Ravana Samhita
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अध्याय 4 / 19

Jyotisha — The Ravana Samhita's Astrology

ज्योतिष

3 श्लोक

पूर्ण अध्याय पाठ3 श्लोक

अध्याय 4

श्लोक 1

काले कर्म समारभेत् काले कर्म विसर्जयेत् ।काले सुप्तो नरः सार्थः काले जाग्रति बुद्धिमान्

kāle karma samārambhet kāle karma visarjayet | kāle supto naraḥ sārthaḥ kāle jāgrati buddhimān

हिन्दी अर्थ

सही समय पर कर्म आरम्भ करो; सही समय पर कर्म छोड़ो। समय पर सोने वाला व्यक्ति सार्थक है; समय पर जागने वाला बुद्धिमान।

English

Undertake action at the right time; relinquish action at the right time. The person who sleeps in season is purposeful; the wise one awakens in season.

अध्याय 4

श्लोक 14

नक्षत्रताराग्रहसंयोगे यो जन्म लभते नरः ।तद्वशाद्भवति प्राणी न स्वतन्त्रः कदाचन

nakṣatratārāgrahasaṃyoge yo janma labhate naraḥ | tadvśādbhavati prāṇī na svatantraḥ kadācana

हिन्दी अर्थ

जो व्यक्ति नक्षत्र, तारा और ग्रह के योग में जन्म लेता है — उसके वश में ही जीता है। कोई भी प्राणी कभी पूर्णतः स्वतन्त्र नहीं।

English

The person who takes birth at the conjunction of stars, constellations, and planets — lives under that influence. No being is ever fully independent.

अध्याय 4

श्लोक 20

ज्योतिषं वेदवेदाङ्गं कालविद्यां प्रचक्षते ।कालज्ञो ज्ञानवान् प्राहुः कालो हि दुरतिक्रमः

jyotiṣaṃ vedavedāṅgaṃ kālavidyāṃ pracakṣate | kālajño jñānavān prāhuḥ kālo hi duratikramaḥ

हिन्दी अर्थ

ज्योतिष को वेदांग, काल-विद्या कहा गया है। काल को जानने वाले को ज्ञानी कहते हैं, क्योंकि काल वास्तव में दुर्लंघनीय है।

English

Jyotisha is declared a limb of the Vedas, the science of time. The knower of time is called wise, for time is truly insurmountable.

स्रोत: https://sanskritdocuments.org/ · प्राप्त 3/6/2026

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शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।