अध्याय 118
श्लोक 1
हे हरि! कवन जतन सुख मानहु ।ज्यों गज-दसन तथा मम करनी, सब प्रकार तुम जानहु
he hari! kavana jatana sukha mānahu | jyoṃ gaja-dasana tathā mama karanī, saba prakāra tuma jānahu
अध्याय 118
हे हरि! कवन जतन सुख मानहु ।ज्यों गज-दसन तथा मम करनी, सब प्रकार तुम जानहु
he hari! kavana jatana sukha mānahu | jyoṃ gaja-dasana tathā mama karanī, saba prakāra tuma jānahu
अध्याय 118
जो कछु कहिय करिय भवसागर तरिय बच्छपद जैसे ।रहनि आन बिधि, कहिय आन, हरिपद-सुख पाइय कैसे
jo kachu kahiya kariya bhavasāgara tariya bacchapada jaise | rahani āna bidhi, kahiya āna, haripada-sukha pāiya kaise
अध्याय 118
देखत चारु मयूर बयन सुभ बोलि सुधा इव सानी ।सबिष उरग-आहार, निठुर अस, यह करनी वह बानी
dekhata cāru mayūra bayana subha boli sudhā iva sānī | sabiṣa uraga-āhāra, niṭhura asa, yaha karanī vaha bānī
अध्याय 118
अखिल-जीव-बत्सल, निरमत्सर, चरन-कमल-अनुरागी ।ते तव प्रिय रघुबीर धीरमति, अतिसय निज-पर-त्यागी
akhila-jīva-batsala, niramatsara, carana-kamala-anurāgī | te tava priya raghubīra dhīramati, atisaya nija-para-tyāgī
अध्याय 118
जद्यपि मम औगुन अपार संसार-जोग्य रघुराया ।तुलसिदास निज गुन बिचारि करुनानिधान करु दाया
jadyapi mama auguna apāra saṃsāra-jogya raghurāyā | tulasidāsa nija guna bicāri karunānidhāna karu dāyā
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भाषा एवं सामग्री · Language and layers
स्रोत: local proofread transcription: Tulsidas's Vinaya Patrika (279 padas), read from page images of a printed edition and proofread. One chapter per pada, stanza numbers as printed. The editor's Hindi bhavartha is not reproduced. · प्राप्त 19/10/2026
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आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)
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Collated against Kashi Nagari Pracharini Sabha critical edition.