Narada Purana
158
अध्याय 158 / 167

Book 2 - Adhyaya 34

26 श्लोक

पूर्ण अध्याय पाठ26 श्लोक

अध्याय 158

श्लोक 1

इति श्रीबृहन्नारदीयपुराणोत्तरभागे मोहिनीचरिते धर्माङ्गदोक्तिर्नाम त्रयस्त्रिंशो ऽध्यायः वसिष्ठ उवाच तत्पुत्रवचनं श्रुत्वा राजा रुक्माङ्गदस्तदा ।संध्यावलीमुखं प्रेक्ष्य प्रहृष्टकमलोपमम्

iti śrībṛhannāradīyapurāṇottarabhāge mohinīcarite dharmāṅgadoktirnāma trayastriṃśo 'dhyāyaḥ vasiṣṭha uvāca tatputravacanaṃ śrutvā rājā rukmāṅgadastadā / saṃdhyāvalīmukhaṃ prekṣya prahṛṣṭakamalopamam

हिन्दी अर्थ

मुद्राएं बाँधकर दिखावे। तदनन्तर मन्त्रवेत्ता पुरुष 3७ नमो नारायणाय' इस मूलमन्त्रका एक सौ करे। किसी कामनाके लिये जप करना हो तो और शार्ड्रधघनुष--ये आठ मुद्राएँ बतायी गयी हैं।

English

O king (Mandhata), the large drums called Dundu- bhis were sounded by the delighted Siddhas, and the guardians of the divine world. The celestial ladies sang sweet songs and danced joyously.

अध्याय 158

श्लोक 2

मोहिनीवचनं शृण्वन्भुङ्क्ष्व मा हन देहजम् ।मा भुङ्क्ष्व तनयं हिंस चेत्याग्रहसमन्वितम्

mohinīvacanaṃ śṛṇvanbhuṅkṣva mā hana dehajam / mā bhuṅkṣva tanayaṃ hiṃsa cetyāgrahasamanvitam

हिन्दी अर्थ

उसके लिये शास्त्रोंमें जितना बताया गया हो

English

Hearing Mohini's words, "Eat, do not kill your offspring; do not eat; kill your son," (the king) held fast in insistence.

अध्याय 158

श्लोक 3

एतस्मिन्नेव काले तु भगवान्कमलेक्षणः ।अन्तर्द्धानगतस्तस्थौ व्योम्नि धैर्यावलोककः

etasminneva kāle tu bhagavānkamalekṣaṇaḥ / antarddhānagatastasthau vyomni dhairyāvalokakaḥ

हिन्दी अर्थ

शुभे! जो लोग शास्त्रोक्त मन्त्रोंद्वारा श्रीहरिकी उतनी संख्यामें जप करे अथवा निष्कामभावसे पूजाका विधान न जानते हों वे “35 नमो जितना हो सके उतना एकाग्र चित्तसे जप करे। नारायणाय” इस मूलमन्त्रसे ही सदा भगवान् पद्म, शह्ढु, श्रीवत्स, गदा, गरुड़, चक्र, खड्ग अच्युतका पूजन करें।

English

At that very time the Lord, lotus-eyed, hidden, stayed in the sky, watching the firmness,

अध्याय 158

श्लोक 4

त्रयाणां नृपशार्दूल मेघश्यामो निरञ्जनः ।धर्माङ्गदस्य वीरस्य तस्य रुक्माङ्गदस्य तु

trayāṇāṃ nṛpaśārdūla meghaśyāmo nirañjanaḥ / dharmāṅgadasya vīrasya tasya rukmāṅgadasya tu

हिन्दी अर्थ

समुद्र-सन्नानकी महिमा और श्रीकृष्ण-बलराम आदिके दर्शन आदिकी महिमा तथा श्रीकृष्णसे जगत्-सृष्टिका कथन एवं श्रीराधाकृष्णके उत्कृष्ट स्वरूपका प्रतिपादन

English

of the three, O tiger among kings: cloud-dark, stainless, of the hero Dharmangada and of Rukmangada,

अध्याय 158

श्लोक 5

संध्यावल्या समेतस्य वीशसंस्थो जनार्दनः ।वचने भुङ्क्ष्व भुङ्क्ष्वेति मोहिन्या व्याहृते तदा

saṃdhyāvalyā sametasya vīśasaṃstho janārdanaḥ / vacane bhuṅkṣva bhuṅkṣveti mohinyā vyāhṛte tadā

हिन्दी अर्थ

पुरोहित वसु कहते हैं--मोहिनी ! इस प्रकार भक्तिपूर्वक भगवान् पुरुषोत्तमकी विधिवत् पूजा करके उनके चरणोंमें मस्तक झुकाये। फिर समुद्रसे प्रार्थना करे-- 'सरिताओंके स्वामी तीर्थरज! आप सम्पूर्ण भूतोंके प्राण और योनि हैं। आपको नमस्कार है। अच्युतप्रिय ! मेरी रक्षा कीजिये।' इस प्रकार उस उत्तम क्षेत्र समुद्रमें भलीभाँति

English

together with Sandhyavali. Janardana, in the sky, when Mohini had said "eat, eat",

अध्याय 158

श्लोक 6

जग्राह विमलं खङ्गं हन्तुं धर्माङ्गदं सुतम् ।सुप्रहर्षेण मनसा प्रणम्य गरुडध्वजम् ।तं दृष्ट्वा खङ्गहस्तं तु पितरं धर्म्मंभूषणः

jagrāha vimalaṃ khaṅgaṃ hantuṃ dharmāṅgadaṃ sutam / supraharṣeṇa manasā praṇamya garuḍadhvajam / taṃ dṛṣṭvā khaṅgahastaṃ tu pitaraṃ dharmmaṃbhūṣaṇaḥ

हिन्दी अर्थ

स्नान करके तटपर अविनाशी भगवान् नारायणकौ विधिपूर्वक पूजा करे। तदनन्तर समुद्रको प्रणाम करके बलराम, श्रीकृष्ण और सुभद्राके चरणोंमें मस्तक झुकाना चाहिए। ऐसा करनेवाला मानव

English

the king took the spotless sword to kill his son Dharmangada. Dharmangada, ornament of dharma, with a very glad mind, bowed to the Garuda-bannered Lord, and seeing his father with sword in hand,

अध्याय 158

श्लोक 7

प्रणम्य मातापितरौ देवं चक्रधरं तथा ।वदनं प्रेक्ष्य चादीनं जनन्या नृपपुङ्गवः

praṇamya mātāpitarau devaṃ cakradharaṃ tathā / vadanaṃ prekṣya cādīnaṃ jananyā nṛpapuṅgavaḥ

हिन्दी अर्थ

सौ अश्वमेध यज्ञोंका फल पाता है और सब पापोंसे मुक्त हो सब प्रकारके दुःखोंसे छुटकारा पा जाता है। अन्तमें सूर्यके समान तेजस्वी विमानपर बैठकर श्रीविष्णुलोकमें जाता है। ग्रहण, कार्तिक और माघको पूर्णिमा तथा अन्य शुभ तिथियोंमें जो उत्तम बुद्धिवाले पुरुष वहाँ ब्राह्मणोंको दान देते हैं, वे अन्य तीर्थोंकी अपेक्षा

English

bowing to mother and father and to the discus-bearing God, the best of kings, looking at his mother's piteous face,

अध्याय 158

श्लोक 8

वृषाङ्गदेन तु तदा स्वग्रीवोर्वीतले कृता ।कंबुग्रीवां समानां तु सुवर्णा सुकोमलाम्

vṛṣāṅgadena tu tadā svagrīvorvītale kṛtā / kaṃbugrīvāṃ samānāṃ tu suvarṇā sukomalām

हिन्दी अर्थ

हजार गुना फल पाते हैं, जो लोग वहाँ विधिपूर्वक पितरोंको पिण्डदान देते हैं, उनके पितर अक्षय तृप्ति-लाभ करते हैं।

English

Dharmangada then placed his neck on the ground, a conch-like neck, even, golden, very soft,

अध्याय 158

श्लोक 9

बहुरेखमथ स्थूलां खङ्गमार्गे ज्यदर्शयत् ।पितृभक्त्या युतेनैव मातृभक्त्याधिकेन वै

bahurekhamatha sthūlāṃ khaṅgamārge jyadarśayat / pitṛbhaktyā yutenaiva mātṛbhaktyādhikena vai

हिन्दी अर्थ

देवि! इस प्रकार मैंने समुद्रमें स्नान, दान एवं पिण्डदान करनेका फल बतलाया। यह धर्म, अर्थ एवं मोक्षरूप फल देनेवाला, आयु, कीर्ति तथा यशको बढ़ानेवाला, मनुष्योंको भोग और मोक्ष देनेवाला तथा उनके बुरे स्वप्रोंका नाश करनेवाला धन्य साधन है। यह सब पापोंको दूर करनेवाला, पवित्र तथा इच्छानुसार सब फलोंको देनेवाला है। इस पृथ्वीपर जितने तीर्थ, नदियाँ और सरोवर हैं,

English

with many lines, thick, and showed it in the path of the sword, out of devotion to his father and still more to his mother.

अध्याय 158

श्लोक 10

ग्रीवाप्रदाने तनयस्य भूप हर्षाकुले चारुसुधांशुवक्त्रे ।गृहीतखङ्गे जगदीशनाथे चचाल पृथ्वीं सनगा समग्रा

grīvāpradāne tanayasya bhūpa harṣākule cārusudhāṃśuvaktre / gṛhītakhaṅge jagadīśanāthe cacāla pṛthvīṃ sanagā samagrā

हिन्दी अर्थ

वे सब समुद्रमें प्रवेश करते हैं, इसलिये वह सबसे श्रेष्ठ है। सरिताओंका स्वामी समुद्र सब तीर्थोंका राजा है, अत: वह सभी तीथथोसे श्रेष्ठ है। जैसे सूर्योदय होनेपर अन्धकारका नाश हो जाता

English

As the king was giving up his son's neck, filled with the joy of the moon-faced Mohini, with the sword in hand, the Lord of the world, the whole earth with mountains trembled.

अध्याय 158

श्लोक 11

सिंधुः प्रवृद्धश्च बभूव सद्यो निमज्ज नार्थं भुवनत्रयस्य ।निपेतुरुल्काः शतशो धरायां निर्घातयुक्ताः सतडित्खमध्यात्

siṃdhuḥ pravṛddhaśca babhūva sadyo nimajja nārthaṃ bhuvanatrayasya / nipeturulkāḥ śataśo dharāyāṃ nirghātayuktāḥ sataḍitkhamadhyāt

हिन्दी अर्थ

है उसी प्रकार तीर्थराज समुद्रमें स्नान करनेपर सब पापोंका क्षय हो जाता है। जहाँ निन्यानब्रे करोड़ तीर्थ रहते हैं उस तीर्थराजके गुणोंका वर्णन कौन कर सकता है। अतः वहाँ स्नान, दान, होम, जप तथा देवपूजन आदि जो कुछ सत्कर्म किया जाता है, वह अक्षय बताया गया है।

English

The ocean swelled at once, to drown the three worlds. Hundreds of meteors fell on earth with thunderclaps and lightning from the sky.

अध्याय 158

श्लोक 12

विवर्णरूपा च बभूव मोहिनी न देवकार्यं हि कृतं मयेति ।निरर्थकं जन्म ममाधुनाभूत्कृतं तु दैवेन दजगद्विधायिना

vivarṇarūpā ca babhūva mohinī na devakāryaṃ hi kṛtaṃ mayeti / nirarthakaṃ janma mamādhunābhūtkṛtaṃ tu daivena dajagadvidhāyinā

हिन्दी अर्थ

मोहिनीने पूछा--गुरुदेव ! पुराणोंमें राधामाधवका वर्णन रहस्यरूप है। सुब्रत! आप सब कुछ यथार्थरूपसे जानते हैं; अत: उसे बताइये।

English

Mohini became pale: "I have not done the gods' work. My birth is now fruitless, made so by Fate, maker of the world.

अध्याय 158

श्लोक 13

विमोहनं रूपमिदं विडंबनं यद्भूमिपालेन न भुक्तमन्नम् ।हरेर्दिने पापभयापहे तु तृणैः समाहं भविता त्रिविष्टपे

vimohanaṃ rūpamidaṃ viḍaṃbanaṃ yadbhūmipālena na bhuktamannam / harerdine pāpabhayāpahe tu tṛṇaiḥ samāhaṃ bhavitā triviṣṭape

हिन्दी अर्थ

वसिष्ठजी कहते हैं--राजन्! मोहिनीका यह वचन सुनकर महात्मा वसु जो भगवान् गोविन्दके अत्यन्त भक्त थे, उनके चिन्तनमें निमग्र हो गये। उनके सम्पूर्ण अड़ोंमें रोमा्न हो आया। हृदयमें हर्षकी बाढ़-सी आ गयी; अतः वे द्विजश्रेष्ठ मुग्ध होकर मोहिनीसे प्रसन्नतापूर्वक बोले।

English

This bewildering form of mine is a mockery, for the king has not eaten on Hari's day, which removes fear of sin; I shall be equal to straws in heaven.

अध्याय 158

श्लोक 14

सत्वाधिको यास्यति मोक्षमार्गं गन्तास्मि पाप नरकं सुदारुणम्

satvādhiko yāsyati mokṣamārgaṃ gantāsmi pāpa narakaṃ sudāruṇam

हिन्दी अर्थ

पुरोहित वसुने कहा--देवि! भगवान् श्रीकृष्णका चरित्र परम गोपनीय तथा रहस्योंमें भी अत्यन्त रहस्यभूत है। मैं बताता हूँ, सुनो। जो प्रकृति और पुरुषके भी नियन्ता, विधाताके भी

English

He of great strength will go the path of liberation; I, sinful, shall go to dreadful hell."

अध्याय 158

श्लोक 15

समुद्यते तदा खङ्गे नृपेण नृपपुङ्गव ।मोहिनी मोहसंयुक्ता पपात धरणीतले

samudyate tadā khaṅge nṛpeṇa nṛpapuṅgava / mohinī mohasaṃyuktā papāta dharaṇītale

हिन्दी अर्थ

विधाता और संहारकारी कालके भी संहारक हैं उन भगवान् श्रीकृष्णको मैं नमस्कार करता हूँ। देवि! ब्रह्म श्रीकृष्णस्वरूप है। सब अवतार उसीके हैं। स्वयं भगवान् श्रीकृष्ण ही अवतारी हैं। वे स्वयं ही सगुण भी हैं और निर्गुण भी। वस्तुत: वे ही श्रीराम हैं और वे ही श्रीकृष्ण। सम्पूर्ण लोक प्राकृत गुणोंसे उत्पन्न हुए हैं। स्वयं

English

As the king raised the sword, O tiger among kings, Mohini, overcome by delusion, fell on the ground.

अध्याय 158

श्लोक 16

राजापि तेन खङ्गेन भ्राजमानः समुद्यतः ।ग्रीवायाश्छेदनार्थाय वृषाङ्गदसुतस्य तु

rājāpi tena khaṅgena bhrājamānaḥ samudyataḥ / grīvāyāśchedanārthāya vṛṣāṅgadasutasya tu

हिन्दी अर्थ

गोलोकधाम निर्गुण है। भद्रे। गोलोकमें जो 'गो' शब्द है, उसका अर्थ है तेज अथवा किरण। वेदवेत्ता पुरुषोंने ऐसा ही निरूपण किया है।

English

The king too, shining with that sword, was ready to cut the neck of Vrishangada's... Dharmangada, his son.

अध्याय 158

श्लोक 17

सकुण्डलं चारु शशिप्रकाशं भ्राजिष्णु वक्त्रं तनयस्य भूपः ।प्रचिच्छिदे यावदतीव हर्षाद्धैर्यान्वितो रुक्मविभूषणो ऽसौ

sakuṇḍalaṃ cāru śaśiprakāśaṃ bhrājiṣṇu vaktraṃ tanayasya bhūpaḥ / pracicchide yāvadatīva harṣāddhairyānvito rukmavibhūṣaṇo 'sau

हिन्दी अर्थ

देवि! वह तेजोमय ब्रह्म सदा निर्गुण है। गुणोंका उत्पादक भी वही माना गया है। प्रकृति उस परमात्माकी शक्ति मानी गयी है। प्रधान प्रकृतिको कार्यकारणरूप बताया गया है। पुरुषको साक्षी, सनातन एवं निर्गुण कहते हैं। पुरुषने प्रकृतिमें तेजका आधान किया। इससे सत्त्व आदि गुण उत्पन्न हुए। उन गुणोंसे महत्तत्त्वका प्रादुर्भाव हुआ। पुरुषके संकल्पसे वह महत्तत्त्व अहंकाररूपमें

English

The king, steady and gold-ornamented, with great joy cut off his son's face with its earrings, lovely, moon-bright, shining —

अध्याय 158

श्लोक 18

तावद्गृहीतः स्वकरेण भूपः क्षीराब्धिकन्यापतिना महीपः ।तुष्टो ऽस्मि तुष्टो ऽस्मि न संशयो ऽत्र गच्छस्व लोकं मम लोकनाथ

tāvadgṛhītaḥ svakareṇa bhūpaḥ kṣīrābdhikanyāpatinā mahīpaḥ / tuṣṭo 'smi tuṣṭo 'smi na saṃśayo 'tra gacchasva lokaṃ mama lokanātha

हिन्दी अर्थ

प्रकट हुआ। भद्रे। वह अहंकार द्रव्य, ज्ञान और क्रियारूपसे तथा वैकारिक, तैजस और तामसरूपसे तीन प्रकारका है। वैकारिक अहंकारसे मन तथा दस बैकारिक देवता प्रकट हुए, जिनके नाम इस

English

just then, the king was seized by the hand by the Lord, husband of the daughter of the Milk Ocean: "I am pleased, I am pleased, without doubt; go to my world, Lord of the world,

अध्याय 158

श्लोक 19

प्रियान्वितश्चात्मजसंयुतश्च कीर्तिं समाधाय महीतले तु ।त्रैलोक्यपूज्यां विमलां च शुक्लां कृत्वा पदं मूर्ध्नि यमस्य भूप

priyānvitaścātmajasaṃyutaśca kīrtiṃ samādhāya mahītale tu / trailokyapūjyāṃ vimalāṃ ca śuklāṃ kṛtvā padaṃ mūrdhni yamasya bhūpa

हिन्दी अर्थ

प्रकार हैं--दिशा, वायु, सूर्य, वरुण, अश्विनीकुमार, ब्रह्मा, इन्द्र, उपेन्द्र, मित्र और मृत्यु। तैजस अहंकारसे इन्द्रियोंकी उत्पत्ति बतायी गयी है। उनके दो भेद हैं-दज्ञानेन्द्रियाँ और कर्मेन्द्रियाँ। हैं तथा सुभगे! वाणी, हाथ, पैर, शिश्न तथा गुदा-ये कर्मेन्द्रियाँ हैं। साध्वी मोहिनी! तामस अहंकारसे शब्दकी उत्पत्ति हुई। उस शब्दसे आकाश प्रकट हुआ। आकाशसे स्पर्श हुआ और

English

with your beloved, with your son, having established your fame on earth, pure and white, worshipped by the three worlds, setting your foot on Yama's head, O king.

अध्याय 158

श्लोक 20

प्रयाहि वासं मम देहसंज्ञं स चक्रिणो भूमिपतिः करेण ।संस्पृष्टमात्रो विरजा बभूव प्रियासमेतस्तनयेन युक्तः

prayāhi vāsaṃ mama dehasaṃjñaṃ sa cakriṇo bhūmipatiḥ kareṇa / saṃspṛṣṭamātro virajā babhūva priyāsametastanayena yuktaḥ

हिन्दी अर्थ

स्पर्शसे वायुतत्त्वका प्रादुर्भाव हुआ। वायुसे रूप

English

Go to my abode, called body (of Vishnu)." The king, touched by the discus-bearer's hand, became stainless, with his beloved and his son.

अध्याय 158

श्लोक 21

उपेत्य वेगेन जगाम देहं देवस्य दिव्यं स नृपो महात्मा ।विहाय लक्ष्मीमवनीप्रसूतां विहाय दासीःसुधनं स कोशम्

upetya vegena jagāma dehaṃ devasya divyaṃ sa nṛpo mahātmā / vihāya lakṣmīmavanīprasūtāṃ vihāya dāsīḥsudhanaṃ sa kośam

हिन्दी अर्थ

- प्रकट हुआ तथा रूपसे तेजकी उत्पत्ति हुई। सती ! तेजसे रस हुआ तथा रससे जलकी उत्पत्ति हुई। जलसे गन्धकी उत्पत्ति हुई और गन्धसे पृथ्वी उत्पन्न हुई। इस पृथ्वीपर ही चराचर प्राणियोंकी स्थिति देखी जाती है। आकाश आदि तत्त्वोमें

English

He came swiftly and went to the divine body of the God, that great king, leaving the earth-born Lakshmi, leaving maidservants, fine wealth and treasury,

अध्याय 158

श्लोक 22

विहाय नागांस्तुरगान्रथांश्च स्वदारवर्गं स्वजनादिकांश्च ।जगाम देहं मधुसूदनस्य तत्ॐऽबरात्पुष्पचयः पपात

vihāya nāgāṃsturagānrathāṃśca svadāravargaṃ svajanādikāṃśca / jagāma dehaṃ madhusūdanasya tatoṃ'barātpuṣpacayaḥ papāta

हिन्दी अर्थ

क्रमश: एक, दो, तीन और चार गुण हैं। भूमिमें पाँच गुण बताये गये हैं। अत: ये पाँचों भूत विशेष कहे गये हैं। काल और मायाके अंशसे प्रेरित हुए इन पाँच भूतोंसे अचेतन अण्डकी

English

leaving elephants, horses and chariots, his own wives and kinsmen, and went to the body of Madhusudana; then a shower of flowers fell from the sky.

अध्याय 158

श्लोक 23

संहृष्टसिद्धैः सुरलोकपालैः संताडिता दुन्दुभयो विनेदुः ।राजन् जगुर्गीतमतीव रम्यं देवाङ्गनाः संननृतुर्मुदान्विताः

saṃhṛṣṭasiddhaiḥ suralokapālaiḥ saṃtāḍitā dundubhayo vineduḥ / rājan jagurgītamatīva ramyaṃ devāṅganāḥ saṃnanṛturmudānvitāḥ

हिन्दी अर्थ

उत्पत्ति हुई। सती मोहिनी! उसमें पुरुषके प्रवेश करनेसे वह सचेतन हो उठा। उस अण्डसे विराद् पुरुष उत्पन्न हुआ और वह जलके भीतर शयन करने लगा। भामिनि! जलमें सोये हुए विराट् पुरुषके बोलने आदि व्यवहारकी सिद्धिके लिये

English

Delighted Siddhas and guardians of the world struck drums which resounded; they sang lovely songs, O king, and celestial women danced joyfully.

अध्याय 158

श्लोक 24

गन्धर्वकन्या नृपकर्मतुष्टास्तदद्भुतं प्रेक्ष्य दिनेशसूनुः ।हरेस्तनौ भूमिपतिं प्रविष्टं सदारपुत्रं स्वलिपिं प्रमार्ज्य

gandharvakanyā nṛpakarmatuṣṭāstadadbhutaṃ prekṣya dineśasūnuḥ / harestanau bhūmipatiṃ praviṣṭaṃ sadāraputraṃ svalipiṃ pramārjya

हिन्दी अर्थ

हुए। उस पुरुषकी नाभिसे एक कमल उत्पन्न हुआ जो सहस्रों सूर्योसे भी अधिक प्रकाशमान था। उस कमलसे सम्पूर्ण जगत्के प्रपितामह स्वयम्भू ब्रह्माजी उत्पन्न हुए। उन्होंने तीत्र तपस्या

English

Gandharva maidens, pleased by the king's deed, and the sun's son, seeing that wonder, saw the king, with wife and son, enter Hari's body, having wiped away his writing,

अध्याय 158

श्लोक 25

लोकांश्च सर्वान्नृपदिष्टमार्गे कृत्वा कृतज्ञान्हरिलोकमार्गान् ।भीतः पुनः प्राप्य पितामहान्तिकं प्रोवाच देवं चतुराननं रुदन्

lokāṃśca sarvānnṛpadiṣṭamārge kṛtvā kṛtajñānharilokamārgān / bhītaḥ punaḥ prāpya pitāmahāntikaṃ provāca devaṃ caturānanaṃ rudan

हिन्दी अर्थ

करके परम पुरुष परमात्माकी आज्ञा ले लोकों और लोकपालोंकी रचना की। ब्रह्माजीने कटि आदि नीचेके अड्रोंसे सात पातालोंकी और ऊपरके अज्लोंसे भू: आदि सात लोकोंकी सृष्टि की। इन चौदह भुवनोंसे युक्त ब्रह्माण्ड बताया गया है। ब्रह्माजीने इस चतुर्दशभुवनात्मक ब्रह्माण्डमें समस्त चराचर भूतोंकी सृष्टि की है। ब्रह्माजीके मनसे चार सनकादि महात्मा उत्पन्न हुए हैं। देवि!

English

and having made all the worlds go the way pointed by the king, to grateful Hari-world paths, he again, afraid, approached Pitamaha and said weeping to the four-faced God:

अध्याय 158

श्लोक 26

नाहं नियोगी भविता हि देव आज्ञाविहीनः सुरलोकनाथ ।विधेहि चान्यत्प्रकरोमि तात निदेशनं मास्तु मदीय दण्डम्

nāhaṃ niyogī bhavitā hi deva ājñāvihīnaḥ suralokanātha / vidhehi cānyatprakaromi tāta nideśanaṃ māstu madīya daṇḍam

हिन्दी अर्थ

ब्रह्माजीके शरीरसे भृगु आदि पुत्र उत्पन्न हुए हैं, जिन्होंने इस जगत्को बढ़ाया है।

English

"Lord, I shall not be an official; I am without command, Lord of the world of gods. Appoint another, I do something else, father; let there be no punishment on me."

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_nAradapurANa.txt · प्राप्त 3/6/2026

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शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

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शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

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