अध्याय 237
श्लोक 1
काहे न रसना, रामहि गावहि? ।निसिदिन पर-अपवाद बृथा कत रटि-रटि राग बढ़ावहि
kāhe na rasanā, rāmahi gāvahi? | nisidina para-apavāda bṛthā kata raṭi-raṭi rāga baḍha़āvahi
अध्याय 237
काहे न रसना, रामहि गावहि? ।निसिदिन पर-अपवाद बृथा कत रटि-रटि राग बढ़ावहि
kāhe na rasanā, rāmahi gāvahi? | nisidina para-apavāda bṛthā kata raṭi-raṭi rāga baḍha़āvahi
अध्याय 237
नरमुख सुंदर मंदिर पावन बसि जनि ताहि लजावहि ।ससि समीप रहि त्यागि सुधा कत रबिकर-जल कहँ धावहि
naramukha suṃdara maṃdira pāvana basi jani tāhi lajāvahi | sasi samīpa rahi tyāgi sudhā kata rabikara-jala kaha~ dhāvahi
अध्याय 237
काम-कथा कलि-कैरव-चंदिनि, सुनत श्रवन दै भावहि ।तिनहिं हटकि कहि हरि-कल-कीरति, करन कलंक नसावहि
kāma-kathā kali-kairava-caṃdini, sunata śravana dai bhāvahi | tinahiṃ haṭaki kahi hari-kala-kīrati, karana kalaṃka nasāvahi
अध्याय 237
जातरूप मति, जुगुति रुचिर मनि रचि-रचि हार बनावहि ।सरन-सुखद रबिकुल-सरोज-रबि राम-नृपहि पहिरावहि
jātarūpa mati, juguti rucira mani raci-raci hāra banāvahi | sarana-sukhada rabikula-saroja-rabi rāma-nṛpahi pahirāvahi
अध्याय 237
बाद-बिबाद, स्वाद तजि भजि हरि, सरस चरित चित लावहि ।तुलसिदास भव तरहि, तिहूँ पुर तू पुनीत जस पावहि
bāda-bibāda, svāda taji bhaji hari, sarasa carita cita lāvahi | tulasidāsa bhava tarahi, tihū~ pura tū punīta jasa pāvahi
पाठ सेटिंग्स · Reading settings
भाषा एवं सामग्री · Language and layers
स्रोत: local proofread transcription: Tulsidas's Vinaya Patrika (279 padas), read from page images of a printed edition and proofread. One chapter per pada, stanza numbers as printed. The editor's Hindi bhavartha is not reproduced. · प्राप्त 19/10/2026
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धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।
अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)
मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।
पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)
व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।
आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)
प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।
भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)
आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।
समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)
दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)
पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।
Collated against Kashi Nagari Pracharini Sabha critical edition.