Vishnu Purana
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अध्याय 3 / 126

Book 1 - Adhyaya 3

पञ्चम अंश — ध्रुव चरित्र

2 श्लोक

पूर्ण अध्याय पाठ2 श्लोक

अध्याय 3

श्लोक 1

स्थिरः प्रशान्तो विमलः प्रसन्नो भविष्यसि त्वं ध्रुव लोकभूतः ।अव्याहतैश्वर्यविभूतिमान् वै सुरादिभिः पूज्यतमो भविष्यसि

sthiraḥ praśānto vimalaḥ prasanno bhaviṣyasi tvaṃ dhruva lokabhūtaḥ | avyāhataiśvaryavibhūtimān vai surādibhiḥ pūjyatamo bhaviṣyasi

हिन्दी अर्थ

हे ध्रुव! तुम स्थिर, प्रशांत, निर्मल और प्रसन्न होकर एक लोकभूत बनोगे। अव्याहत ऐश्वर्य और विभूति से युक्त, देवताओं द्वारा भी सर्वाधिक पूज्य होगे।

English

Steady, peaceful, pure, joyful, you will become a world-being, O Dhruva. With unbroken sovereignty and glory, you will become most worthy of worship even by the gods.

अध्याय 3

श्लोक 2

पृथिव्यां त्रीणि रत्नानि जलमन्नं सुभाषितम् ।मूढैः पाषाणखण्डेषु रत्नसङ्ज्ञा विधीयते

pṛthivyāṃ trīṇi ratnāni jalamannaṃ subhāṣitam | mūḍhaiḥ pāṣāṇakhaṇḍeṣu ratnasaṅjñā vidhīyate

हिन्दी अर्थ

पृथ्वी पर तीन रत्न हैं — जल, अन्न और सुभाषित (सुन्दर वचन)। मूढ लोग पत्थर के टुकड़ों को रत्न कहते हैं।

English

On earth there are three jewels: water, food, and well-spoken words. Fools call pieces of stone by the name of jewels.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_viSNupurANa-crit.txt · प्राप्त 3/6/2026

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शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।