Yajur Veda
2
अध्याय 2 / 40

Adhyāya 2

अध्याय 2

2 श्लोक

पूर्ण अध्याय पाठ2 श्लोक

अध्याय 2

श्लोक 1

यज्जाग्रतो दूरमुदैति दैवं तदु सुप्तस्य तथैवैति ।दूरङ्गमं ज्योतिषां ज्योतिरेकं तन्मे मनः शिवसंकल्पमस्तु

yajjāgrato dūramuadaiti daivaṃ tadu suptasya tathaivai ti | dūraṃgamaṃ jyotiṣāṃ jyotirekam tanme manaḥ śivasaṃkalpam astu

हिन्दी अर्थ

जो जागने पर दूर जाता है और सोने पर वापस आता है — वह दिव्य, दूर तक जाने वाला, ज्योतियों की ज्योति एक — वह मेरा मन शिवसंकल्पयुक्त हो।

English

That which travels far in the waking state, and returns to the same place in sleep — that divine, far-ranging light of lights, the one — may my mind be of auspicious resolve (shiva-sankalpa).

अध्याय 2

श्लोक 2

यस्मिन् ऋचः साम यजूंषि यस्मिन् प्रतिष्ठिता रथनाभाविवाराः ।यस्मिंश्चित्तं सर्वमोतं प्रजानां तन्मे मनः शिवसंकल्पमस्तु

yasmin ṛcaḥ sāma yajūṃṣi yasmin pratiṣṭhitā rathanābhāvivārāḥ | yasmiṃścittaṃ sarvamotaṃ prajānāṃ tanme manaḥ śivasaṃkalpam astu

हिन्दी अर्थ

जिसमें ऋचाएँ, साम और यजुष् वैसे ही स्थित हैं जैसे रथ के पहिये में आरे — जिसमें सभी प्राणियों का चित्त ओत-प्रोत है — वह मेरा मन शिवसंकल्पयुक्त हो।

English

That in which the Rig, Sama, and Yajur hymns are established like spokes in a wheel's hub — in which the minds of all beings are interwoven — may my mind be of auspicious resolve.

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

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शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।