Vinaya Patrika
103
अध्याय 103 / 279

पद १०३

4 श्लोक

पूर्ण अध्याय पाठ4 श्लोक

अध्याय 103

श्लोक 1

यह बिनती रघुबीर गुसाईं ।और आस-बिस्वास-भरोसो, हरो जीव-जड़ताई

yaha binatī raghubīra gusāīṃ | aura āsa-bisvāsa-bharoso, haro jīva-jaḍa़tāī

अध्याय 103

श्लोक 2

चहौं न सुगति, सुमति, संपति कछु, रिधि-सिधि बिपुल बड़ाई ।हेतु-रहित अनुराग राम-पद बढ़ै अनुदिन अधिकाई

cahauṃ na sugati, sumati, saṃpati kachu, ridhi-sidhi bipula baḍa़āī | hetu-rahita anurāga rāma-pada baḍha़ai anudina adhikāī

अध्याय 103

श्लोक 3

कुटिल करम लै जाहिं मोहि जहँ जहँ अपनी बरिआई ।तहँ तहँ जनि छिन छोह छाँड़ियो, कमठ-अंडकी नाईं

kuṭila karama lai jāhiṃ mohi jaha~ jaha~ apanī bariāī | taha~ taha~ jani china choha chā~ḍa़iyo, kamaṭha-aṃḍakī nāīṃ

अध्याय 103

श्लोक 4

या जगमें जहँ लगि या तनुकी प्रीति प्रतीति सगाई ।ते सब तुलसिदास प्रभु ही सों होहिं सिमिटि इक ठाईं

yā jagameṃ jaha~ lagi yā tanukī prīti pratīti sagāī | te saba tulasidāsa prabhu hī soṃ hohiṃ simiṭi ika ṭhāīṃ

स्रोत: local proofread transcription: Tulsidas's Vinaya Patrika (279 padas), read from page images of a printed edition and proofread. One chapter per pada, stanza numbers as printed. The editor's Hindi bhavartha is not reproduced. · प्राप्त 19/10/2026

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शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पाठ-भेद एवं संशोधनVariants & corrections

पाठ-भेद टिप्पणी (Alternative Reading / Variant Notes):

Collated against Kashi Nagari Pracharini Sabha critical edition.