अध्याय 122
श्लोक 1
मैं हरि, साधन करइ न जानी ।जस आमय भेषज न कीन्ह तस, दोष कहा दिरमानी
maiṃ hari, sādhana karai na jānī | jasa āmaya bheṣaja na kīnha tasa, doṣa kahā diramānī
अध्याय 122
मैं हरि, साधन करइ न जानी ।जस आमय भेषज न कीन्ह तस, दोष कहा दिरमानी
maiṃ hari, sādhana karai na jānī | jasa āmaya bheṣaja na kīnha tasa, doṣa kahā diramānī
अध्याय 122
सपने नृप कहँ घटै बिप्र-बध, बिकल फिरै अघ लागे ।बाजिमेध सत कोटि करै नहिं सुद्ध होइ बिनु जागे
sapane nṛpa kaha~ ghaṭai bipra-badha, bikala phirai agha lāge | bājimedha sata koṭi karai nahiṃ suddha hoi binu jāge
अध्याय 122
मृग महँ सर्प बिपुल भयदायक, प्रगट होइ अबिचारे ।बहु आयुध धरि, बल अनेक करि हारहिं, मरइ न मारे
mṛga maha~ sarpa bipula bhayadāyaka, pragaṭa hoi abicāre | bahu āyudha dhari, bala aneka kari hārahiṃ, marai na māre
अध्याय 122
निज भ्रम ते रबिकर-सम्भव सागर अति भय उपजावै ।अवगाहत बोहित नौका चढ़ि कबहूँ पार न पावै
nija bhrama te rabikara-sambhava sāgara ati bhaya upajāvai | avagāhata bohita naukā caḍha़i kabahū~ pāra na pāvai
अध्याय 122
तुलसिदास जग आपु सहित जब लगि निरमूल न जाई ।तब लगि कोटि कलप उपाय करि मरिय, तरिय नहिं भाई
tulasidāsa jaga āpu sahita jaba lagi niramūla na jāī | taba lagi koṭi kalapa upāya kari mariya, tariya nahiṃ bhāī
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भाषा एवं सामग्री · Language and layers
स्रोत: local proofread transcription: Tulsidas's Vinaya Patrika (279 padas), read from page images of a printed edition and proofread. One chapter per pada, stanza numbers as printed. The editor's Hindi bhavartha is not reproduced. · प्राप्त 19/10/2026
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आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)
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Collated against Kashi Nagari Pracharini Sabha critical edition.