अध्याय 130
श्लोक 1
राम राम, राम राम, राम राम, जपत ।मंगल-मुद उदित होत, कलि-मल-छल छपत
rāma rāma, rāma rāma, rāma rāma, japata | maṃgala-muda udita hota, kali-mala-chala chapata
अध्याय 130
राम राम, राम राम, राम राम, जपत ।मंगल-मुद उदित होत, कलि-मल-छल छपत
rāma rāma, rāma rāma, rāma rāma, japata | maṃgala-muda udita hota, kali-mala-chala chapata
अध्याय 130
कहु के लहे फल रसाल, बबुर बीज बपत ।हारहि जनि जनम जाय गाल गूल गपत
kahu ke lahe phala rasāla, babura bīja bapata | hārahi jani janama jāya gāla gūla gapata
अध्याय 130
काल, करम, गुन, सुभाउ सबके सीस तपत ।राम-नाम-महिमाकी चरचा चले चपत
kāla, karama, guna, subhāu sabake sīsa tapata | rāma-nāma-mahimākī caracā cale capata
अध्याय 130
साधन बिनु सिद्धि सकल बिकल लोग लपत ।कलिजुग बर बनिज बिपुल नाम-नगर खपत
sādhana binu siddhi sakala bikala loga lapata | kalijuga bara banija bipula nāma-nagara khapata
अध्याय 130
नाम सों प्रतीति-प्रीति हृदय सुथिर थपत ।पावन किये रावन-रिपु तुलसिहु-से अपत
nāma soṃ pratīti-prīti hṛdaya suthira thapata | pāvana kiye rāvana-ripu tulasihu-se apata
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भाषा एवं सामग्री · Language and layers
स्रोत: local proofread transcription: Tulsidas's Vinaya Patrika (279 padas), read from page images of a printed edition and proofread. One chapter per pada, stanza numbers as printed. The editor's Hindi bhavartha is not reproduced. · प्राप्त 19/10/2026
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धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।
अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)
मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।
पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)
व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।
आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)
प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।
भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)
आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।
समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)
दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)
पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।
Collated against Kashi Nagari Pracharini Sabha critical edition.