Narasimha Purana
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अध्याय 3 / 68

Adhyaya 3

नृसिंह कवचम्

6 श्लोक

पूर्ण अध्याय पाठ6 श्लोक

अध्याय 3

श्लोक 1

नृसिंहः पूर्वतो मां पायात् वायव्यां नरकेसरी ।प्रतीच्यां पातु वाराहो याम्यां पातु जनार्दनः

nṛsiṃhaḥ pūrvato māṃ pāyāt vāyavyāṃ narakesarī | pratīcyāṃ pātu vārāho yāmyāṃ pātu janārdanaḥ

हिन्दी अर्थ

पूर्व दिशा में नृसिंह मेरी रक्षा करें; वायव्य में नरकेसरी; पश्चिम में वाराह; दक्षिण में जनार्दन।

English

May Narasimha protect me from the East; in the Northwest, the man-lion; in the West, Varaha; in the South, Janardana.

अध्याय 3

श्लोक 2

सर्वतः पाणिपादं तत्सर्वतोऽक्षिशिरोमुखम् ।सर्वतः श्रुतिमल्लोके सर्वमावृत्य तिष्ठति

sarvataḥ pāṇipādaṃ tatsarvato'kṣiśiromukham | sarvataḥ śrutiMalloke sarvamāvṛtya tiṣṭhati

हिन्दी अर्थ

सब ओर हाथ-पैर वाला, सब ओर आँख-सिर-मुख वाला, सब ओर कान वाला — वह सब कुछ आवृत्त करके स्थित है।

English

With hands and feet everywhere, eyes, heads and faces everywhere, with ears everywhere in the world — it stands pervading everything.

अध्याय 3

श्लोक 5

प्रह्लादं पुरतः कृत्वा क्रोधाविष्टः सुतं ततः ।उवाच रुषितो राजा हिरण्यकशिपुः स्वयम्

prahlādaṃ purataḥ kṛtvā krodhāviṣṭaḥ sutaṃ tataḥ | uvāca ruṣito rājā hiraṇyakaśipuḥ svayam

हिन्दी अर्थ

प्रह्लाद को अपने सामने खड़ा करके, क्रोध से भरे हुए, क्रुद्ध राजा हिरण्यकशिपु स्वयं अपने पुत्र से बोला।

English

Placing Prahlada before him, filled with anger, the enraged king Hiranyakashipu himself spoke to his son.

अध्याय 3

श्लोक 8

उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम् ।नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्युमृत्युं नमाम्यहम्

ugraṃ vīraṃ mahāviṣṇuṃ jvalantaṃ sarvatomukham | nṛsiṃhaṃ bhīṣaṇaṃ bhadraṃ mṛtyumṛtyuṃ namāmyaham

हिन्दी अर्थ

उग्र, वीर, महाविष्णु — ज्वलन्त, सर्वतोमुख — नृसिंह, भीषण, भद्र, मृत्यु के मृत्यु — मैं नमस्कार करता हूँ।

English

Fierce, heroic, the great Vishnu — blazing, facing all directions — Narasimha, terrifying, auspicious, the death of death — I bow to Him.

अध्याय 3

श्लोक 12

नैतदद्भुतमेव त्वं हिरण्यकशिपोः सुत ।प्रह्लादात्तव किं क्षुद्रं पापं वा साधु वा कृतम्

naitadadbhutameva tvaṃ hiraṇyakaśipoḥ suta | prahlādātta kiṃ kṣudraṃ pāpaṃ vā sādhu vā kṛtam

हिन्दी अर्थ

हे हिरण्यकशिपु के पुत्र! तुममें यह कुछ भी आश्चर्यजनक नहीं है। क्योंकि प्रह्लाद द्वारा कौन-सा छोटा पाप या साधु कार्य नहीं किया जाता?

English

This is not at all surprising in you, O son of Hiranyakashipu. For what small sin or good deed is not done by Prahlada?

अध्याय 3

श्लोक 22

यं दृष्ट्वा न भयं तस्य यं श्रुत्वा च न संशयः ।यं ज्ञात्वा सर्वदुःखानि नश्यन्ते स नृकेसरी

yaṃ dṛṣṭvā na bhayaṃ tasya yaṃ śrutvā ca na saṃśayaḥ | yaṃ jñātvā sarvadhuḥkhāni naśyante sa nṛkesarī

हिन्दी अर्थ

जिसे देखकर भय नहीं रहता; जिसे सुनकर सन्देह नहीं रहता; जिसे जानकर सभी दुख नष्ट होते हैं — वही नृकेसरी हैं।

English

One who sees Him has no fear; one who hears Him has no doubt; one who knows Him — all sorrows perish. He is Narasimha.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_narasiMhapurANa.txt · प्राप्त 3/6/2026

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शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।