अध्याय 71
श्लोक 1
ऐसेहु साहबकी सेवा सों होत चोरु रे ।आपनी न बूझ, न कहै को राँडरोरु रे
aisehu sāhabakī sevā soṃ hota coru re | āpanī na būjha, na kahai ko rā~ḍaroru re
अध्याय 71
ऐसेहु साहबकी सेवा सों होत चोरु रे ।आपनी न बूझ, न कहै को राँडरोरु रे
aisehu sāhabakī sevā soṃ hota coru re | āpanī na būjha, na kahai ko rā~ḍaroru re
अध्याय 71
मुनि-मन-अगम, सुगम माइ-बापु सों ।कृपासिंधु, सहज सखा, सनेही आपु सों
muni-mana-agama, sugama māi-bāpu soṃ | kṛpāsiṃdhu, sahaja sakhā, sanehī āpu soṃ
अध्याय 71
लोक-बेद-बिदित बड़ो न रघुनाथ सों ।सब दिन सब देस, सबहिके साथ सों
loka-beda-bidita baḍa़o na raghunātha soṃ | saba dina saba desa, sabahike sātha soṃ
अध्याय 71
स्वामी सरबग्य सों चलै न चोरी चारकी ।प्रीति पहिचानि यह रीति दरबारकी
svāmī sarabagya soṃ calai na corī cārakī | prīti pahicāni yaha rīti darabārakī
अध्याय 71
काय न कलेस-लेस लेत मान मनकी ।सुमिरे सकुचि रुचि जोगवत जनकी
kāya na kalesa-lesa leta māna manakī | sumire sakuci ruci jogavata janakī
अध्याय 71
रीझे बस होत, खीझे देत निज धाम रे ।फलत सकल फल कामतरु नाम रे
rījhe basa hota, khījhe deta nija dhāma re | phalata sakala phala kāmataru nāma re
अध्याय 71
बेंचे खोटो दाम न मिलै, न राखै काम रे ।सोऊ तुलसी निवाज्यो ऐसो राजाराम रे
beṃce khoṭo dāma na milai, na rākhai kāma re | soū tulasī nivājyo aiso rājārāma re
पाठ सेटिंग्स · Reading settings
भाषा एवं सामग्री · Language and layers
स्रोत: local proofread transcription: Tulsidas's Vinaya Patrika (279 padas), read from page images of a printed edition and proofread. One chapter per pada, stanza numbers as printed. The editor's Hindi bhavartha is not reproduced. · प्राप्त 19/10/2026
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अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)
मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।
पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)
व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।
आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)
प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।
भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)
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समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)
दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)
पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।
Collated against Kashi Nagari Pracharini Sabha critical edition.