Ravana Samhita
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अध्याय 1 / 19

Ravana as Devotee — The Paradox of the Learned Sinner

रावण-भक्ति — विद्वान पापी का विरोधाभास

2 श्लोक

पूर्ण अध्याय पाठ2 श्लोक

अध्याय 1

श्लोक 1

शिवमेकं शरण्यं च सर्वज्ञं सर्वकारणम् ।रावणः प्रणिपत्याह शिवस्तोत्रमनुत्तमम्

śivamEkaṃ śaraṇyaṃ ca sarvajñaṃ sarvakāraṇam | rāvaṇaḥ praṇipatyāha śivastotramAnuttamam

हिन्दी अर्थ

शिव को ही एकमात्र शरण, सर्वज्ञ, सर्वकारण मानकर — रावण ने प्रणाम करके शिव का सर्वोत्तम स्तोत्र कहा।

English

Shiva alone — the refuge, the all-knowing, the cause of all. Ravana, having bowed completely, spoke the supreme hymn to Shiva.

अध्याय 1

श्लोक 7

विद्या ददाति विनयं विनयाद्याति पात्रताम् ।पात्रत्वाद्धनमाप्नोति धनाद्धर्मं ततः सुखम्

vidyā dadāti vinayaṃ vinayādyāti pātratām | pātrat vāddhAnamāpnoti dhanāddhArmaṃ tataḥ sukham

हिन्दी अर्थ

विद्या विनय देती है; विनय से पात्रता; पात्रता से धन; धन से धर्म; और धर्म से सुख।

English

Knowledge gives humility; from humility comes worthiness; from worthiness, wealth; from wealth, dharma; from that, happiness.

स्रोत: https://sanskritdocuments.org/ · प्राप्त 3/6/2026

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शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।