Yoga Vasishtha
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अध्याय 5 / 6

Upashama Prakarana — The Dissolution of Vasanas & Quieting of the Mind

उपशमप्रकरण

2 श्लोक

पूर्ण अध्याय पाठ2 श्लोक

अध्याय 5

श्लोक 1

वासनैव हि संसारो वासनाक्षयमुक्तिदम् ।तस्माद्वासनया शुद्ध्या संसारविनिवर्तनम्

vāsanaiva hi saṃsāro vāsanākṣayamuktidaṃ | tasmādvāsanayā śuddhyā saṃsāravinivarttanam

हिन्दी अर्थ

वासना ही संसार है। वासनाक्षय ही मुक्ति है। इसलिए वासना की शुद्धि से संसार की निवृत्ति होती है।

English

Vasana alone is samsara. The destruction of vasana is liberation. Therefore, through the purification of vasana comes the cessation of samsara.

अध्याय 5

श्लोक 2

न मनो मानवो हन्तुं शक्यते परमेणपि ।विचारेणैव सुलभं मनसो मरणं स्मृतम्

na mano mānavo hantuṃ śakyate parameṇapi | vicāreṇaiva sulabhaṃ manaso maraṇaṃ smṛtam

हिन्दी अर्थ

कितने भी प्रयास से कोई मनुष्य मन को नहीं मार सकता। केवल विचार (आत्म-विचार) से ही मन की मृत्यु सुलभता से होती है — ऐसा कहा गया है।

English

The mind cannot be killed by a human being, however supreme his effort. By inquiry alone, the death of the mind is easily attained — so it has been said.

स्रोत: https://sanskritdocuments.org/doc_yoga/yogavAsiShTha01.itx · प्राप्त 4/10/2026

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शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।