अध्याय 164
श्लोक 1
जानत प्रीति-रीति रघुराई ।नाते सब हाते करि राखत, राम सनेह-सगाई
jānata prīti-rīti raghurāī | nāte saba hāte kari rākhata, rāma saneha-sagāī
अध्याय 164
जानत प्रीति-रीति रघुराई ।नाते सब हाते करि राखत, राम सनेह-सगाई
jānata prīti-rīti raghurāī | nāte saba hāte kari rākhata, rāma saneha-sagāī
अध्याय 164
नेह निवाहि देह तजि दसरथ, कीरति अचल चलाई ।ऐसेहु पितु तें अधिक गीधपर ममता गुन गरुआई
neha nivāhi deha taji dasaratha, kīrati acala calāī | aisehu pitu teṃ adhika gīdhapara mamatā guna garuāī
अध्याय 164
तिय-बिरही सुग्रीव सखा लखि प्रानप्रिया बिसराई ।रन पर्यो बंधु बिभीषन ही को, सोच हृदय अधिकाई
tiya-birahī sugrīva sakhā lakhi prānapriyā bisarāī | rana paryo baṃdhu bibhīṣana hī ko, soca hṛdaya adhikāī
अध्याय 164
घर गुरुगृह प्रिय सदन सासुरे, भइ जब जहँ पहुनाई ।तब तहँ कहि सबरीके फलनिकी रुचि माधुरी न पाई
ghara gurugṛha priya sadana sāsure, bhai jaba jaha~ pahunāī | taba taha~ kahi sabarīke phalanikī ruci mādhurī na pāī
अध्याय 164
सहज सरूप कथा मुनि बरनत रहत सकुचि सिर नाई ।केवट मीत कहे सुख मानत बानर बंधु बड़ाई
sahaja sarūpa kathā muni baranata rahata sakuci sira nāī | kevaṭa mīta kahe sukha mānata bānara baṃdhu baḍa़āī
अध्याय 164
प्रेम-कनौड़ो रामसो प्रभु त्रिभुवन तिहुँकाल न भाई ।तेरो रिनी हौं कह्यो कपि सों ऐसी मानिहि को सेवकाई
prema-kanauḍa़o rāmaso prabhu tribhuvana tihu~kāla na bhāī | tero rinī hauṃ kahyo kapi soṃ aisī mānihi ko sevakāī
अध्याय 164
तुलसी राम-सनेह-सील लखि, जो न भगति उर आई ।तौ तोहिं जनमि जाय जननी जड़ तनु-तरुनता गवाँई
tulasī rāma-saneha-sīla lakhi, jo na bhagati ura āī | tau tohiṃ janami jāya jananī jaḍa़ tanu-tarunatā gavā~ī
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भाषा एवं सामग्री · Language and layers
स्रोत: local proofread transcription: Tulsidas's Vinaya Patrika (279 padas), read from page images of a printed edition and proofread. One chapter per pada, stanza numbers as printed. The editor's Hindi bhavartha is not reproduced. · प्राप्त 19/10/2026
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Collated against Kashi Nagari Pracharini Sabha critical edition.