अध्याय 253
श्लोक 1
राम! राखिये सरन, राखि आये सब दिन ।बिदित त्रिलोक तिहुँ काल न दयालु दूजो, आरत-प्रनत-पाल को है प्रभु बिन
rāma! rākhiye sarana, rākhi āye saba dina | bidita triloka tihu~ kāla na dayālu dūjo, ārata-pranata-pāla ko hai prabhu bina
अध्याय 253
राम! राखिये सरन, राखि आये सब दिन ।बिदित त्रिलोक तिहुँ काल न दयालु दूजो, आरत-प्रनत-पाल को है प्रभु बिन
rāma! rākhiye sarana, rākhi āye saba dina | bidita triloka tihu~ kāla na dayālu dūjo, ārata-pranata-pāla ko hai prabhu bina
अध्याय 253
लाले पाले, पोषे तोषे आलसी-अभागी-अघी, नाथ! पै अनाथनिसों भये न उरिन ।स्वामी समरथ ऐसो, हौं तिहारो जैसो-तैसो काल-चाल हेरि होति हिये घनी घिन
lāle pāle, poṣe toṣe ālasī-abhāgī-aghī, nātha! pai anāthanisoṃ bhaye na urina | svāmī samaratha aiso, hauṃ tihāro jaiso-taiso kāla-cāla heri hoti hiye ghanī ghina
अध्याय 253
खीझि-रीझि, बिहँसि-अनख, क्यों हूँ एक बार 'तुलसी तू मेरो', बलि, कहियत किन ।जाहिं सूल निरमूल, होहिं सुख अनुकूल, महाराज राम! रावरी सों, तेहि छिन
khījhi-rījhi, biha~si-anakha, kyoṃ hū~ eka bāra 'tulasī tū mero', bali, kahiyata kina | jāhiṃ sūla niramūla, hohiṃ sukha anukūla, mahārāja rāma! rāvarī soṃ, tehi china
पाठ सेटिंग्स · Reading settings
भाषा एवं सामग्री · Language and layers
स्रोत: local proofread transcription: Tulsidas's Vinaya Patrika (279 padas), read from page images of a printed edition and proofread. One chapter per pada, stanza numbers as printed. The editor's Hindi bhavartha is not reproduced. · प्राप्त 19/10/2026
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धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।
अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)
मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।
पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)
व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।
आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)
प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।
भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)
आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।
समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)
दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)
पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।
Collated against Kashi Nagari Pracharini Sabha critical edition.