अध्याय 198
श्लोक 1
मन पछितैहै अवसर बीते ।दुरलभ देह पाइ हरिपद भजु, करम, बचन अरु ही ते
mana pachitaihai avasara bīte | duralabha deha pāi haripada bhaju, karama, bacana aru hī te
अध्याय 198
मन पछितैहै अवसर बीते ।दुरलभ देह पाइ हरिपद भजु, करम, बचन अरु ही ते
mana pachitaihai avasara bīte | duralabha deha pāi haripada bhaju, karama, bacana aru hī te
अध्याय 198
सहसबाहु, दसबदन आदि नृप बचे न काल बली ते ।हम-हम करि धन-धाम सँवारे, अंत चले उठि रीते
sahasabāhu, dasabadana ādi nṛpa bace na kāla balī te | hama-hama kari dhana-dhāma sa~vāre, aṃta cale uṭhi rīte
अध्याय 198
सुत-बनितादि जानि स्वारथरत, न करु नेह सबही ते ।अंतहु तोहिं तजैंगे पामर! तू न तजै अबही ते
suta-banitādi jāni svāratharata, na karu neha sabahī te | aṃtahu tohiṃ tajaiṃge pāmara! tū na tajai abahī te
अध्याय 198
अब नाथहिं अनुराग, जागु जड़, त्यागु दुरासा जी ते ।बुझै न काम अगिनि तुलसी कहुँ, बिषय-भोग बहु घी ते
aba nāthahiṃ anurāga, jāgu jaḍa़, tyāgu durāsā jī te | bujhai na kāma agini tulasī kahu~, biṣaya-bhoga bahu ghī te
पाठ सेटिंग्स · Reading settings
भाषा एवं सामग्री · Language and layers
स्रोत: local proofread transcription: Tulsidas's Vinaya Patrika (279 padas), read from page images of a printed edition and proofread. One chapter per pada, stanza numbers as printed. The editor's Hindi bhavartha is not reproduced. · प्राप्त 19/10/2026
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अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)
मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।
पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)
व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।
आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)
प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।
भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)
आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।
समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)
दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)
पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।
Collated against Kashi Nagari Pracharini Sabha critical edition.