील है (ये) जो कि . (भ्रविचाचलाः) ब्रिचनितत नहीं होते स्थिर रहते है ।. . .पुद्टियां ( एला68) । वषं एक चक्र है, पहिया है, जिसकी परिषि १३ वषं के नम्य है । पहिए के "तीन नभ्य विचाराघोन हं । तीन सौ. भौर साठ शङ्कु श्रौर खील ह = वषै. के ३९० दिन । प्रत्येकं मास तीस दिनो के हिसाब से 1 पहिलेःकेः दण्डे जो नामि श्रौर परिधि मे लनो गहते हं उन्हे. भी सम्भ- वतः :३६० कहा -है। ये २६५दिल विचलितः नहीं होते, यह संख्या वक्षं के बाण्टा.जाता है । ३०० को चाककु, -भरौर् ६० को खील कह .है । एक ऋतु दो-मासौं की होती है, -भौर अत्येक्र भास ३५ दिनों का । सम्भवतः ऋतु के ्दियाह.कि "प्रजापति परमेरवर” उसे जानता है । यथा “कस्मै देवाय

English

Speculations on the Supreme Being and Cosmogonical and theological subjects Worship to loftiest Brahma, Lord of what hath been and what shall be, To him who rules the universe, and heavenly light is all his own!

अध्याय 10

श्लोक 8.16

यतः॒ सूर्यः॑ उ॒देत्यस्तं॒ यत्र॑ च॒ गच्छ॑ति ।तदे॒व म॑न्ये॒ऽहं ज्ये॒ष्ठं तदु॒ नात्ये॑ति॒ किं च॒न

yataḥ sūryaḥ udetyastaṃ yatra ca gacchati | tadeva manye'haṃ jyeṣṭhaṃ tadu nātyeti kiṃ cana

हिन्दी अर्थ

हविषा विषे“ भे"दो "अर्थे कयि जुति है, (१) कंस देवः के लि, (२) भजापति देव क तिये हवि द्वार हम रिवर करं । : ! . “ (सवितः) है सविता ! (इदम्) इसे (विजानीहि) तु जान कि षंड यमाः) ६ ह जगत् के निथामक नियन्ता (एकः) इन भ से एक ह (एकजः) लव होना (इच्छन्ते) चाहते है (यः) जो कि (एषाम्) इस मेँ से (एकः) जगत् के यम है नियामक है! ५ मूत है -आकाल, वायु, ग्नि, श्राप भ्रौर पृथिवी । इन कै परस्पर भेलः से भौतिक जगत् पेदा हृभा है । परमेश्वर इनः कौ नियामक है 1 विना चेतन नियाम के व्यवस्थित उत्पत्ति नही हौ वाीरभनिरगनेरापः अरदुभ्यः पृथिवी (तंतिरीय उप०) के श्रनुसार.ये ६ यम है, निंयार्मक ह १. श्रात्मां रौर ४ भूत । कायं भ्रपते उपादान कारणम (भररपित्व” श्रथति लीनं हना चाहते है वायु ˆ भादि ४ तत्त्व. एकजं नहीं । कीश एकज है, येह एकं परमेक्वंर से पदां हरा है, “तस्माद्वा एतस्मा- दीत्मनः" से पैदा हंभा है। वयु दौ ' सेःपैदां हई है, मूलंःकारण भात्मा से,

English

Upheld by Skambha’s power these two, the heaven and the earth, stand fast. Skambha is all this world of life, whatever breathes or shuts an. eye.

अध्याय 10

श्लोक 8.17

ये अ॒र्वाङ् मध्य॑ उ॒त वा॑ पुरा॒णं वेदं॑ वि॒द्वांस॑म॒भितो॒ वद॑न्ति ।आ॒दि॒त्यमे॒व ते परि॑ वदन्ति॒ सर्वे॑ अ॒ग्निं द्वि॒तीयं॑ त्रि॒वृतं॑ च हं॒सम्

ye arvāṅ madhya uta vā purāṇaṃ vedaṃ vidvāṃsamabhito vadanti | ādityameva te pari vadanti sarve agniṃ dvitīyaṃ trivṛtaṃ ca haṃsam

हिन्दी अर्थ

सेः श्रीकर तथावायुं से ईत्यांदि + इसलिए परथिवी कालय ' होता द भ्रापः मर रापः कौ लयः होता हेश मे; भ्रग्नि कां-लंयं होता है वायु मे; वाभू ङ लवं होत है पारो भ 1 ईस पर ४ तीं की -लय होता है एकज भर्ात् आकाश मे । परकश परकंल है । एकं भरतमा से वाः हाई । प्रास्य षिढान्तानसार भृति से भतत पवा हं ह। ह ह वयाप तत्व त ६० दिनों की होतीं है । मन्व मे “कं उ तच्िकेत" भे “कः” पद द्रधथेक' है । कः कौन, तथा कः प्रजापति परमेदवर । रतः यह भी सुचित्त कथः कां०-१०.। सुऽ ण भरयवेवेद-माष्यः =+ ५ ३४१ से मनुष्य म वैयवितिक बुद्धि पैदा हुई । यह ॒वैय्तिक वृ क भौर चित्तरूप मं विजत होकर चार रूपवाली हुई, लिसे ।क ५ व ्तुषटय कहत ह । “व्यापी. महत-ठतव! भौर न्दः करण चतुय एषा मूलप्रकृति ये ६ यम ह, जिन से जगत पदा हरा, भतः. मति से. पवा हृभौ

English

Three generations have gone by and vanished and others near have entered into sunlight. There stood on high he who metes out the region into green, plants hath passed the Golden coloured. One is the wheel, the tires are twelve in number, the naves are three What man hath

अध्याय 10

श्लोक 8.18

स॒ह॒स्रा॒ह्ण्यं विय॑तावस्य प॒क्षौ हरे॑र्हं॒सस्य॒ पत॑तः स्व॒र्गम्।स दे॒वान्त्सर्वा॒नुर॑स्युप॒दद्य॑ सं॒पश्य॑न् याति॒ भुव॑नानि॒ विश्वा॑

sahasrāhṇyaṃ viyatāvasya pakṣau harerhaṃsasya patataḥ svargam| sa devāntsarvānurasyupadadya saṃpaśyan yāti bhuvanāni viśvā

हिन्दी अर्थ

इस व्याख्याकार के श्रनुसार यम का भयं है जोड़ा. ॥ हद्दो मासो का । “एकज है मलमास, ४९०18 71077 व त इत्येकजः'" १ यहं मलमास भरकेला परेदा होता है, ऋतु के सदृश जड़ (सत्) सत् परमेश्वर (जरत्) पुरांण (नाभ) ना ५ ( न एल पीत है, वह (गुहा £ ४. ८५ ५८ भराविः) प्रकट होता है 4 : (तत) उस मे (इदम्, सवम्) यह स हमा (परविष्ठम्) स्यि है। .., „3. वि ) इजाररो.भरक्षों वलि है,(प एर); प, सामनेकी भरो

English

understood it? Three hundred spokes have thereupon been hammered, and sixty pins set firmly in their

अध्याय 10

श्लोक 8.19

स॒त्येनो॒र्ध्वस्त॑पति॒ ब्रह्म॑णा॒र्वाङ् वि प॑श्यति ।प्रा॒णेन॑ ति॒र्यङ् प्राण॑ति॒ यस्मि॑न् ज्ये॒ष्ठमधि॑ श्रि॒तम्

satyenordhvastapati brahmaṇārvāṅ vi paśyati | prāṇena tiryaṅ prāṇati yasmin jyeṣṭhamadhi śritam

हिन्दी अर्थ

परमेदवर । इस चक्रमे हजारो भक्ष, घुराएं ह, जिन परः कि सूर्यादि घूम भ्रौर पीठे की भ्रोर श्रसीम मात्रा में फला हृभरा है । जिधर भी मूख करर उस है, भौर प्रकृति .का कितना अंश भवशिष्ट है. जो किं उत्पादन से -रहित है, यह प्रन भी मन्व मै अभिप्रेत हो सकताहै 1: - का (वहति) वहन् करं रहा है1 (रष्टयः पुष्टयः) .पीछे लगे परक्चभरुत (य्ताः) परस्पर मिल , कर (भरन) परमेव कै -पोछठःपीछे, (संवडन्ति) परस्पर विं ही जायि ।-भष्वं ०. "प्रःकाःभथं हो “प्राघा) भौर - यञुवेद-के

English

places. Discern thou this, O Savitar. Six are the twins, one singly born. They claim relationship in that among them which is born alone.

अध्याय 10

श्लोक 8.20

यो वै ते वि॒द्याद॒रणी॒ याभ्यां॑ निर्म॒थ्यते॒ वसु॑ ।स वि॒द्वान् ज्ये॒ष्ठं म॑न्येत॒ स वि॑द्या॒द् ब्राह्म॑णं म॒हत्

yo vai te vidyādaraṇī yābhyāṃ nirmathyate vasu | sa vidvān jyeṣṭhaṃ manyeta sa vidyād brāhmaṇaṃ mahat

हिन्दी अर्थ

“सा पेदं स्त्रीलिङ्गो है, पारमेदवरी शक्ति या ४०५० क वर्णनं मन्म हृभ्रा है । “युज्यते दारा उस , को ; संसारःशकट भः “जता” , भौ गृहकाय मे, गृह मे मानो जुतीं रहती ह भौर -गृहस्थयन्ञ का विस्तार हैः (भ्राणत्ः) भौर जो भाणः रहित है (निमिषत् च) भौर. जो निभेषोन्मेष जगत्. को. (पृथिवीम्) आरौ पृथिवी को (दाधार) स्कमम परमेदर धारण किये हये दः। (तत्) कहे न (सं) इका होकर (मवतिरहो जाता. है

English

Up, eastward downward in the west, ‘it rolleth, with countless elements, one-wheeled, single fellied. With half it hath begotten all creation. Where hath the other half become unnoticed? In front of these the five-horsed car moves onward: side-horses, harnessed with the others

अध्याय 10

श्लोक 8.21

अ॒पादग्रे॒ सम॑भव॒त् सो अग्रे॒ स्व॑१राभ॑रत्।चतु॑ष्पाद् भू॒त्वा भोग्यः॒ सर्व॒माद॑त्त॒ भोज॑नम्

apādagre samabhavat so agre sva1rābharat| catuṣpād bhūtvā bhogyaḥ sarvamādatta bhojanam

हिन्दी अर्थ

एक प्रकृतिं्म दी हो जाता है, विषमरूपौ नहीं रहता 1 कां १०.सु० ठ भ्रथर्ववेद-भाष्य ३४४ अन्तके साथ संगत है। (ते) उन दोनों का, (नाकपालः) नाक-पालक् तारा-संख्या को दृष्टि से भ्रतन्त .: दयलोक, भौर सव॑त, समतल तथा पृथिवीलोक परिमाण की दृष्टि से सीमित है, भौर काल की दृष्टि से विना

English

draw it. No one hath seen its hither course untravelled; the height sees it more near, the depth more

अध्याय 10

श्लोक 8.22

भोग्यो॑ भव॒दथो॒ अन्न॑मदद् ब॒हु।यो दे॒वमु॑त्त॒राव॑न्तमु॒पासा॑तै सना॒तन॑म्

bhogyo bhavadatho annamadad bahu| yo devamuttarāvantamupāsātai sanātanam

हिन्दी अर्थ

कौ भलग-भलग.समय में चिना है, रचा है । वह ही इस. समग्र ब्रह्माण्ड फे भूत भौर भविष्यत्को जानता है, भौर कोई नहीं जानता 1 (चरति) विचर रहा हैः. (भरवुश्यमानः) न दीखता . हमरा. ब्रह (बहधा) बहत प्रकार से (त्रिं जायते) विविध रूपों मेँ प्रकट. होता है। . (भरन) भंश है (सः) बह (कतमः). भत्यनत धुधस्वरूपंै, (केतुः) ज्ञानस्वरूप है । ३४६ भ्रथर्ववेद-माष्यः कं०.१० (सुऽ कित् संज्ञाने यथा . “चिकेतं” । तंथां -“केतुः प्रज्ञानम” (निधं ० ३।६ ।

English

distant. The bowl with mouth inclined and bottom upward holds stored within it every form of glory. Thereon together sit the Seven Rishis who have become this mighty One’s protectors

अध्याय 10

श्लोक 8.23

स॒ना॒तन॑मेनमाहुरु॒ताद्य स्या॒त् पुन॑र्णवः ।अ॒हो॒रा॒त्रे प्र जा॑येते अ॒न्यो अ॒न्यस्य॑ रू॒पयोः॑

sanātanamenamāhurutādya syāt punarṇavaḥ | ahorātre pra jāyete anyo anyasya rūpayoḥ

हिन्दी अर्थ

-:. कर्यं मर॑न्तघ्दकं कम्मेनेबोदहाय य । उस के यथार्थं स्वङूप को (मनसा ) मनन पूवेक (न विदुः) नहीं जार्नते,. , -भआदि रूप कोः तोः सब्र जानते है, परन्तु सब (मनसा) मनन-पूरवंक उस कै यथार्थं स्वरूप कों (न विदुः) नहीं जनते । . जल ले जतिहुए को - भांख वारा उस के तात्कालिक उदहा्यैरूप को लोग - जानते है, ्रौर मनन या विचार पूरक उस के यथाथं स्वरूप को नहीं देखते, उस कै यथाथं शूप को केवल उस के सम्बन्धी ही ल्ानते है, वसे जगत् की

English

The Verse employed at opening and conclusion, the Verse employed in each and every portion;

अध्याय 10

श्लोक 8.24

श॒तं स॒हस्र॑म॒युतं॒ न्यऽर्बुदमसंख्ये॒यं स्वम॑स्मि॒न् निवि॑ष्टम्।तद॑स्य घ्नन्त्यभि॒पश्य॑त ए॒व तस्मा॑द् दे॒वो रो॑चत ए॒ष ए॒तत्

śataṃ sahasramayutaṃ nya'rbudamasaṃkhyeyaṃ svamasmin niviṣṭam| tadasya ghnantyabhipaśyata eva tasmād devo rocata eṣa etat

हिन्दी अर्थ

वे नीः जानते, केवल (मनसा) मनन.निदिष्यासन वाले कतिपय च्यानी ही सं स्वंश्प को जानते है । . : १. यथा ("त्रिपादष्वं उदेतपुरुषः पादोऽस्येहामवंत्पुनः” (यऽ ३१४ । ‡ , कां० १० सुऽ. ध भरथर्ववेद-माध्यः- ३४७. वसता है, (ऊनेन निधन ्र्थात् गरीब द्वारा. तो वहुः (दूरे) दूर (हीयते) भृतः) राष्टरधारी यां राष्ट काःभरण पोषण करने वाले राजा लोग (बलिम्) भेटं (भरन्ति) लाते है, समर्पित करते हः

English

That by which sacrifice proceedeth onward. I ask thee which is that of all the Verses. That which hath power of motion, that which flies, or stands, which breathes or breathes not, which, existing, shuts the eye

अध्याय 10

श्लोक 8.25

बाला॒देक॑मणीय॒स्कमु॒तैकं॒ नेव॑ दृश्यते ।ततः॒ परि॑ष्वजीयसी दे॒वता॒ सा मम॑ प्रि॒या

bālādekamaṇīyaskamutaikaṃ neva dṛśyate | tataḥ pariṣvajīyasī devatā sā mama priyā

हिन्दी अर्थ

रहते है प्रौर घन-धान्य से वञ्चित व्यित इस के उपाजन मे ही कालयापन तदेव . मन्येऽहं ज्येष्ठं तदु नात्येति, षिः चनं ॥१६॥ , (यतः) जहां से (सूयः) . सूयं (उदेति) उदित होता (च) भौर उससे बढ़कर कोर्द.पदार्थं नहीं-। . .. ये अर्वा पध्यं उत वाँ पुराणं वेदं विदरर्षमभिंतो वदन्ति । ३४८ : भथर्वेवेद-भाष्य कां० १० । सुरः वेत्ता-परमभेक्वर का (भ्रभितः) सब नोर (वदन्ति) कथन करते ह; (ते) वें

English

Wearing all forms that entity upholds the earth, and in its close consistence still is only one. The infinite to every side extended, the finite and the infinite around us,

अध्याय 10

श्लोक 8.26

इ॒यं क॑ल्या॒ण्य॑१जरा॒ मर्त्य॑स्या॒मृता॑ गृ॒हे।यस्मै॑ कृ॒ता शये॒ स यश्च॒कार॑ ज॒जार॒ सः

iyaṃ kalyāṇya1jarā martyasyāmṛtā gṛhe| yasmai kṛtā śaye sa yaścakāra jajāra saḥ

हिन्दी अर्थ

५ हंसम् ) हंस नाम वाले परमेद्वर का (परिवदन्ति) सब भ्रोर कंथवे परमेश्वर का नाम है । यथा "“हुंमः शुचिषद् वसुः“ (यजु० १०।९४५. . (स्वम्) स्वभ की भ्रोर (पततः) डते हए, (हरेः) . अपने साथ सौर- परिवार को हरते हए; (भ्रस्य) इस (हंसस्य) हंस सूयं के (पक्षौ) . मानो है,.फेले .रहते है । (सः) वह हंस (सर्वान्) सब (देवान्) देवों को (उरसि).

English

These twain Heaven’s Lord divides as he advances, knowing the past hereof and all the future Within the womb Prajāpati is moving: he, though unseen, is born in sundry places. He with one half engendered all creation. What sign is there to tell us of the other?

अध्याय 10

श्लोक 8.27

त्वं स्त्री त्वं पुमा॑नसि॒ त्वं कु॑मा॒र उ॒त वा॑ कुमा॒री॥ त्वं जी॒र्णो द॒ण्डेन॑ वञ्चसि॒ त्वं जा॒तो भ॑वसि वि॒श्वतो॑मुखः

tvaṃ strī tvaṃ pumānasi tvaṃ kumāra uta vā kumārī|| tvaṃ jīrṇo daṇḍena vañcasi tvaṃ jāto bhavasi viśvatomukhaḥ

हिन्दी अर्थ

को नतु हृ्ा (याति) जाता है। तथा देखो (श्रथवं० १३।२।३४८; मन्त्र १७ में हंस" नाम से परमेदवर का. वर्णन हुभ्रा है, जिस कौ भ्रतः सूयं रथ जिधर गति कर रहा है, उसमें स्थित हृए ब्रह्मपुरुष की इस रथ का उड़ान स्वगं कीः भोर कर रहा. है । मन्त्र मेँ “पततः” हारा प्रौर पक्षौ" द्वारा पक्षी रूपम सूरय॑रथ का वणंन हृश्रा है, जो कि भके में उह कां १० 1 सु० द. भथर्वैवेद-माष्य ३४९

English

All men behold him with the eye, but with the mind they know not him. Holding aloft the water as a water-bearer in her jar.

अध्याय 10

श्लोक 8.28

उ॒तैषां॑ पि॒तोत वा॑ पु॒त्र ए॑षामु॒तैषां॑ ज्ये॒ष्ठ उ॒त वा॑ कनि॒ष्ठः ।एको॑ ह दे॒वो मन॑सि॒ प्रवि॑ष्टः प्रथ॒मो जा॒तः स उ॒ गर्भे॑ अ॒न्तः

utaiṣāṃ pitota vā putra eṣāmutaiṣāṃ jyeṣṭha uta vā kaniṣṭhaḥ | eko ha devo manasi praviṣṭaḥ prathamo jātaḥ sa u garbhe antaḥ

हिन्दी अर्थ

चमकता है भ्रौर (भ्र्वाङ ) नीचे के भूमिष्ठ लोगों का (वि परयति) . विशेष मनुष्यो को (प्राणति) सजीव करता रहतां है चाल चलते हँ उन्दँ भी वह सदुपदेशो द्वारा प्राणशक्ति देकर सजीव करता दवारा ऊध्वंदिश्चा मे तप रहा है भ्रौर निज रदिमरयों द्वारा मानो नीचे मूमि को इस प्रकार मन्त्र १८,१९ मं ्राथिकं समन्वय हो जाता. है। .

English

With the full vase he dwells afar, is left far off what time it fails, 164 A mighty Being in creation’s centre: to him the rulers of the realms bring tribute.

अध्याय 10

श्लोक 8.29

पू॒र्णात् पू॒र्णमुद॑चति पू॒र्णं पू॒र्णेन॑ सिच्यते ।उ॒तो तद॒द्य वि॑द्याम॒ यत॒स्तत् प॑रिषि॒च्यते॑

pūrṇāt pūrṇamudacati pūrṇaṃ pūrṇena sicyate | uto tadadya vidyāma yatastat pariṣicyate

हिन्दी अर्थ

(यः) जो (वै) वास्तवं में (ते भरणी) उन दो भ्ररणियों कोः (वेद). मेरवर (निमेथ्यते) अग्नि की तेरह मथ ' करः निकालां जाति है, प्रकटः तरह, परमेष्वर-देव का दान. करे 1 रचना से पूवं चू कि उस का सृष्ठिहमो -एकपाद् भी-नहीं होताः;श्रत सुष्टि- रचनाः पुर्वं वह अपाद् होता है, पादरहित ह्लोेता है ।, उस समयः वहु: निज के वह. “भोग्य होता है ।;ऽपासक.उस.के भरानत्दस्वरूप का मोग करते.हँ । .

English

That, whence the Sun arises, that whither he goes to take his rest, That verily I hold supreme: naught in the world surpasses it.

अध्याय 10

श्लोक 8.30

ए॒षा स॒नत्नी॒ सन॑मे॒व जा॒तैषा पु॑रा॒णी परि॒ सर्वं॑ बभूव ।म॒ही दे॒व्यु॑१षसो॑ विभा॒ती सैके॑नैकेन मिष॒ता वि च॑ष्टे

eṣā sanatnī sanameva jātaiṣā purāṇī pari sarvaṃ babhūva | mahī devyu1ṣaso vibhātī saikenaikena miṣatā vi caṣṭe

हिन्दी अर्थ

अदान “करते ह, उसंःके पांस खनिंपान की सामग्री का भरतिद्ाग्र.हौ जाता है , (देखो २५२ भषवेवेदनमाष्य "को १०। सुरन :. . भूतकाल की सृष्टि मँ तथा वतमान काल. की सृष्टि (प्रथ), श्रौर ये भ्रनादि होते हए पुनःपुनः नए-नण प्रकट. होते है, इसी प्रकार परमेश्वर .के सनातन होते हृए भी बहू प्रतिपूष्टि नर्ए-नए शपो मेँ प्रकट होताः रहता है । श्रहोरात्रे यथा- च 8 - ऊः 1 श्रादि की सनातन सत्ता कही है, भौर ये पुनः पूनः नए-नए कपो मे भी प्रकट होते रहते है ।, , ल = + रूप में रचिकर होता है, प्रिय होता है । र परमेदवर भ्रसंस्यातत.धन.का स्वामी है । इस. स्वामी से पुषे बिना,

English

This gold-hued Haiisa’s wings, flying to heaven, spread o’er a thousand days’ continued journey.

अध्याय 10

श्लोक 8.31

अवि॒र्वै नाम॑ दे॒वत॒र्तेना॑स्ते॒ परी॑वृता ।तस्या॑ रू॒पेणे॒मे वृ॒क्षा हरि॑ता॒ हरि॑तस्रजः

avirvai nāma devatartenāste parīvṛtā | tasyā rūpeṇeme vṛkṣā haritā haritasrajaḥ

हिन्दी अर्थ

.लोग. इसके देखते-देखते इसके घन को हथियाते रहते है, तब भी परभेदवर ... इन्हे कृ कहता नहीं, भ्रतः इस रूप में परमेदवरं सब को प्रिय लगता है । ततः परिष्वजीयसी देवता सा ममं प्रिया ॥२५॥ ˆ. (पकम्) एक बलु जोकि (बालात्) बाल से (भगोयखम्) शम , (उत) तथा. (एकम्) .एक वस्तु. जो कर (न इव) न के .सृदृश् (दृष्यते) १. “देवो दानाद् वा” (निरुक्त ७।४।१५) 4 1.

English

Supporting all the Gods upon his bosom, he goes his way behol- ding every creature. By truth he blazes up aloft by Brahma, he looks down below: He breathes obliquely with his breath, he on whom what is. highest rests.

अध्याय 10

श्लोक 8.32

अन्ति॒ सन्तं॒ न ज॑हा॒त्यन्ति॒ सन्तं॒ न प॑श्यति ।दे॒वस्य॑ पश्य॒ काव्यं॒ न म॑मार॒ न जी॑र्यति

anti santaṃ na jahātyanti santaṃ na paśyati | devasya paśya kāvyaṃ na mamāra na jīryati

हिन्दी अर्थ

दीखती है व॑सी वह् (देवता) देवता है । वह देवता. (परिष्वजीयसी ) , सबको भ्रलिङ्गन किये हृए है, (ततः) इसलिये (सा) वह (मम श्रिया) मेरीप्यारीहैवः ˆ " च " ध य ारभेस्वरीं दिव्या भाता बाल से भी सूर्म है; तथाः वह “नके सदश्च दीखती है, भनु तो होती हैष्परन्तु दृष्टिगोचर नहीं होती । परंतु उसने „ यसमै कृता श्रये.स यवकारं जनार. सः. ॥२६॥ (इयम्) यह (कल्याणी ; करने . वाली दरेवता, . न्त. २५ (अजरा) जरारहित है, जीर्णं र. होती। (भमृता) यह भ्गरता देवता, (मत्येस्य) ५ मनुष्य के (गृहं) शरीर या हदयगृह मँ विद्यमान है। (कृता) वह कतिशर (यस्मे ) जिसके लिये (शये) मत्य शरीर या कमं करता है भौर ,(जजार) :जीणं होता रहता है । . है (त्वम्) तु (कुमारः) करंमार (उत वा) तथा (कुमारी) कमारी हो जाता है। त्म) तु . (जीर्णः) बू हौ जाता है (दण्डेन) तो दण्डके साथ मुखो .वाला (जातः सुवसि). जन्म लेताहै। .. ..

English

The sage who knows the kindling-sticks whence by attrition wealth is drawn, Will comprehend what is most high, will know the mighty

अध्याय 10

श्लोक 8.33

अ॒पू॒र्वेणे॑षि॒ता वाच॒स्ता व॑दन्ति यथाय॒थम्।वद॑न्ती॒र्यत्र गच्छ॑न्ति॒ तदा॑हु॒र्ब्राह्म॑णं म॒हत्

apūrveṇeṣitā vācastā vadanti yathāyatham| vadantīryatra gacchanti tadāhurbrāhmaṇaṃ mahat

हिन्दी अर्थ

किया है । मन्त्र २७ मेँ सरी “जीण: दारा जीवोत्मा के देह की जरावस्था भ्रा विद्रतोमूरख . होत्ता रहता है ५ ; यं सब -उघ.के कर्मो का फल है ्रधरवंवेदं-भाष्ये कां .१०५सू०२४ एको ह देवो मन॑सि विष्टः पथमो जातः स छ गभँ;अन्तः ॥२८॥ ए; (जत); वेधा एषस्); इनः को (पिता) पितम उत वौ) तथो (एताम्) न का (एषः) रवं (उत) तथाः (एषाम्) इनर्ः : (ज्येष्टः) बडा, (उतत वा)-तथा (कनिष्ठः) .छोदाः होता रहता है।:एकःदेव द् एक; टीःदेव पदा होता है, (सः उ वह ही-मरकर, शरीर त्याग कुर पुनः (गम् श्रन्तः) गभं के भीतर भरात् है।

English

Brāhmana. Footless at first was he produced, footless he brought celestial light. Four-footed grown, and meet for use, he seized each thing enjoyable.

अध्याय 10

श्लोक 8.34

यत्र॑ दे॒वाश्च॑ मनु॒ष्याऽश्चा॒रा नाभा॑विव श्रि॒ताः ।अ॒पां त्वा॒ पुष्पं॑ पृच्छामि॒ यत्र॒ तन्मा॒यया॑ हि॒तम्

yatra devāśca manuṣyā'ścārā nābhāviva śritāḥ | apāṃ tvā puṣpaṃ pṛcchāmi yatra tanmāyayā hitam

हिन्दी अर्थ

८ देवः जीवात्मा स्वंल्पंतः देव है 1 रः मने दारा जकड़ा होकर, देरव” ही कर गनास्पो मे जन्म तता रेता है .1 4. 2. स्क पूण ह शौर. जगत्-वृष" भीं है. भाणियं के सामूहिक -इस.मे इस दष्टं से कोई न्यूनता नदीं । परन्तु.हम यहं जानना चाहते ह कि "सब भोर” । जिज्ञासुभ्रों को सबः्रोर जगत्-वुक्ष हरा-्भरा -दीख रहा है, कही सी मुरकायो हाया ख्लां दृष्टिगोचरं नही “हो - रहा है, - इसलिये “परि” का.प्रयोगं “सिच्यते” के साथ हुंमा है1 भरी-हैष्युश्वसौ विभोतीं सेक्ेनेकेन -मिषति। वि चण्ट:३.5॥

English

Useful will he become, and then will he consume great store of food The man who humbly worshippeth the eternal and victorious

अध्याय 10

श्लोक 8.35

ये भि॒र्वात॑ इषि॒तः प्र॒वाति॒ ये दद॑न्ते॒ पञ्च॒ दिशः॑ स॒ध्रीचीः॑ ।य आहु॑तिम॒त्यम॑न्यन्त दे॒वा अ॒पां ने॒तारः॑ कत॒मे त आ॑सन्

ye bhirvāta iṣitaḥ pravāti ye dadante pañca diśaḥ sadhrīcīḥ | ya āhutimatyamanyanta devā apāṃ netāraḥ katame ta āsan

हिन्दी अर्थ

(एषा) यह (सनत्नी ) सनातनी (सनम् एव) सदा ही (जातो) धृष्टि मर प्रकट होती है (एषा) यह (पुराणी) पुराकाल से विद्यमान दहै, प्रनुदि कां०-१०।-सुभक् भरथववेद-माष्य् ३५४ है (सवंम्) सब को (परिबभूव). इसने सब.भ्रोर परे घेरा . हा हैः। (मही देवी ) यह महती देवी (उषसः) उषारभरो- को (विभातीः) दीप्त करती है, चमकाती है । (सा). वह (एकेन-एकेन) एक-एकं (मिषता) उन्मेषं द्वारा वरिरष्टे) विविधः जगत् को देख लेती है । ॑ भिषतां =श्रांखु"के उन्मेष दवारा । परिषिच्यते .(२९) श्रौर परिबभूव (३०) मे “पररि” कामाव हैः सब श्रोर .. :

English

God. Him too they call eternal; he may become new again to-day. Day and Night reproduce themselves, each from the form the other wears.

अध्याय 10

श्लोक 8.36

इ॒मामे॑षां पृथि॒वीं वस्त॒ एको॒ऽन्तरि॑क्षं॒ पर्ये॑को॑ बभूव ।दिव॑मेषां ददते॒ यो वि॑ध॒र्ता विश्वा॒ आशाः॒ प्रति॑ रक्ष॒न्त्येके॑

imāmeṣāṃ pṛthivīṃ vasta eko'ntarikṣaṃ paryeko babhūva | divameṣāṃ dadate yo vidhartā viśvā āśāḥ prati rakṣantyeke

हिन्दी अर्थ

बुक्ष (हरिताः) हरे हैँ (हरितस्रजः) भ्रौर हरी मालाभ्रों वाले है। भ्रविः= भरव रक्षणे. (म्बादिः) "रक्षौ करने वाला सूरय. । भविः 16 वृक्ष हरे होते ह.सूथं के प्रकरं द्वारा; तथा जलसेचनं (२९) 'द्वारा । इसे है, स्थिर है, वह चलता नहीं । “ है मेड । मेड जातिकीं -मादाको.तो भ्रवि कहते, भ्रौरनर को मेद। मन्त्रम भ्रवि द्वारा मेषरारि भी विशेषतया सुचित की हं । वसन्त छतु म सूयं भेषराि पर होता है, जबकि वनस्पति मे, नवधघंण का संचार होता ह भौर वृक्ष तथा लताएं

English

A hundred, thousand, myriad, yea a hundred million stores of wealth that passes count are laid in him.

अध्याय 10

श्लोक 8.37

यो वि॒द्यात् सूत्रं॒ वित॑तं॒ यस्मि॒न्नोताः॑ प्र॒जा इ॒माः ।सूत्रं॒ सूत्र॑स्य॒ यो वि॒द्याद् स वि॑द्या॒द् ब्राह्म॑णं म॒हत्

yo vidyāt sūtraṃ vitataṃ yasminnotāḥ prajā imāḥ | sūtraṃ sūtrasya yo vidyād sa vidyād brāhmaṇaṃ mahat

हिन्दी अर्थ

हो जाति है, त्रभीं -धिधिर तुः कोः: ““पतमढ" भी कते है प्रते ऊडने की ऋतुः। ३९६ , भयववेद-भाष्य का०.१०।सु० य . देवस्यं पश्य काव्यं न म॑मार न. जीति :॥३२॥. , (न ममार) देखने वाला न मरता है, (न् जीर्यति) भौर न जीणं होता है । भरतः उसके; केद्काव्य को देखना चाहिए, लिससे ज्ञात होगा करि इस के दशन

English

This wealth they kill as he looks on, and now this God shines bright therefrom. One is yet finer than a hair, one is not even visible. And hence the Deity who grasps with firmer hold is dear to me.

अध्याय 10

श्लोक 8.38

वेदा॒हं सूत्रं॒ वित॑तं॒ यस्मि॒न्नोताः॑ प्र॒जा इ॒माः ।सूत्रं॒ सूत्र॑स्या॒हं वे॒दाथो॒ यद् ब्राह्म॑णं म॒हत्

vedāhaṃ sūtraṃ vitataṃ yasminnotāḥ prajā imāḥ | sūtraṃ sūtrasyāhaṃ vedātho yad brāhmaṇaṃ mahat

हिन्दी अर्थ

पो ले कर, बार-बार मरने भौर जीं होने से उचे,छुटकारा मिल जाता - -(भ्रपूवेणः) प्रनादि परमेखर द्वारा (दषिताः). भेजी हू" (वाचः). वेदः वाणियां हं । (ताः) वे , वेदवाणियां (यथायथम्) तत्त्वो करो यथाथं रूप में (वदन्ति) प्रकट. करती है. । ..(वदन्तोः) प्रकट करती हई. (यन) . जहां है । परमेदेवरं इरः मनष्योपकाराथं भेजता हैँ । ये वस्तुः का यथां वणेन ., यत्रं देवाश्च मनुष्यां इचारा नामांविवं चिताः । “ यत्र) जिसमे (देवाः च) देव भौर मर्नुष्याः.. च) मनुष्य (धितः). भ्राश्चंय पाए हुए ह (इव) जेसे किं (भरा). भ्रा 8101९८8 (नाभौ) रथ की नामि मे भाशचयं पाते है । (भपाम् पुष्पम्) जलौ के उस पुष्पके

English

This fair one is untouched by age, immortal in a mortal’s house. He for whom she was made lies low, and he who formed her hath grown old.

अध्याय 10

श्लोक 8.39

यद॑न्त॒रा द्यावा॑पृथि॒वी अ॒ग्निरैत् प्र॒दह॑न् विश्वदा॒व्यः ।यत्राति॑ष्ठ॒न्नेक॑पत्नीः प॒रस्ता॒त् क्वेऽवासीन्मात॒रिश्वा॑ त॒दानी॑म्

yadantarā dyāvāpṛthivī agnirait pradahan viśvadāvyaḥ | yatrātiṣṭhannekapatnīḥ parastāt kve'vāsīnmātariśvā tadānīm

हिन्दी अर्थ

ब्रह्म (मायया) परा सित (हितम्) निरत है स्थितै! । देवाः सूर्यादि देव. (यजु° -१४।२०) । भर्पा अलो जाता है भर जलो भ हइ मला ४३ भ ष नि भला सित स्थित है । शरीर भ कई किमा भति तवि). है, यथा उवास प्रवास, रक्तं का. सं चार, भुक्तयान का ॥ ० निजपञा दरारा इन् करियाम कों करता चला द भरतः हदयं ब्रहम मया सहित स्थित है । माया परज्ञानाम (निषं ० ३।६ + ६ ति वः) था (ते) दां करते ह । (दवः) चो द (भान)

English

Thou art a woman, and a man; thou art a damsel and a boy. Grown old thou totterest with a staff, new-born thou lookest every way. Either the sire or son of these, the eldest or the youngest child.

अध्याय 10

श्लोक 8.40

अ॒प्स्वाऽसीन्मात॒रिश्वा॒ प्रवि॑ष्टः॒ प्रवि॑ष्टा दे॒वाः स॑लि॒लान्या॑सन्॥ बृ॒हन् ह॑ तस्थौ॒ रज॑सो वि॒मानः॒ पव॑मानो ह॒रित॒ आ वि॑वेश

apsvā'sīnmātariśvā praviṣṭaḥ praviṣṭā devāḥ salilānyāsan|| bṛhan ha tasthau rajaso vimānaḥ pavamāno harita ā viveśa

हिन्दी अर्थ

पृथिवीम् क षसं ह ५ दित करतौ 1 दती + = ज्रह्य को जानता हू 2 भ १ । । । ) ईस पृथिवी कोः (वस्ते) भ च्छ्यदितः करती. प्रोढती है, (एकः) १0 स 12 (एषाम्) इनं मेः), जो. (विधर्ता) . विविषुः सौरमण्डले को षारणं करता द है ुः(दिवम्) मरकाय था, विनः ; (ददते). शान करतां है, . (एक) थे तीनौं (विष्वाःभ्राशाः).सृ् शशरो की, (तुत्त) रका करते है । विद्यमान होकर, पृथिवी को- भाव्छाद्ित. करती है; ओर-शग्नः. पृथिवी कते गसं मेभ हैःकतः;पृथिवी दसकी रोनी है 4.यह ज्वाला मूखी पवतो, तथा ; जोगि स वतं रसिशोव का पाः !

English

Now also may we know the source from which the stream is sprinkled round. Brought forth in olden time, the everlasting, high over all that is was she, the Ancient. The mighty Goddess of the Morn, refulgent with one eye, looketh round with one that

अध्याय 10

श्लोक 8.41

उत्त॑रेणेव गाय॒त्रीम॒मृतेऽधि॒ वि च॑क्रमे ।साम्ना॒ ये साम॑ संवि॒दुर॒जस्तद् द॑दृशे॒ क्वऽ

uttareṇeva gāyatrīmamṛte'dhi vi cakrame | sāmnā ye sāma saṃvidurajastad dadṛśe kva'

हिन्दी अर्थ

:(ः)..जो (वितमः) विवि रूपों .प फते (सूत्रम्) सूत्र को बनी हई. -तथा, (यः) जो (सूतस्य सूतम) सुतर के सत्रं क (विद्यात्). वानव हए हः।;-अतिः वह.सतःका मी सूत्र है । भकृति तानास्प महै प्रर वेदा विततं ¢ ना कृमाः।; सतै चया वेदाथो, पू. माहे गहे ॥३८॥; : : (दम्) भै (वेद) जानता, (विततम्) विविध र्गौ पे ह कहा .सम्षवतः. (श्रासीत्)-शी+ आग्नि.अतीतर-होतीः 8, जो; किवं को , स्मसि कर देत है 1 एकपत्नी

English

winketh, Known by the name of Guardian Grace the Deity sits girt by

अध्याय 10

श्लोक 8.42

नि॒वेश॑नः सं॒गम॑नो॒ वसू॑नां दे॒व इ॑व सवि॒ता स॒त्यध॑र्मा ।इन्द्रो॒ न त॑स्थौ सम॒रे धना॑नाम्

niveśanaḥ saṃgamano vasūnāṃ deva iva savitā satyadharmā | indro na tasthau samare dhanānām

हिन्दी अर्थ

,- “भाप का ्ःबलः मानते पर. परलय का वर्णन मन्व ओ भप । हि जायेगा! भरापुः कायं है, भूल मं कायै की स्थिति असम्भव है । भरतः मानते है, भतः इदः स्थिव ; अलयकाल. मे. सम्भ॑व है । इतं संमय मात- प्ला सी्पातुरिवव परविष्टा देव संलयाय । ': (तस्थौ) स्थित था, (रजसो. विमानः -जुो.कि लोकों क. निर्माण श्राह मन्व मे, मन्त ३९ के अनुसारं “ "शर्य" का भे किध अतीतं “ ॑

English

Right. The trees have taken from her hue, green-garlanded, their robe of green. When he is near she leaves him not, she sees him not though he is near.

अध्याय 10

श्लोक 8.43

पु॒ण्डरी॑कं॒ नव॑द्वारं त्रि॒भिर्गु॒णेभि॒रावृ॑तम्।तस्मि॒न् यद् य॒क्षमा॑त्म॒न्वत् तद् वै ब्र॑ह्म॒विदो॑ विदुः

puṇḍarīkaṃ navadvāraṃ tribhirguṇebhirāvṛtam| tasmin yad yakṣamātmanvat tad vai brahmavido viduḥ

हिन्दी अर्थ

देव भी “सलिलानि” भ्रति “प्सु त भर्विष्ठ येः अतु. जहृदतरन 1 महान्-परमेकवर स्थितः थाः जो किः लोकों यू, तिर्मूणि , करता .है.बह् पुनः ' ततरेणेव गाययतीमपूतेऽधि विके ए 2 करम हुए था । (साम्ना) गायतरघामेगानै द्वारा, (ये) ज उपासकं (सामः शोन्तिसम्पत्न परमेद्धैर कौ (संविदः) व हैँ उन दारा (भजः) रहता है । “वरिपादस्यामृतं दिवि” (यजु ३१३) ॥ सांमगानों दारा, . मे जान लिया जाता है, परन्तु वह भरजन्मा केवल सामगानो दयार ्रत्यक्ष-

English

Behold the wisdom of the God; he hath not died, he grows not old. Voices that never were before emitted speak as fitteth them.

अध्याय 10

श्लोक 8.44

अ॒का॒मो धीरो॑ अ॒मृतः॑ स्वयं॒भू रसे॑न तृ॒प्तो न कुत॑श्च॒नोनः॑ ।तमे॒व वि॒द्वान् न बि॑भाय मृ॒त्योरा॒त्मानं॒ धीर॑म॒जरं॒ युवा॑नम्

akāmo dhīro amṛtaḥ svayaṃbhū rasena tṛpto na kutaścanonaḥ | tameva vidvān na bibhāya mṛtyorātmānaṃ dhīramajaraṃ yuvānam

हिन्दी अर्थ

: , किवेशनः संगमनो वसनां देव इव सविता सत्यम । . . कां० १० सुऽ भ्रथववंवेद-भाष्य ३६१ करता दहै, (वसुनाम्) भ्राठ वसुर म (संगमनः) परस्पर संगति या समन्वय करता हैः (देवः) वहं देव (सविता इव) सथं की तरह (सत्यवर्मा) सत्य नियमों का धारण करता है । तथा (नानाम्) षन-सम्बन्धी (समरे) युद्ध है । वह् समय पर उदयास्त होता, यथासमय ऋतु का निर्माण करता, नियमानुसार उत्तरायण तथा दक्षिणायन स्थितियां करता है । परमेश्वर के नियम मी सत्य है, सुदृढ है । तथा वह्, युद्ध मे सेनापति के संदृश जगत् मेँ दृढ़ स्थित है । । ४5 ज्ञानी (विदुः) जानते है । नव द्वारम् =२ भ्राखो के, २ नासिकाके, २ कानों के, १ भूख का, १ लिङ्खं का,१ गुदा का-= हार ।

English

Whither they go and speak, they say there is the mighty Brāh- mana. I ask thee where the waters’ flower by wondrous magic art was placed, Thereon the Gods and men are set as spokes are fastened in the nave.

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।