अध्याय 138
श्लोक 1
कबहुँ सो कर-सरोज रघुनायक! धरिहौ नाथ सीस मेरे ।जेहि कर अभय किये जन आरत, बारक बिबस नाम टेरे
kabahu~ so kara-saroja raghunāyaka! dharihau nātha sīsa mere | jehi kara abhaya kiye jana ārata, bāraka bibasa nāma ṭere
अध्याय 138
कबहुँ सो कर-सरोज रघुनायक! धरिहौ नाथ सीस मेरे ।जेहि कर अभय किये जन आरत, बारक बिबस नाम टेरे
kabahu~ so kara-saroja raghunāyaka! dharihau nātha sīsa mere | jehi kara abhaya kiye jana ārata, bāraka bibasa nāma ṭere
अध्याय 138
जेहि कर-कमल कठोर संभुधनु भंजि जनक-संसय मेट्यो ।जेहि कर-कमल उठाइ बंधु ज्यों, परम प्रीति केवट भेंट्यो
jehi kara-kamala kaṭhora saṃbhudhanu bhaṃji janaka-saṃsaya meṭyo | jehi kara-kamala uṭhāi baṃdhu jyoṃ, parama prīti kevaṭa bheṃṭyo
अध्याय 138
जेहि कर-कमल कृपालु गीधकहँ, पिंड देइ निजधाम दियो ।जेहि कर बालि बिदारि दास-हित, कपिकुल-पति सुग्रीव कियो
jehi kara-kamala kṛpālu gīdhakaha~, piṃḍa dei nijadhāma diyo | jehi kara bāli bidāri dāsa-hita, kapikula-pati sugrīva kiyo
अध्याय 138
आयो सरन सभीत बिभीषन जेहि कर-कमल तिलक कीन्हों ।जेहि कर गहि सर चाप असुर हति, अभयदान देवन्ह दीन्हों
āyo sarana sabhīta bibhīṣana jehi kara-kamala tilaka kīnhoṃ | jehi kara gahi sara cāpa asura hati, abhayadāna devanha dīnhoṃ
अध्याय 138
सीतल सुखद छाँह जेहि करकी, मेटति पाप, ताप, माया ।निसि-बासर तेहि कर सरोजकी, चाहत तुलसिदास छाया
sītala sukhada chā~ha jehi karakī, meṭati pāpa, tāpa, māyā | nisi-bāsara tehi kara sarojakī, cāhata tulasidāsa chāyā
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भाषा एवं सामग्री · Language and layers
स्रोत: local proofread transcription: Tulsidas's Vinaya Patrika (279 padas), read from page images of a printed edition and proofread. One chapter per pada, stanza numbers as printed. The editor's Hindi bhavartha is not reproduced. · प्राप्त 19/10/2026
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अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)
मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।
पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)
व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।
आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)
प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।
भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)
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समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)
दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)
पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।
Collated against Kashi Nagari Pracharini Sabha critical edition.