Markandeya Purana
8
अध्याय 8 / 90

Adhyaya 8

270 श्लोकभाग 1/4 · श्लोक 1–83

पूर्ण अध्याय पाठ83 श्लोक

अध्याय 8

श्लोक 1

इति श्रीमार्कण्डेयपुराणे द्रौपदेयोत्पत्तिर्नाम सप्तमो ऽध्यायः अष्टमो ऽध्यायः जैमिनिरुवाच भवद्भिरिदमाख्यातं यथाप्रश्नमनुक्रमात् ।महत् कौतूहलं मे ऽस्ति हरिश्चन्द्र कथां प्रति

iti śrīmārkaṇḍeyapurāṇe draupadeyotpattirnāma saptamo 'dhyāyaḥ aṣṭamo 'dhyāyaḥ jaiminiruvāca bhavadbhiridamākhyātaṃ yathāpraśnamanukramāt / mahat kautūhalaṃ me 'sti hariścandra kathāṃ prati

हिन्दी अर्थ

इन्द्रकी यह बात सुनकर महाराज हरिश्वन्द्रकी प्रसन्नताके लिये महातपस्वी विश्वामित्रने राजकुमार रोहिताश्वको परम रमणीय अयोध्यापुरीमें ला वहाँ राज्य- सिंहासनपर अभिषिक्त कर दिया। देवताओं, मुनियों और सिद्धोंके साथ रोहिताश्वका राज्याभिषेक करके राजासहित सभी बन्धु-बान्धव बहुत प्रसन्न

English

Ye have declared tliia in order according to my questions: great is my cui’iosity regai’ding the story of Haris-c'andra.

अध्याय 8

श्लोक 2

अहो महात्मना तेन प्राप्तं कृच्छ्रमनुत्तमम् ।कच्चित् सुखमनुप्राप्तं तादृगेव द्विजोत्तमाः

aho mahātmanā tena prāptaṃ kṛcchramanuttamam / kaccit sukhamanuprāptaṃ tādṛgeva dvijottamāḥ

हिन्दी अर्थ

हुए। उसके बाद वहाँके सब लोग अपने पुत्र, भृत्य और स्त्रियोंसहित स्वर्गलोकको चले। वे पग-पगपर एक विमानसे दूसरे विमानपर जा पहुँचते थे। विमानोंके सहित यह अनृपम ऐश्वर्य पाकर महाराज हरिश्वन्द्र बहुत प्रसन्न हुए। स्वर्गमें नगरके आकारवाले सुन्दर विमानोंमें, जो परकोटोंसे सुशोभित था,

English

Ah! passing great was the woe incurred by tliat magnanimous king; I trust he obtained a happiness fully commensurate,

अध्याय 8

श्लोक 3

पक्षिण ऊचुः विश्वामित्रवचः श्रुत्वा स राजा प्रययौ शनैः ।शैव्ययानुगतो दुः खी भार्यया बलापुत्रया

pakṣiṇa ūcuḥ viśvāmitravacaḥ śrutvā sa rājā prayayau śanaiḥ / śaivyayānugato duḥ khī bhāryayā balāputrayā

हिन्दी अर्थ

महाराज हरिश्वन्द्र विराजमान हुए। उनकी यह समृद्धि देखकर सब शास्त्रोंका तत्त्व जाननेवाले हैत्याचार्य महाभाग शुक्रने इस प्रकार उनका यशोगान किया --'अहो! क्षमाका कैसा माहात्म्य है। दानका कितना महान् फल है, जिससे हरिश्वन्द्र अमरावतीपुरीमें आये और इन्द्रपदको प्राप्त हुए।'

English

Hearing Visvamitra’s speech, the king' moved on slowly, full of sorrow, followed by his wife S^aivya with her young boy.

अध्याय 8

श्लोक 4

स गत्वा वसुधापालो दिव्यां वाराणसीं पुरीम् ।नैषा मनुष्यभोग्येति शूलपाणेः परिग्रहः

sa gatvā vasudhāpālo divyāṃ vārāṇasīṃ purīm / naiṣā manuṣyabhogyeti śūlapāṇeḥ parigrahaḥ

हिन्दी अर्थ

पक्षीगण कहते हैं--जैमिनिजी! राजा हरिकश्वन्द्रका यह सारा चरित्र मैंने आपसे वर्णन किया। दु:खमें पड़ा हुआ जो मनुष्य इसका श्रवण करता है, वह महान् सुख पाता है। इसके श्रवणसे पुत्रार्थीको पुत्र, सुखार्थीको सुख, स्त्रीकी इच्छा रखनेवालेको स्त्री और राज्यकी कामनावालेको राज्यकी प्राप्ति होती है।

English

The king having reached the divine city* of Benares — the choice of S'iva who pronouncsd that it was not to be enjoyed

अध्याय 8

श्लोक 5

जगाम पद्भ्यां दुः खार्तः सह पत्न्यानुकूलया ।पुरीप्रवेशे ददृशे विश्वामित्रमुपस्थितम्

jagāma padbhyāṃ duḥ khārtaḥ saha patnyānukūlayā / purīpraveśe dadṛśe viśvāmitramupasthitam

हिन्दी अर्थ

उसकी संग्राममें विजय होती है और वह कभी नरकमें नहीं पड़ता।

English

present. Seeing he had already arrived, Hari.S"c'andra bowed reverently and, joining his hands respectfully, addressed the

अध्याय 8

श्लोक 6

तं दृष्ट्वा समनुप्राप्तं विनयावनतो ऽभवत् ।प्राह चैवाञ्जलिं कृत्वा हरिश्चन्द्रो महामुनिम्

taṃ dṛṣṭvā samanuprāptaṃ vinayāvanato 'bhavat / prāha caivāñjaliṃ kṛtvā hariścandro mahāmunim

हिन्दी अर्थ

दातव्यं विप्रमुख्येभ्यो ये चान्ये कृशवृत्तय: । रक्ष्या भीता: सदा युद्ध कर्तव्यं

English

present. Seeing he had already arrived, Hari.S"c'andra bowed reverently and, joining his hands respectfully, addressed the

अध्याय 8

श्लोक 7

इमे प्राणाः सुतश्चायमियं पत्नी मुने ! मम ।येन ते कृत्यमस्त्याशु तद्गृहाणार्घ्यमुत्तमम्

ime prāṇāḥ sutaścāyamiyaṃ patnī mune ! mama / yena te kṛtyamastyāśu tadgṛhāṇārghyamuttamam

हिन्दी अर्थ

नात: परतरं धर्म वदन्ति पुरुषस्य तु । यादृशं पुरुषव्याप्र स्वसत्यपरिपालनम् ।।

English

great Muni: — " Here is my life, and this is my son, and this is my wife, 0 Muni! Take that as the choicest arghya offering

अध्याय 8

श्लोक 8

यद्वान्यत् कार्यमस्माभिस्तदनुज्ञातुमर्हसि

yadvānyat kāryamasmābhistadanujñātumarhasi

हिन्दी अर्थ

वाक्यमकारणम् ।। सत्यमत्यन्तमुदितं धर्मशास्त्रेषु धीमताम् तारणायानृतं तद्बत् पातनायाकृतात्मनाम् ।।

English

with which thou shouldst quickly deal. Whatever else "ftc should do, deign to excuse that."

अध्याय 8

श्लोक 9

विश्वामित्र उवाच पूर्णः स मासो राजर्षे दीयतां मम दक्षिणा ।राजसूयनिमित्तं हि स्मर्यते स्ववचो यदि

viśvāmitra uvāca pūrṇaḥ sa māso rājarṣe dīyatāṃ mama dakṣiṇā / rājasūyanimittaṃ hi smaryate svavaco yadi

हिन्दी अर्थ

सत्येनार्क: प्रतपति सत्ये तिष्ठति मेदिनी । सत्य चोक्तं परो धर्म: स्वर्ग: सत्ये प्रतिष्ठित: ।।

English

" Gone is the month, 0 Rajarshi!; let my fee be given me, if thy word regarding the Raja-suya sacrifice be remembered.^’

अध्याय 8

श्लोक 10

हरिश्चन्द्र उवाच ब्राह्मन्नद्यैव सम्पूर्णो मासो ऽम्लानतपोधन ।तिष्ठत्येतद् दनार्धं यत्तत् प्रतीक्षस्व माचिरम्

hariścandra uvāca brāhmannadyaiva sampūrṇo māso 'mlānatapodhana / tiṣṭhatyetad danārdhaṃ yattat pratīkṣasva māciram

हिन्दी अर्थ

देवराजाननुज्ञातः स्वामिना श्वपचेन वै । अगत्वा निष्कृतिं तस्य नारोक्ष्येडहं सुरालयम् ।।

English

" 0 brahman, rich in fadeless austerities! to-day the month will, in truth, be completed: await this half-day which remains, hut not long."

अध्याय 8

श्लोक 11

विश्वामित्र उवाच एवमस्तु महाराज आगमिष्याम्यहं पुनः ।शापं तव प्रदास्यामि न चेदद्य प्रदास्यसि

viśvāmitra uvāca evamastu mahārāja āgamiṣyāmyahaṃ punaḥ / śāpaṃ tava pradāsyāmi na cedadya pradāsyasi

हिन्दी अर्थ

देवराज नमस्तुभ्यं वाक्‍्यं चैतन्निबोध मे । प्रसादसुमुखं यत् त्वां ब्रवीमि प्रश्नयान्वित: ।। मच्छोकमग्नमनस: कोसलानगरे जना: । तिष्ठन्ति तानपोह्याद्य कथं यास्याम्यहं दिवम् ।। ब्रह्महत्या गुरोर्घातो गोवधः स्त्रीवधस्तथा । तुल्यमेभिमहापापं भक्तत्यागे5प्युदाह्मतम् ।।

English

"Bo it so, Maharaja! I will come again: unless to-day thou shall make the gift, I will pronounce a curse on thee."

अध्याय 8

श्लोक 12

पक्षिण ऊचुः इत्युक्त्वा प्रययौ विप्रो राजा चाचिन्तयत् तदा ।कथमस्मै प्रदास्यामि दक्षिणा या प्रतिश्रुता

pakṣiṇa ūcuḥ ityuktvā prayayau vipro rājā cācintayat tadā / kathamasmai pradāsyāmi dakṣiṇā yā pratiśrutā

हिन्दी अर्थ

बहूनि पुण्यपापानि तेषां भिन्नानि वै पृथक् कथं सड़घातभोग्य॑ त्वं भूय:

English

Thus having spoken the brahman departed: and the Raja then took thought — " Plow shall I give him the fee which has

अध्याय 8

श्लोक 13

कुतः पुष्टानि मित्राणि कुतोर्ऽथः साम्प्रतं मम ।प्रतिग्रहः प्रदुष्टो मे नाहं यायामधः कथम्

kutaḥ puṣṭāni mitrāṇi kutor'thaḥ sāmprataṃ mama / pratigrahaḥ praduṣṭo me nāhaṃ yāyāmadhaḥ katham

हिन्दी अर्थ

शक्र भुड्क्ते नृपो राज्यं प्रभावेण कुटुम्बिनाम्ू यजते च महायज्ञैः कर्म पौर्त करोति च ।। तच्च तेषां प्रभावेण मया सर्वमनुष्ठितम् उपकर्त्तुन् न सन्त्यक्ष्ये तानहं स्वर्गलिप्सया ।। तस्माद् यन्मम देवेश किज्चिदस्ति सुचेष्टितम् दत्तमिष्टमथो जप्तं सामान्यं तैस्तदस्तु

English

been promised P Whence can [ find powerful friends? Whence can £ get wealth at this moment? BlamewoiPhy is

अध्याय 8

श्लोक 14

किमु प्राणान् विमुञ्चामि कां दिशं याम्यकिञ्चनः ।यदि नाशं गमिष्यामि अप्रदाय प्रतिश्रुतम्

kimu prāṇān vimuñcāmi kāṃ diśaṃ yāmyakiñcanaḥ / yadi nāśaṃ gamiṣyāmi apradāya pratiśrutam

हिन्दी अर्थ

पिता-पुत्र-संवादका आरम्भ, जीवकी मृत्यु तथा नरक-गतिका वर्णन

English

my present: how can I escape going doYmward? How much more am 1 abandoning life! To what region shall I, who am nothing, go, if! perish without having performed my promise?

अध्याय 8

श्लोक 15

ब्रह्मस्वहृत्कृमिः पापो भविष्याम्यधमाधमः ।अथवा प्रेष्यतां यास्ये वरमेवात्मविक्रयः

brahmasvahṛtkṛmiḥ pāpo bhaviṣyāmyadhamādhamaḥ / athavā preṣyatāṃ yāsye varamevātmavikrayaḥ

हिन्दी अर्थ

जैमिनिने पूछा--श्रेष्ठ पक्षियो! प्राणियोंकी उत्पत्ति और लय कहाँ होते हैं? इस विषयमें मुझे सन्देह है। मेरे प्रश्के अनुसार आपलोग इसका समाधान करें। जीव कैसे जन्म लेता है? कैसे मरता है? और किस प्रकार गर्भमें पीड़ा सहकर माताके उदरमें निवास करता है? फिर गर्भसे बाहर निकलनेपर वह किस प्रकार

English

I sliall become a robber of brahmans, a worip, a wicked man, let me sell myself."

अध्याय 8

श्लोक 16

पक्षिण ऊचुः राजानं व्याकुलं दीनं चिन्तयानमधोमुखम् ।प्रत्युवाच तदा पत्नी बाष्पगद्गदया गिरा

pakṣiṇa ūcuḥ rājānaṃ vyākulaṃ dīnaṃ cintayānamadhomukham / pratyuvāca tadā patnī bāṣpagadgadayā girā

हिन्दी अर्थ

बुद्धिको प्राप्त होता है? और मृत्युकालमें किस तरह चैतन्यस्वरूपके द्वारा शरीरसे विलग होता है। सभी प्राणी मृत्युके पश्चात् पुण्य और पाप दोनोंका फल भोगते हैं; किन्तु वे पुण्य और पाप किस प्रकार अपना फल देते हैं? ये सारी बातें मुझे बताइये, जिससे मेरा सब सन्देह दूर हो जाय।

English

Then his wife in words broken with weeping answered the king, who was distressed, dejected, anxious, with downcast

अध्याय 8

श्लोक 17

त्यज चिन्तां महारजा स्वसत्यमनुपालय ।श्मशानवद् वर्जनीयो नरः सत्यबहिष्कृतः

tyaja cintāṃ mahārajā svasatyamanupālaya / śmaśānavad varjanīyo naraḥ satyabahiṣkṛtaḥ

हिन्दी अर्थ

पक्षी बोले--महर्षे! आपने हमलोगोंपर बहुत बड़े प्रश्नचका भार रख दिया। इसकी कहीं तुलना नहीं है। महाभाग! इस विषयमें एक प्राचीन वृत्तान्त सुनिये। पूर्वकालमें एक परम बुद्धिमान् भृगुवंशी ब्राह्मण थे। उनके सुमति नामका एक पुत्र था। वह बड़ा ही शान्त और जड़रूपमें रहनेवाला था। उपनयन-संस्कार हो

English

face — " Leave oif care, 0 Maharaja; preserve thy truthfulness; a man destitute of truth should be avoided like a burning-

अध्याय 8

श्लोक 18

नातः परतरं धर्मं वदन्ति पुरुषस्य तु ।यादृशं पुरुषव्याघ्र स्वसत्यपरिपालनम्

nātaḥ parataraṃ dharmaṃ vadanti puruṣasya tu / yādṛśaṃ puruṣavyāghra svasatyaparipālanam

हिन्दी अर्थ

जानेके बाद उस बालकसे उसके पिताने कहा--'सुमते! तुम सभी वेदोंको क्रमश: आद्योपान्त पढ़ो, गुरुकी सेवामें लगे रहो और भिक्षाके अन्नका भोजन किया करो। इस प्रकार ब्रह्मचर्यकी अवधि पूरी करके गृहस्थाश्रममें प्रवेश करो और वहाँ उत्तम-उत्तम यज्ञोंका अनुष्ठान करके अपने मनके अनुरूप सन्तान

English

ground. There is no higher righteousness, they say, for a man than this, namely, maintaining his truthfulness, 0 noble

अध्याय 8

श्लोक 19

अग्निहोत्रमधीतं वा दानाद्याश्चाखिलाः क्रियाः ।भजन्ते तस्य वैफल्यं यस्य वाक्यमकारणम्

agnihotramadhītaṃ vā dānādyāścākhilāḥ kriyāḥ / bhajante tasya vaiphalyaṃ yasya vākyamakāraṇam

हिन्दी अर्थ

उत्पन्न करो। तदनन्तर वनकी शरण लो और वानप्रस्थके नियमोंका पालन करनेके पश्चात् परिग्रहरहित, सर्वस्वत्यागी संन्‍न्यासी हो जाओ। ऐसा करनेसे तुम्हें उस ब्रह्मकी प्राप्ति होगी, जहाँ जाकर तुम शोकसे मुक्त हो जाओगे।'

English

man! Oblations to consecrated fire, or study, or the whole circle of good deeds, such as liberality, &c., are fruitless in

अध्याय 8

श्लोक 20

सत्यमत्यन्तमुदितं धर्मशास्त्रेषु धीमताम् ।तारणायानृतं तद्वत् पातनायाकृतात्मनाम्

satyamatyantamuditaṃ dharmaśāstreṣu dhīmatām / tāraṇāyānṛtaṃ tadvat pātanāyākṛtātmanām

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार अनेकों बार कहनेपर भी सुमति जड़ होनेके कारण कुछ भी नहीं बोलता था। पिता भी स्नेहवश बारंबार अनेक प्रकारसे ये बातें उसके सामने रखते थे। उन्होंने पुत्रप्रेमके कारण मीठी वाणीमें अनेक बार उसे लोभ दिखाया। इस प्रकार उनके बार-बार कहनेपर एक दिन सुमतिने हँसकर कहा--'पिताजी!

English

him who speaks at random. Truthfulness is constantly declared in the Dharma-sastras to tend to the salvation of men of understanding; and falsehood to the overthrow of 'men of

अध्याय 8

श्लोक 21

सप्ताश्वमेधानाहृत्य राजसूयं च पार्थिवः ।कृतिर्नाम च्युतः स्वर्गादसत्यवचनात् सकृत्

saptāśvamedhānāhṛtya rājasūyaṃ ca pārthivaḥ / kṛtirnāma cyutaḥ svargādasatyavacanāt sakṛt

हिन्दी अर्थ

आज आप जो उपदेश दे रहे हैं, उसका मैंने बहुत बार अभ्यास किया है। इसी प्रकार दूसरे-दूसरे शास्त्रों और भाँति-भाँतिकी शिल्पकलाओंका भी सेवन किया है। इस समय मुझे अपने दस हजारसे भी अधिक जन्म स्मरण हो आये हैं। खेद, सन्तोष, क्षय, वृद्धि और उदयका भी मैंने बहुत अनुभव किया है। शत्रु, मित्र और

English

uneducated minds. A king named Kriti, after offering seven horse-sacrifices and a Raja-sfiya sacrifice, fell forthwith from

अध्याय 8

श्लोक 22

राजन् जातमपत्यं मे इत्युक्त्वा प्ररुरोद ह ।बाष्पाम्बुप्लुतनेत्रान्तामुवाचेदं महीपतिः

rājan jātamapatyaṃ me ityuktvā praruroda ha / bāṣpāmbuplutanetrāntāmuvācedaṃ mahīpatiḥ

हिन्दी अर्थ

पत्नीके संयोग-वियोग भी मुझे देखनेको मिले हैं। अनेक प्रकारके माता-पिताके भी दर्शन हुए हैं। मैंने हजारों बार सुख और दु:ख भोगे हैं। कितनी ही स्त्रियोंके विष्ठा और मूत्रसे भरे हुए गर्भमें निवास किया है। सहस्रों प्रकारके रोगोंकी भयानक पीड़ाएँ सहन की हैं। गर्भावस्‍थामें मैंने जो अनेकों प्रकारके दुःख भोगे

English

Bvarga for falsehood. 0 king, I have given birth to a child—’

अध्याय 8

श्लोक 23

हरिश्चन्द्र उवाच विमुञ्च भद्रे सन्तापमयं तिष्ठति बालकः ।उच्यतां वक्तुकामासि यद्वा त्वं गजगामिनि

hariścandra uvāca vimuñca bhadre santāpamayaṃ tiṣṭhati bālakaḥ / ucyatāṃ vaktukāmāsi yadvā tvaṃ gajagāmini

हिन्दी अर्थ

हैं, बचपन, जवानी और बुढ़ापेमें भी जो क्लेश सहन किये हैं, वे सब मुझे याद आ रहे हैं। ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्रोंकी योनियोंमें, फिर पशु, मृग, कीट और पक्षियोंकी योनियोंमें तथा राजसेवकों एवं युद्धमें पराक्रम दिखानेवाले राजाओंके घरोंमें भी मेरे कई बार जन्म हो चुके हैं। इसी तरह अबकी बार

English

" Cease, lady, thy agitation; here stands thy boy; pray, speak what thou desirest to say, 0 thou who art graceful in thy gait!"

अध्याय 8

श्लोक 24

पत्न्युवाच राजन् जातमपत्यं मे सतां पुत्रफलाः स्त्रियः ।स मां प्रदाय वित्तेन देहि विप्राय दक्षिणाम्

patnyuvāca rājan jātamapatyaṃ me satāṃ putraphalāḥ striyaḥ / sa māṃ pradāya vittena dehi viprāya dakṣiṇām

हिन्दी अर्थ

आपके घरमें भी मैंने जन्म लिया है। मैं बहुत बार मनुष्योंका भृत्य, दास, स्वामी, ईश्वर और दरिद्र रह चुका हूँ। दूसरोंने मुझे और मैंने दूसरोंको अनेक बार दान दिये हैं। पिता, माता, सुहृद, भाई और स्त्री इत्यादिके कारण कई बार संतुष्ट हुआ हूँ और कई बार दीन हो-होकर रोते हुए मुझे आँसुओंसे मुँह धोना पड़ा है।

English

" 0 king, I have given birth to a child: the wives of good men bear fruit in their sons. Do thou therefore, being such a man, give me in exchange for wealth, and pay the brahman

अध्याय 8

श्लोक 25

पक्षिण ऊचुः एतद्वाक्यमुपश्रुत्य ययौ मोहं महीपतिः ।प्रतिलभ्य च संज्ञां स विललापातिदुः खितः

pakṣiṇa ūcuḥ etadvākyamupaśrutya yayau mohaṃ mahīpatiḥ / pratilabhya ca saṃjñāṃ sa vilalāpātiduḥ khitaḥ

हिन्दी अर्थ

पिताजी! यों ही इस संसार-चक्रमें भटकते हुए मैंने अब वह ज्ञान प्राप्त किया है, जो मोक्षकी प्राप्ति करानेवाला है। उस ज्ञानको प्राप्त कर लेनेपर अब यह ऋक्, यजु और सामवेदोक्त समस्त क्रिया-कलाप गुणशून्य दिखायी देनेके कारण मुझे अच्छा नहीं लगता। अत: जब ज्ञान प्राप्त हो गया तब वेदोंसे मुझे क्या प्रयोजन

English

Hearing this proposal, the king lost his senses; and on re-

अध्याय 8

श्लोक 26

महद्दुः खमिदं भद्रे यत् त्वमेवं ब्रवीषि माम् ।किं तव स्मितसंलापा मम पापस्य विस्मृताः

mahadduḥ khamidaṃ bhadre yat tvamevaṃ bravīṣi mām / kiṃ tava smitasaṃlāpā mama pāpasya vismṛtāḥ

हिन्दी अर्थ

है। अब तो मैं गुरु-विज्ञानसे परितृप्त, निरीह एवं सदात्मा हूँ। अतः छ: प्रकारके भावविकार (जन्म, सत्ता, वृद्धि, परिणाम, क्षय और नाश), दुःख, सुख, हर्ष, राग तथा सम्पूर्ण गुणोंसे वर्जित उस परमपदरूप ब्रह्मको प्राप्त होऊँगा। पिताजी! जो राग, हर्ष, भय, उद्धेग, क्रोध, अमर्ष और वृद्धावस्थासे व्याप्त है तथा कुत्ते,

English

gaining consciousness lamented, sorely grieved: — " Dire is this grief, 0 lady, that thou thus raentionest to me: is thy joyous

अध्याय 8

श्लोक 27

हा हा कथं त्वया शक्यं वक्तुमेतत् शुचिस्मिते ।दुर्वाच्यमेतद्वचनं कर्तुं शक्नोम्यहं कथम्

hā hā kathaṃ tvayā śakyaṃ vaktumetat śucismite / durvācyametadvacanaṃ kartuṃ śaknomyahaṃ katham

हिन्दी अर्थ

मृग आदिकी योनिमें बाँधनेवाले सैकड़ों बन्धनोंसे युक्त है, उस दुःखकी परम्पराका परित्याग करके अब मैं चला जाऊँगा।'

English

intercourse with me, wretch that I am, forgotten? Ah! alas! how couldest thou suggest this, 0 sweet-smiler. Repugnant

अध्याय 8

श्लोक 28

इत्युक्त्वा स नरश्रेष्ठो धिग्धिगित्यसकृद् ब्रुवन् ।निपपात महीपृष्ठे मूर्च्छयाभिपरिप्लुतः

ityuktvā sa naraśreṣṭho dhigdhigityasakṛd bruvan / nipapāta mahīpṛṣṭhe mūrcchayābhipariplutaḥ

हिन्दी अर्थ

पुत्रकी यह बात सुनकर महाभाग पिताका हृदय प्रसन्नतासे भर गया। उन्होंने हर्ष और विस्मयसे गद्गदवाणीमें अपने पुत्रसे कहा--“बेटा! तुम यह क्या कहते हो? तुम्हें कहाँसे ज्ञान प्राप्त हो गया? पहले तुममें जड़ता क्यों थी और इस समय ज्ञान कहाँसे जग उठा? क्या यह मुनियों अथवा देवताओंके दिये हुए

English

is this plan: how can 1 execute it?" Thus having spoken,

अध्याय 8

श्लोक 29

शयानं भुवि तं दृष्ट्वा हरिश्चन्द्रं महीपतिम् ।उवाचेदं सकरुणं राजपत्नी सुदुः खिता

śayānaṃ bhuvi taṃ dṛṣṭvā hariścandraṃ mahīpatim / uvācedaṃ sakaruṇaṃ rājapatnī suduḥ khitā

हिन्दी अर्थ

शापका विकार था, जिससे पहले तुम्हारा ज्ञान छिप गया था और इस समय पुनः प्रकट हो गया? मैं यह सारा रहस्य सुनना चाहता हूँ। इसके लिये मेरे मनमें बड़ा कौतूहल है। बेटा! तुमपर पहले जो कुछ बीत चुका है, वह सब मुझे

English

ground overwhelmed by faintness. Seeing the king Hari^- c'andra prostrate on the earth, the queen full of sorrow, uttered these piteous words: —

अध्याय 8

श्लोक 30

पत्न्युवाच हा महारजा कस्येदमपध्यानमुपस्थितम् ।यत् त्वं निपतितो भूमौ राङ्कवास्तरणोचितः

patnyuvāca hā mahārajā kasyedamapadhyānamupasthitam / yat tvaṃ nipatito bhūmau rāṅkavāstaraṇocitaḥ

हिन्दी अर्थ

पुत्रने कहा--पिताजी! मेरा जो यह सुख और दु:ख देनेवाला पूर्व वृत्तान्त है, उसे सुनिये। इस जन्मके पहले पूर्वजन्ममें मैं जो कुछ था, वह सब बताता हूँ। पूर्वकालमें मैं परमात्माके ध्यानमें मन लगानेवाला एक ब्राह्मण था। आत्मविद्याके विचारमें मैं पराकाष्ठाको पहुँचा हुआ था। मैं सदा योगसाधनमें

English

" Alas! Maharaja! from whom has come this evil thought, that thou, who art accustomed to coverings made of the hair

अध्याय 8

श्लोक 31

येन कोट्यग्रगोवित्तं विप्राणामपवर्जितम् ।स एष पृथिवीनाथो भूमौ स्वपिति मे पतिः

yena koṭyagragovittaṃ viprāṇāmapavarjitam / sa eṣa pṛthivīnātho bhūmau svapiti me patiḥ

हिन्दी अर्थ

संलग्न रहता था। निरन्तर अभ्यासमें लगने, सत्पुरुषोंका सड़ करने, अपने स्वभावसे ही विचारपरायण होने, तत्त्वमसि आदि महावाक्योंके विचारने और तत्पदार्थंके शोधन करने आदिके कारण उस परमात्मतत्त्वमें ही मेरी परम प्रीति हो गयी। फिर मैं शिष्योंके सन्देहका निवारण करनेवाला आचार्य बन गया। फिर

English

of the spotted deer, hast fallen on the hare ground? Here sleeps the king, my lord, on the ground, — he, by whom ten thousands of choice cattle and wealth were dispensed among

अध्याय 8

श्लोक 32

हा कष्टं किं तवानेन कृतं देव ! महीक्षिता ।यदिन्द्रोपेन्द्रतुल्यो ऽयं नीतः प्रस्वापनीं दशाम्

hā kaṣṭaṃ kiṃ tavānena kṛtaṃ deva ! mahīkṣitā / yadindropendratulyo 'yaṃ nītaḥ prasvāpanīṃ daśām

हिन्दी अर्थ

बहुत समयके पश्चात् मैं एकान्तसेवी हो गया; किन्तु हैवात् अज्ञानसे सद्धावका नाश हो जानेके कारण प्रमादमें पड़कर मेरी मृत्यु हो गयी। तथापि मृत्युकालसे लेकर अबतक मेरी स्मरणशक्तिका लोप नहीं हुआ। मेरे जन्मोंके जितने वर्ष

English

brahmans. Ah! woe! what has this king done to thee, 0 brahman, that he, the equal of Indra and Vishnu, has been

अध्याय 8

श्लोक 33

इत्युक्त्वा सापि सुश्रोणी मूर्च्छिता निपपात ह ।भर्तृदुः खमहाभारेणासह्येन निपीडिता

ityuktvā sāpi suśroṇī mūrcchitā nipapāta ha / bhartṛduḥ khamahābhāreṇāsahyena nipīḍitā

हिन्दी अर्थ

बीत गये हैं, उन सबकी स्मृति हो आयी है। पिताजी! उस पूर्वजन्मके अभ्याससे ही जितेन्द्रिय होकर अब फिर मैं वैसा ही यत्न करूँगा, जिससे भविष्यमें फिर मेरा जन्म न हो। मैंने जो दूसरोंको ज्ञान दिया था, उसीका यह फल है कि मुझे पूर्वजन्मकी बातोंका स्मरण हो रहा है। केवल त्रयीधर्म (कर्मकाण्ड) का सहारा

English

reduced to a state of coma? " Having soliloquised thus, she, beautiful-hipped, fell swooning, crushed by the intolerable

अध्याय 8

श्लोक 34

तौ तथा पतितौ भूमावनाथौ पितरौ शिशुः ।दृष्ट्वात्यन्तं क्षुधाविष्टः प्राह वाक्यं सुदुः खितः

tau tathā patitau bhūmāvanāthau pitarau śiśuḥ / dṛṣṭvātyantaṃ kṣudhāviṣṭaḥ prāha vākyaṃ suduḥ khitaḥ

हिन्दी अर्थ

लेनेवाले मनुष्योंको इसकी प्राप्ति नहीं होती, अतः मैं इस प्रथम आश्रमसे ही संन्यास-धर्मका आश्रय ले एकान्तसेवी हो आत्माके उद्धारके लिये यत्न करूँगा। अतः महाभाग! आपके हृदयमें जो संशय है, उसे कहिये। मैं उसका समाधान करूँगा। इतनी-सी सेवासे भी आपकी प्रसन्नताका सम्पादन करके मैं पिताके

English

great weight of her husband’s misfortunes. The child seeing his parents lying thus helpless on the ground, being exces-

अध्याय 8

श्लोक 35

तात तात ! ददस्वान्नमम्बाम्ब ! भोजनं दद ।क्षुन्मे बलवती जाता जिह्वाग्रं शुष्यते तथा

tāta tāta ! dadasvānnamambāmba ! bhojanaṃ dada / kṣunme balavatī jātā jihvāgraṃ śuṣyate tathā

हिन्दी अर्थ

ऋणसे मुक्त हो सकूँगा।

English

sively hungry and very unhappy, spoke: — " Father, dear father, give me some food; mother, mother, give me somethiiiK

अध्याय 8

श्लोक 36

पक्षिण ऊचुः एतस्मिन्नन्तरे प्राप्तो विश्वामित्रो महातपाः ।दृष्ट्वा तु तं हरिश्चन्द्रं पतितं भुवि मूर्च्छितम्

pakṣiṇa ūcuḥ etasminnantare prāpto viśvāmitro mahātapāḥ / dṛṣṭvā tu taṃ hariścandraṃ patitaṃ bhuvi mūrcchitam

हिन्दी अर्थ

पक्षी कहते हैं--तब पुत्रकी बातपर श्रद्धा करते हुए पिताने उससे वही बात पूछी, जो आपने अभी संसारमें जन्म ग्रहण करनेके सम्बन्धमें हमलोगोंसे पूछी

English

At this interval arrived Vi^vamitra great in austerities; but, seeing Haris-c'andra lying on the ground in a swoon,

अध्याय 8

श्लोक 37

स वारिणा समभ्युक्ष्य राजानमिदमब्रवीत् ।उत्तिष्ठोतिष्ठ राजेन्द्र तां ददस्वेष्टदक्षिणाम्

sa vāriṇā samabhyukṣya rājānamidamabravīt / uttiṣṭhotiṣṭha rājendra tāṃ dadasveṣṭadakṣiṇām

हिन्दी अर्थ

पुत्रने कहा--पिताजी! जिस प्रकार मैंने तत्त्वका बारंबार अनुभव किया है, उसे बतलाता हूँ; सुनिये। यह क्षणभड्भुर संसार-चक्र प्रवाहरूपसे अजर है, निरन्तर चलते रहनेवाला है, कभी स्थिर नहीं रहता। तात! आपकी आज्ञासे मैं मृत्युकालसे लेकर अबतककी सब बातोंका वर्णन करता हूँ। शरीरमें जो गर्मी या

English

he sprinkled the king with water and addressed him thus: — " Rise up, rise up, 0 supreme king; give me the fee I desire.

अध्याय 8

श्लोक 38

ऋणं धारयतो दुः खमहन्यहनि वर्धन्ते ।आप्याय्यमानः स तदा हिमशीतेन वारिणा

ṛṇaṃ dhārayato duḥ khamahanyahani vardhante / āpyāyyamānaḥ sa tadā himaśītena vāriṇā

हिन्दी अर्थ

पित्त है, वह तीव्र वायुसे प्रेरित होकर जब अत्यन्त कुपित हो जाता है, उस समय बिना ईँधनके ही उद्दीप्त हुई अग्निकी भाँति बढ़कर मर्मस्थानोंको विदीर्ण कर देता है, तत्पश्चात् उदान नामक वायु ऊपरकी ओर उठता है और खाये-पीये हुए अन्न-जलको नीचेकी ओर जानेसे रोक देता है। उस आपत्तिकी अवस्थामें भी

English

A debtor’s misery increases from day to day." Then being

अध्याय 8

श्लोक 39

अवाप्य चेतनां राजा विश्वामित्रमवेक्ष्य च ।पुनर्मोहं समापेदे स च क्रोधं ययौ मुनिः

avāpya cetanāṃ rājā viśvāmitramavekṣya ca / punarmohaṃ samāpede sa ca krodhaṃ yayau muniḥ

हिन्दी अर्थ

उसीको प्रसन्नता रहती है, जिसने पहले जल, अन्न एवं रसका दान किया है। जिस पुरुषने श्रद्धासे पवित्र किये हुए अन्त:करणके द्वारा पहले अन्नदान किया है, वह उस रुग्णावस्थामें अन्नके बिना भी तृप्ति लाभ करता है। जिसने कभी मिथ्या भाषण नहीं किया, दो प्रेमियोंके पारस्परिक प्रेममें बाधा नहीं डाली तथा

English

refreshed with the snow-cold water, the king, recovering con- sciousness, and perceiving Vi4vamitra, again fell into a swoon,

अध्याय 8

श्लोक 40

स समाश्वास्य राजानं वाक्यमाह द्विजोत्तमः ।दीयतां दक्षिणा सा मे यदि धर्ममवेक्षसे

sa samāśvāsya rājānaṃ vākyamāha dvijottamaḥ / dīyatāṃ dakṣiṇā sā me yadi dharmamavekṣase

हिन्दी अर्थ

जो आस्तिक और श्रद्धालु है, वह सुखपूर्वक मृत्युको प्राप्त होता है। जो देवता और ब्राह्मणोंकी पूजामें संलग्न रहते, किसीकी निन्दा नहीं करते तथा सात््विक, उदार और लज्जाशील होते हैं, ऐसे मनुष्योंको मृत्युके समय कष्ट नहीं होता। जो कामनासे, क्रोधसे अथवा द्वेषके कारण धर्मका त्याग नहीं करता, शास्त्रोक्त

English

and the Muni gi ew angry. The brahman, making the king recover, spoke: — " Let my fee be given me, if thou regardest

अध्याय 8

श्लोक 41

सत्येनार्कः प्रतपति सत्ये तिष्ठति मेदिनी ।सत्यं चोक्तं परो धर्मः स्वर्गः सत्ये प्रतिष्ठितः

satyenārkaḥ pratapati satye tiṣṭhati medinī / satyaṃ coktaṃ paro dharmaḥ svargaḥ satye pratiṣṭhitaḥ

हिन्दी अर्थ

आज्ञाका पालन करनेवाला तथा सौम्य होता है, उसकी मृत्यु भी सुखसे होती है। जिन्होंने कभी जलका दान नहीं किया है, उन मनुष्योंको मृत्युकाल उपस्थित होनेपर अधिक जलन होती है तथा अन्नदान न करनेवालोंको उस समय भूखका भारी कष्ट भोगना पड़ता है। जो लोग जाड़ेके दिनोंमें लकड़ी दान करते हैं, वे

English

righteousness. By truth the sun sheds w^aimth; in truth

अध्याय 8

श्लोक 42

अश्वमेधसहस्रं च सत्यं च तुलया धृतम् ।अश्वमेधसहस्राद्धि सत्यमेव विशिष्यते

aśvamedhasahasraṃ ca satyaṃ ca tulayā dhṛtam / aśvamedhasahasrāddhi satyameva viśiṣyate

हिन्दी अर्थ

शीतके कष्टको जीत लेते हैं। जो चन्दन दान करते हैं, वे तापपर विजय पाते हैं

English

ousness: Svarga is based on truth. Also a hundred horse- sacrifices and truth are placed in the balance — truth verily

अध्याय 8

श्लोक 43

अथवा किं ममैतेन साम्ना प्रोक्तेन कारणम् ।अनार्त्ये पापसङ्कल्पे क्रूरे चानृतवादिनि

athavā kiṃ mamaitena sāmnā proktena kāraṇam / anārtye pāpasaṅkalpe krūre cānṛtavādini

हिन्दी अर्थ

तथा जो किसी भी जीवको उद्देग नहीं पहुँचाते, वे मृत्युकालमें प्राणघातिनी वेदनाका अनुभव नहीं करते। मोह और अज्ञान फैलानेवाले लोग महान् भयको प्राप्त होते हैं। नीच मनुष्य तीव्र वेदनाओंसे पीड़ित होते रहते हैं। जो झूठी गवाही देते, झूठ बोलते, बुरी बातोंका उपदेश देते और वेदोंकी निन्‍्दा करते हैं, वे सब

English

outweighs the hundred horse-sacrifices. Otherwise what motive is there for my speaking thus peaceably to thee^ base

अध्याय 8

श्लोक 44

त्वयि राज्ञि प्रभवति सद्भावः श्रूयतामयम् ।अद्य मे दक्षिणां राजन् न दास्यति भवान् यदि

tvayi rājñi prabhavati sadbhāvaḥ śrūyatāmayam / adya me dakṣiṇāṃ rājan na dāsyati bhavān yadi

हिन्दी अर्थ

लोग मूर्च्छाग्रस्त होकर मृत्युको प्राप्त होते हैं।

English

one, evil-intentioned, and cruel, false in speech? Since thou art powerful as king, let this my kindly feeling bo heeded. If

अध्याय 8

श्लोक 45

अस्ताचलं प्रयातेर्ऽके शप्स्यामि त्वां ततो ध्रुवम् ।इत्युक्त्वा स ययौ विप्रो राजा चासीद्भयातुरः

astācalaṃ prayāter'ke śapsyāmi tvāṃ tato dhruvam / ityuktvā sa yayau vipro rājā cāsīdbhayāturaḥ

हिन्दी अर्थ

ऐसे लोगोंकी मृत्युके समय यमराजके दुष्ट दूत हाथोंमें हथौड़ी एवं मुद्गर लिये आते हैं, वे बड़े भयडूकर होते हैं और उनकी देहसे दुर्गन्ध निकलती रहती है। उन यमदूतोंपर दृष्टि पड़ते ही मनुष्य काँप उठता है और भ्राता, माता तथा पुत्रोंका नाम लेकर बारंबार चिललाने लगता है। उस समय उसकी वाणी स्पष्ट

English

king, thou shalt not give me the fee to-day, when tho sun reaches the Western mountain, then I will assuredly curse thee."

अध्याय 8

श्लोक 46

कान्दिग्भूतो ऽधमो निः स्वो नृशंसधनिनार्दितः ।भार्यास्य भूयः प्राहेदं क्रियतां वचनं मम

kāndigbhūto 'dhamo niḥ svo nṛśaṃsadhaninārditaḥ / bhāryāsya bhūyaḥ prāhedaṃ kriyatāṃ vacanaṃ mama

हिन्दी अर्थ

समझमें नहीं आती। एक ही शब्द, एक ही आवाज-सी जान पड़ती है। भयके मारे रोगीकी आँखें झूमने लगती हैं और उसका मुख सूख जाता है। उसकी साँस ऊपरको उठने लगती है। दृष्टिकी शक्ति भी नष्ट हो जाती है, फिर वह अत्यन्त वेदनासे पीड़ित होकर उस शरीरको छोड़ देता है और वायुके सहारे चलता हुआ

English

remained, weak with terror, fugitive, vile, indigent, harassed by the malicious and the rich. His wife again spoke thus —

अध्याय 8

श्लोक 47

मा शापानलनिर्दग्धः पञ्चत्वमुपयास्यसि ।स तथा चोद्यमानस्तु राजा पत्न्या पुनः पुनः

mā śāpānalanirdagdhaḥ pañcatvamupayāsyasi / sa tathā codyamānastu rājā patnyā punaḥ punaḥ

हिन्दी अर्थ

वैसे ही दूसरे शरीरको धारण कर लेता है, जो रूप, रंग और अवस्थामें पहले शरीरके समान ही होता है। वह शरीर माता-पिताके गर्भसे उत्पन्न नहीं, कर्मजनित होता है और यातना भोगनेके लिये ही मिलता है। तदनन्तर यमराजके दूत शीघ्र ही उसे दारुण पाशोंसे बाँध लेते हैं और डंडोंकी मारसे

English

" Let my proposal bo complied with, lest consumed by the fire of his curse thou perish," But the king, thus urged

अध्याय 8

श्लोक 48

प्राह भद्रे करोम्येष विक्रयं तव निर्घृणः ।नृशंसैरपि यद् कर्तुं न शक्यं तत् करोम्यहम्

अध्याय 8

श्लोक 49

यदि मे शक्यते वाणी वक्तुमीदृक् सुदुर्वचः ।एवमुक्त्वा ततो भार्यां गत्वा नागरमातुरः ।बाष्पापिहितकण्ठाक्षस्ततो वचनमब्रवीत्

prāha bhadre karomyeṣa vikrayaṃ tava nirghṛṇaḥ / nṛśaṃsairapi yad kartuṃ na śakyaṃ tat karomyaham / 48/ yadi me śakyate vāṇī vaktumīdṛk sudurvacaḥ / evamuktvā tato bhāryāṃ gatvā nāgaramāturaḥ / bāṣpāpihitakaṇṭhākṣastato vacanamabravīt

हिन्दी अर्थ

व्याकुल करते हुए दक्षिण दिशाकी ओर खींच ले जाते हैं। उस मार्गपर कहीं तो कुश जमे होते हैं, कहीं काँटे फैले होते हैं, कहीं बाँबीकी मिट्टियाँ जमी होती हैं, कहीं लोहेकी कीलें गड़ी होती हैं और कहीं पथरीली भूमि होनेके कारण वह पथ अत्यन्त कठोर जान पड़ता है। कहीं जलती हुई आगकी लपटें मिलती हैं तो

English

do, that do I, if my voice be able to utter so hard a speech as this." Thereupon having so spoken to his wife, ho went unnerved to the city and then, his throat and eyes impeded with tears, uttered this speech; —

अध्याय 8

श्लोक 50

राजोवाच भो भो नागरिकाः सर्वे शृणुध्वं वचनं मम ।किं मां पृच्छथ कस्त्वं भो नृशंसो ऽहममानुषः

rājovāca bho bho nāgarikāḥ sarve śṛṇudhvaṃ vacanaṃ mama / kiṃ māṃ pṛcchatha kastvaṃ bho nṛśaṃso 'hamamānuṣaḥ

हिन्दी अर्थ

कहीं सैकड़ों गड्डोंके कारण वह मार्ग अत्यन्त दुर्गम प्रतीत होता है। कहीं सूर्य इतने तपते हैं कि उस राहसे जानेवाला जीव उनकी किरणोंसे जलने लगता है। ऐसे पथसे यमराजके दूत उसे घसीटकर ले जाते हैं। वे दूत घोर शब्द करनेके कारण अत्यन्त भयड्ूकर जान पड़ते हैं। जिस समय वे जीवको घसीटकर ले

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय 8

श्लोक 51

राक्षसो वातिकठिनस्ततः पापतरो ऽपि वा ।विक्रेतुं दयितां प्राप्तो यो न प्राणांस्त्यजाम्यहम्

rākṣaso vātikaṭhinastataḥ pāpataro 'pi vā / vikretuṃ dayitāṃ prāpto yo na prāṇāṃstyajāmyaham

हिन्दी अर्थ

जाते हैं, सैकड़ों गीदड़ियाँ जुटकर उसके शरीरको नोच-नोचकर खाने लगती हैं। पापी जीव ऐसे ही भयंकर मार्गसे यमलोककी यात्रा करते हैं।

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय 8

श्लोक 52

यदि वः कस्यचित् कार्यं दास्या प्राणेष्टया मम ।स ब्रीवीतु त्वरायुक्तो यावत् सन्धारयाम्यहम्

yadi vaḥ kasyacit kāryaṃ dāsyā prāṇeṣṭayā mama / sa brīvītu tvarāyukto yāvat sandhārayāmyaham

हिन्दी अर्थ

जो मनुष्य छाता, जूता, वस्त्र और अन्न-दान करनेवाले होते हैं, वे उस मार्गपर सुखसे यात्रा करते हैं। इस प्रकार अनेक प्रकारका कष्ट भोगता हुआ पापपीड़ित जीव विवश होकर बारह दिनोंमें धर्मराजके नगरतक पहुँचाया जाता है। उसके यातनामय शरीरके जलाये जानेपर जीव स्वयं भी अत्यन्त दाहका

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय 8

श्लोक 53

पक्षिण ऊचुः अथ वृद्धो द्विजः कश्चिदागत्याह नराधिपम् ।समर्पयस्व मे दासीमहं क्रेता धनप्रदः

pakṣiṇa ūcuḥ atha vṛddho dvijaḥ kaścidāgatyāha narādhipam / samarpayasva me dāsīmahaṃ kretā dhanapradaḥ

हिन्दी अर्थ

अनुभव करता है, उसी प्रकार मारे और काटे जानेपर भी उसे अत्यन्त भयडूकर वेदना होती है। अधिक देरतक जलमें भिगोये जानेके कारण भी जीवको भारी

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय 8

श्लोक 54

अस्ति मे वित्तमस्तोकं सुकुमारी च मे प्रिया ।गृहकर्म न शक्नोति कर्तुमस्मात् प्रयच्छ मे

asti me vittamastokaṃ sukumārī ca me priyā / gṛhakarma na śaknoti kartumasmāt prayaccha me

हिन्दी अर्थ

दुःख उठाना पड़ता है। इस प्रकार दूसरे शरीरको प्राप्त होनेपर भी उसे अपने कर्मोके फलस्वरूप कष्ट भोगने पड़ते हैं। उसके भाई-बन्धु जो तिल और जलकी अज्जलि देते तथा पिण्डदान करते हैं, वही उस मार्गपर जाते समय उसे खानेको मिलता है। भाई-बन्धु यदि अशौचके भीतर तेल लगावें और उबटन

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय 8

श्लोक 55

कर्मण्यता-वयो-रूप-शीलानां तव योषितः ।अनुरूपमिदं वित्तं गृहाणार्पय मे ऽबलाम्

karmaṇyatā-vayo-rūpa-śīlānāṃ tava yoṣitaḥ / anurūpamidaṃ vittaṃ gṛhāṇārpaya me 'balām

हिन्दी अर्थ

मलवावें तो उसीसे जीवका पोषण किया जाता है अर्थात् वह मैल ही उन्हें खानी पड़ती है अतः ये वस्तुएँ वर्जित हैं। इसी प्रकार बान्धवगण जो कुछ खाते-पीते हैं, वह मृतक जीवको मिलता है; अतः उन्हें भोजनकी शुद्धिपर भी ध्यान रखना चाहिए। यदि भाई-बन्धु भूमिपर शयन करें तो उससे जीवको कष्ट नहीं होता

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय 8

श्लोक 56

एवमुक्तस्य विप्रेण हरिश्चन्द्रस्य भूपतेः ।व्यदीर्यत मनो दुः खान्न चैनं किञ्चिदब्रवीत्

evamuktasya vipreṇa hariścandrasya bhūpateḥ / vyadīryata mano duḥ khānna cainaṃ kiñcidabravīt

हिन्दी अर्थ

और यदि वे उसके निमित्त दान करें तो उससे मृत जीवको बड़ी तृप्ति होती है। यमदूत जब उसे साथ लेकर जाते हैं तो वह बारह दिनोंतक अपने घरकी ओर देखता रहता है। उस समय पृथ्वीपर उसके निमित्त जो जल और पिण्ड दिये जाते हैं, उन्हींका वह उपभोग करता है।-

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय 8

श्लोक 57

ततः स विप्रो नृपतेर्वल्कलान्ते दृढं धनम् ।बद्ध्वा केशेष्वथादाय नृपपत्नीमकर्षयत्

tataḥ sa vipro nṛpatervalkalānte dṛḍhaṃ dhanam / baddhvā keśeṣvathādāya nṛpapatnīmakarṣayat

हिन्दी अर्थ

मृत्युसे बारह दिन बीतनेके पश्चात् यमपुरीकी ओर खींचकर ले जाया जानेवाला जीव अपने सामने यमराजके नगरको देखता है, जो बड़ा ही भयानक है। उस नगरमें पहुँचनेपर उसे मृत्यु, काल और अन्तक आदिके बीचमें बैठे हुए यमराजका दर्शन होता है, जो कज्जलराशिके समान काले हैं और अत्यन्त

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय 8

श्लोक 58

रुरोद रोहिताश्वो ऽपि दृष्ट्वा कृष्टां तु मातरम् ।हस्तेन वस्त्रमाकर्षन् काकपक्षधरः शिशुः

ruroda rohitāśvo 'pi dṛṣṭvā kṛṣṭāṃ tu mātaram / hastena vastramākarṣan kākapakṣadharaḥ śiśuḥ

हिन्दी अर्थ

क्रोधसे लाल-लाल आँखें किये रहते हैं। दाढ़ोंक कारण उनका मुख बड़ा विकराल दिखलायी पड़ता है। टेढ़ी भौंहोंसे युक्त उनकी आकृति बड़ी भयडूकर है। वे कुरूप, भीषण और टेढ़े-मेढ़े सैकड़ों रोगोंसे घिरे रहते हैं। उनकी भुजाएँ विशाल हैं। उनके एक हाथमें यमदण्ड और दूसरेमें पाश है। देखनेमें वे बड़े

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय 8

श्लोक 59

राजपत्न्युवाच मुञ्चार्य मुञ्च तावन्मां यावत्पश्याम्यहं शिशुम् ।दुर्लभं दर्शनं तात पुनरस्य भविष्यति

rājapatnyuvāca muñcārya muñca tāvanmāṃ yāvatpaśyāmyahaṃ śiśum / durlabhaṃ darśanaṃ tāta punarasya bhaviṣyati

हिन्दी अर्थ

भयानक प्रतीत होते हैं। पापी जीव उन्हींकी बतायी हुई शुभाशुभ गतिको प्राप्त होता है। झूठी गवाही देने और झूठ बोलनेवाला मनुष्य रौरव नरकमें जाता है। अब मैं रौरवका स्वरूप बतलाता हूँ, आप ध्यान देकर उसे सुनें। रौरव नरककी लंबाई-चौड़ाई दो हजार योजनकी है। वह एक गढ़ेके रूपमें है, जिसकी गहराई

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय 8

श्लोक 60

पश्यैहि वत्स मामेवं मातरं दास्यतां गताम् ।मां मा स्प्रार्क्षो राजपुत्र ! अस्पृश्याहं तवाधुना

paśyaihi vatsa māmevaṃ mātaraṃ dāsyatāṃ gatām / māṃ mā sprārkṣo rājaputra ! aspṛśyāhaṃ tavādhunā

हिन्दी अर्थ

घुटनोंतककी है। वह नरक अत्यन्त दुस्तर है। उसमें भूमिके बराबरतक अड्भजारराशि बिछी रहती है। उसके भीतरकी भूमि दहकते हुए अज्जारोंसे बहुत तपी होती है। सारा नरक तीव्रवेगसे प्रज्वलित होता रहता है। उसीके भीतर यमराजके दूत पापी मनुष्यको डाल देते हैं। वह धधकती हुई आगमें जब जलने

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय 8

श्लोक 61

ततः स बालः सहसा दृष्ट्वा कृष्टां तु मातरम् ।समभ्यधावदम्बेति रुदन् सास्त्राविलेक्षणः

tataḥ sa bālaḥ sahasā dṛṣṭvā kṛṣṭāṃ tu mātaram / samabhyadhāvadambeti rudan sāstrāvilekṣaṇaḥ

हिन्दी अर्थ

लगता है तो इधर-उधर दौड़ता है, किन्तु पग-पगपर उसका पैर जल-भुनकर राख होता रहता है। वह दिन-रातमें कभी एक बार पैर उठाने और रखनेमें समर्थ होता है। इस प्रकार सहस्रों योजन पार करनेपर वह उससे छुटकारा पाता है। फिर दूसरे पापोंकी शुद्धिके लिये उसे वैसे ही अन्य नरकोंमें जाना पड़ता है। इस

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय 8

श्लोक 62

तमागतं द्विजः क्रोधाद्वालमभ्याहनत् पदा ।वदंस्तथापि सो ऽम्बेति नैवामुञ्चत मातरम्

tamāgataṃ dvijaḥ krodhādvālamabhyāhanat padā / vadaṃstathāpi so 'mbeti naivāmuñcata mātaram

हिन्दी अर्थ

प्रकार सब नरकोंमें यातना भोगकर निकलनेके बाद पापी जीव तिर्यग्योनिमें

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय 8

श्लोक 63

राजपत्न्युवाच प्रसादं कुरु में नाथ क्रीणीष्वेमं च बालकम् ।क्रीतापि नाहं भवतो विनैनं कार्यसाधिका

rājapatnyuvāca prasādaṃ kuru meṃ nātha krīṇīṣvemaṃ ca bālakam / krītāpi nāhaṃ bhavato vinainaṃ kāryasādhikā

हिन्दी अर्थ

जन्म लेता है। क्रमश: कीड़े-मकोड़े, पतड़, हिंसक जीव, मच्छर, हाथी, वृक्ष आदि, गौ, अश्व तथा अन्यान्य दुःखदायिनी पापयोनियोंमें जन्म धारण करनेके पश्चात् वह मनुष्ययोनिमें आता है। उसमें भी वह कुरूप, कुबड़ा, नाटा और चाण्डाल आदि होता है। फिर अवशिष्ट पाप और पुण्यसे युक्त हो, वह क्रमशः

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय 8

श्लोक 64

इत्थं ममाल्पभाग्यायाः प्रसादसुमुखो भव ।मां संयोजय बालेन वत्सेनेव पयस्विनीम्

itthaṃ mamālpabhāgyāyāḥ prasādasumukho bhava / māṃ saṃyojaya bālena vatseneva payasvinīm

हिन्दी अर्थ

ऊँचे चढ़नेवाली योनियोंमें जन्म लेता--शूढ्र, वैश्य, क्षत्रिय, ब्राह्मण, देवता तथा इन्द्र आदिके रूपमें उत्पन्न होता है।

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय 8

श्लोक 65

ब्राह्मण उवाच गृह्यतां वित्तमेतत् ते दीयतां बालको मम ।स्त्रीपुंसोर्धर्मशास्त्रज्ञैः कृतमेव हि वेतनम् ।शतं सहस्रं लक्षं च कोटिमूल्यं तथा परैः

brāhmaṇa uvāca gṛhyatāṃ vittametat te dīyatāṃ bālako mama / strīpuṃsordharmaśāstrajñaiḥ kṛtameva hi vetanam / śataṃ sahasraṃ lakṣaṃ ca koṭimūlyaṃ tathā paraiḥ

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार पाप करनेवाले जीव नरकोंमें नीचे गिरते हैं। अब पुण्यात्मा जीव जिस प्रकार यात्रा करते हैं उसको सुनिये; वे पुण्यात्मा मनुष्य धर्मराजकी बतायी हुई पुण्यमयी गतिको प्राप्त होते हैं। उनके साथ गन्धर्व गीत गाते चलते हैं, अप्सराएँ नृत्य करती रहती हैं तथा वे भाँति-भाँतिके दिव्य आभूषणोंसे

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय 8

श्लोक 66

पक्षिण ऊचुः तथैव तस्य तद्वित्तं बद्ध्वोत्तरपटे ततः ।प्रगृह्य बालकं मात्रा सहैकस्थमबन्धयत्

pakṣiṇa ūcuḥ tathaiva tasya tadvittaṃ baddhvottarapaṭe tataḥ / pragṛhya bālakaṃ mātrā sahaikasthamabandhayat

हिन्दी अर्थ

सुशोभित हो सुन्दर विमानोंपर बैठकर यात्रा करते हैं। वहाँसे पृथ्वीपर आनेपर वे राजाओं तथा अन्य महात्माओंके कुलमें जन्म लेते और सदाचारका पालन करते हैं। वहाँ उन्हें श्रेष्ठ भोग प्राप्त होते हैं। तदनन्तर शरीर त्यागनेके बाद वे पुनः स्वर्ग आदि ऊपरके लोकोंमें जाते हैं। ऊपरके लोकोंमें होनेवाली गतिको

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय 8

श्लोक 67

नीयमानौ तु तौ दृष्ट्वा भार्या-पुत्रौ स पार्थिवः ।विललाप सुदुः खार्तो निः श्वस्योष्णं पुनः पुनः

nīyamānau tu tau dṛṣṭvā bhāryā-putrau sa pārthivaḥ / vilalāpa suduḥ khārto niḥ śvasyoṣṇaṃ punaḥ punaḥ

हिन्दी अर्थ

“आरोहणी” कहते हैं। फिर वहाँसे पुण्यभोगके पश्चात् जो मृत्युलोकमें उतरना होता है, वह “अवरोहणी' गति है। इस अवरोहणी गतिको प्राप्त होनेपर मनुष्य फिर पहलेकी ही भाँति आरोहणी गतिको प्राप्त होते हैं। ब्रह्मरष! जीवकी जिस प्रकार मृत्यु होती है, वह सब प्रसड़ मैंने आपसे कह सुनाया। अब जिस तरह

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय 8

श्लोक 68

यां न वायुर्न चादित्यो नेन्दुर्न च पृथग्जनः ।दृष्टवन्तः पुरा पत्नीं सेयं दासीत्वमागता

yāṃ na vāyurna cādityo nendurna ca pṛthagjanaḥ / dṛṣṭavantaḥ purā patnīṃ seyaṃ dāsītvamāgatā

हिन्दी अर्थ

जीव गर्भमें आता है, उस विषयका वर्णन सुनिये।

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय 8

श्लोक 69

सूर्यवंशप्रसूतो ऽयं सुकुमारकराङ्गुलिः ।सम्प्राप्तो विक्रयं बालो धिङ्मामस्तु सुदुर्मतिम्

sūryavaṃśaprasūto 'yaṃ sukumārakarāṅguliḥ / samprāpto vikrayaṃ bālo dhiṅmāmastu sudurmatim

हिन्दी अर्थ

जीवके जन्मका वृत्तान्त तथा महारौरव आदि नरकोंका

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय 8

श्लोक 70

हा प्रिये ! हा शिशो ! नत्स ! ममानार्यस्य दुर्नयैः ।दैवाधीनां दशां प्राप्तो न मृतो ऽस्मि तथापि धिक्

hā priye ! hā śiśo ! natsa ! mamānāryasya durnayaiḥ / daivādhīnāṃ daśāṃ prāpto na mṛto 'smi tathāpi dhik

हिन्दी अर्थ

पुत्र कहता है--पिताजी! मनुष्य स्त्री-सहवासके समय गर्भमें जो वीर्य स्थापित करता है, वह स्त्रीके रजमें मिल जाता है। नरक अथवा स्वर्गसे निकलकर आया हुआ जीव उसी रज-वीर्यका आश्रय लेता है। जीवसे व्याप्त होनेपर वे दोनों बीज (स्त्री और पुरुष दोनोंके रज-वीर्य) स्थिर हो जाते हैं। फिर वे क्रमश: कलल, बुद्बुद एवं मांसपिण्डके रूपमें परिणत

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय 8

श्लोक 71

पक्षिण ऊचुः एवं विलपतो राज्ञः स विप्रो ऽन्तरधीयत ।वृक्षगेहादिभिस्तुङ्गैस्तावादाय त्वरान्वितः

pakṣiṇa ūcuḥ evaṃ vilapato rājñaḥ sa vipro 'ntaradhīyata / vṛkṣagehādibhistuṅgaistāvādāya tvarānvitaḥ

हिन्दी अर्थ

होते हैं। जैसे बीजसे अंकुर उत्पन्न होता है, उसी प्रकार उस मांसपिण्डसे विभागपूर्वक पाँच अड़ प्रकट होते हैं। फिर उन अड्ोंसे अँगुली, नेत्र, नासिका, मुख, कान आदि प्रकट होते हैं। इसी प्रकार अँगुली आदिसे नख आदिकी उत्पत्ति होती है। फिर त्वचामें रोम और मस्तकपर बाल उग आते हैं। जीवके शरीरकी वृद्धिके साथ ही स्त्रीका गर्भकोष भी बढ़ता है। जैसे

English

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अध्याय 8

श्लोक 72

विश्वामित्रस्ततः प्राप्तो नृपं वित्तमयाचत ।तस्मै समर्पयामास हरिश्चन्द्रो ऽपि तद्धनम्

viśvāmitrastataḥ prāpto nṛpaṃ vittamayācata / tasmai samarpayāmāsa hariścandro 'pi taddhanam

हिन्दी अर्थ

नारियलका फल अपने आवरणकोषके साथ ही बढ़ता है, उसी प्रकार गर्भस्थ शिशु भी गर्भकोषके साथ ही वृद्धिको प्राप्त होता है। उसका मुख नीचेकी ओर होता है। दोनों हाथोंको घुटनों और पसलियोंके नीचे रखकर वह बढ़ता है। हाथके दोनों अँगूठे दोनों घुटनोंके ऊपर होते हैं और अँगुलियाँ उनके अग्रभागमें रहती हैं। उन घुटनोंके पृष्ठभागमें

English

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अध्याय 8

श्लोक 73

तद्वित्तं स्तोकमालोक्य दारविक्रयसम्भवम् ।शोकाभिभूतं राजानं कुपितः कौशिको ऽब्रवीत्

tadvittaṃ stokamālokya dāravikrayasambhavam / śokābhibhūtaṃ rājānaṃ kupitaḥ kauśiko 'bravīt

हिन्दी अर्थ

दोनों आँखें रहती हैं और नासिका उनके मध्यभागमें होती है। दोनों चूतड़ एड़ियोंपर टिके होते हैं। दोनों बाँहें और पिंडलियाँ बाहरी किनारेपर रहती हैं। इसी स्थितिमें स्त्रीके गर्भमें रहनेवाला जीव क्रमश: वृद्धिको प्राप्त होता है। गर्भस्थ शिशुकी नाभिमें एक नाल बँधी होती है, जिसे आप्यायनी नाड़ी कहते हैं। इसी प्रकार वह नाल स्त्रीकी आँतके छिठद्रमें भी जुड़ी

English

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अध्याय 8

श्लोक 74

क्षत्रबन्धो ! ममेमां त्वं सदृशीं यज्ञदक्षिणाम् ।मन्यसे यदि तत् क्षिप्रं पश्य त्वं मे बलं परम्

kṣatrabandho ! mamemāṃ tvaṃ sadṛśīṃ yajñadakṣiṇām / manyase yadi tat kṣipraṃ paśya tvaṃ me balaṃ param

हिन्दी अर्थ

होती है। स्त्री जो कुछ खाती-पीती है, वह उस नाड़ीके ही मार्गसे गर्भस्थ शिशुके भी उदरमें पहुँचता है। उसीसे शरीरका पोषण होते रहनेसे जीव क्रमशः वृद्धिको प्राप्त होता है। उस गर्भमें उसे अनेक जन्मोंकी बातें याद आती हैं, जिससे व्यथित होकर वह इधर-उधर फिरता और निर्वेद (खेद)-को प्राप्त होता है। अपने मनमें सोचता है, “अब इस उदरसे छुटकारा

English

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अध्याय 8

श्लोक 75

तपसो ऽत्र सुतप्तस्य ब्राह्मण्यस्यामलस्य च ।मत्प्रभावस्य चोग्रस्य शुद्धस्याध्ययनस्य च

tapaso 'tra sutaptasya brāhmaṇyasyāmalasya ca / matprabhāvasya cograsya śuddhasyādhyayanasya ca

हिन्दी अर्थ

पानेपर मैं फिर ऐसा कार्य नहीं करूँगा, बल्कि इस बातके लिये चेष्टा करूँगा कि मुझे फिर गर्भके भीतर न आना पड़े।' सैकड़ों जन्मोंके दुःखोंका स्मरण करके वह इसी प्रकार चिन्ता करता है। हैवकी प्रेरणासे पूर्वजन्मोंमें उसने जो-जो क्लेश भोगे होते हैं, वे सब उसे याद आ जाते हैं। तत्पश्चात् कालक्रमसे वह अधोमुख जीव जब नवें या दसवें महीनेका होता है, तब

English

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अध्याय 8

श्लोक 76

अन्यां दास्यामि भगवन् ! कालः कश्चित्प्रतीक्ष्यताम् ।साम्प्रतं नास्ति विक्रीता पत्नी पुत्रश्च बालकः

anyāṃ dāsyāmi bhagavan ! kālaḥ kaścitpratīkṣyatām / sāmprataṃ nāsti vikrītā patnī putraśca bālakaḥ

हिन्दी अर्थ

उसका जन्म हो जाता है। गर्भसे निकलते समय वह प्राजापत्य वायुसे पीड़ित होता है और मन-ही-मन दुःखसे व्यथित हो रोते हुए गर्भसे बाहर आता है। उदरसे निकलनेपर असहा पीड़ाके कारण उसे मूर्च्छा आ जाती है। फिर वायुके स्पर्शसे वह सचेत होता है। तदनन्तर भगवान् विष्णुकी मोहिनी माया उसको अपने वशमें कर लेती है। उससे मोहित हो जानेके

English

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अध्याय 8

श्लोक 77

विश्वामित्र उवाच चतुर्भागः स्थितो यो ऽयं दिवसस्य नराधिप ।एष एव प्रतीक्ष्यो मे वक्तव्यं नोत्तरं त्वया

viśvāmitra uvāca caturbhāgaḥ sthito yo 'yaṃ divasasya narādhipa / eṣa eva pratīkṣyo me vaktavyaṃ nottaraṃ tvayā

हिन्दी अर्थ

कारण उसका पूर्वज्ञान नष्ट हो जाता है। इस प्रकार ज्ञानभ्रष्ट हो जानेपर वह जीव पहले तो

English

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अध्याय 8

श्लोक 78

पक्षिण ऊचुः तमेवमुक्त्वा राजेन्द्रं निष्ठुरं निर्घृणं वचः ।तदादाय धनं तूर्णं कुपितः कौशिको ययौ

pakṣiṇa ūcuḥ tamevamuktvā rājendraṃ niṣṭhuraṃ nirghṛṇaṃ vacaḥ / tadādāya dhanaṃ tūrṇaṃ kupitaḥ kauśiko yayau

हिन्दी अर्थ

बाल्यावस्थाको प्राप्त होता है, फिर क्रमश: कौमारावस्था, यौवनावस्था और वृद्धावस्थामें प्रवेश करता है। इसके बाद मृत्युको प्राप्त होता और मृत्युके बाद फिर जन्म लेता है। इस प्रकार इस संसार-चक्रमें वह घटीयन्त्र (रहट) की भाँति घूमता रहता है। कभी स्वर्गमें जाता है, कभी नरकमें। कभी इस संसारमें पुनः जन्म लेकर अपने कर्मोंको भोगता है, कभी

English

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अध्याय 8

श्लोक 79

विश्वामित्रे गते राजा भयशोकाब्धिमध्यगः ।सर्वाकारं विनिश्चित्य प्रोवाचोच्चैरधोमुखः

viśvāmitre gate rājā bhayaśokābdhimadhyagaḥ / sarvākāraṃ viniścitya provācoccairadhomukhaḥ

हिन्दी अर्थ

कर्मोका भोग समाप्त होनेपर थोड़े ही समयमें मरकर परलोकमें चला जाता है। कभी स्वर्ग और नरकको प्राय: भोग चुकनेके बाद थोड़ेसे शुभाशुभ कर्म शेष रहनेपर इस संसारमें जन्म लेता है।

English

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अध्याय 8

श्लोक 80

वित्तक्रीतेन यो ह्यर्थो मया प्रेष्येण मानवः ।स ब्रवीतु त्वरायुक्तो यावत् तपति भास्करः

vittakrītena yo hyartho mayā preṣyeṇa mānavaḥ / sa bravītu tvarāyukto yāvat tapati bhāskaraḥ

हिन्दी अर्थ

नारकी जीव घोर दुःखदायी नरकोंमें गिराये जाते हैं। स्वर्गमें भी ऐसा दुःख होता है, जिसकी कहीं तुलना नहीं है। स्वर्गमें पहुँचनेके बादसे ही मनमें इस बातकी चिन्ता बनी रहती है कि पुण्य-क्षय होनेपर हमें यहाँसे नीचे गिरना पड़ेगा। साथ ही नरकमें पड़े हुए जीवोंको देखकर महान् दुःख होता है कि कभी हमें भी ऐसी ही दुर्गति भोगनी पड़ेगी। इस

English

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अध्याय 8

श्लोक 81

अथाजगाम त्वरितो धर्मश्चण्डालरूपधृक् ।दुर्गन्धो विकृतो रूक्षः श्मश्रुलो दन्तुरो घृणी

athājagāma tvarito dharmaścaṇḍālarūpadhṛk / durgandho vikṛto rūkṣaḥ śmaśrulo danturo ghṛṇī

हिन्दी अर्थ

बातसे दिन-रात अशान्ति बनी रहती है। गर्भवासमें तो भारी दुःख होता ही है, योनिसे जन्म लेते समय भी थोड़ा क्लेश नहीं होता। जन्म लेनेके पश्चात् बाल्यावस्था और वृद्धावस्थामें भी दुःख-ही-दुःख भोगना पड़ता है। जवानीमें भी काम, क्रोध और ईर्ष्यामें बँधे रहनेके कारण अत्यन्त दुस्सह कष्ट उठाना पड़ता है। बुढ़ापेमें तो अधिकांश दुःख ही होता है।

English

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अध्याय 8

श्लोक 82

कृष्णो लम्बोदरः पिङ्गरूक्षाक्षः परुषाक्षरः ।गृहीतपक्षिपुञ्जश्च शवमाल्यैरलङ्कृतः

kṛṣṇo lambodaraḥ piṅgarūkṣākṣaḥ paruṣākṣaraḥ / gṛhītapakṣipuñjaśca śavamālyairalaṅkṛtaḥ

हिन्दी अर्थ

मरनेमें भी सबसे अधिक दु:ख है। यमदूतोंद्वारा घमीटकर ले जाये जाने और नरकमें गिराये जानेपर जो महान् क्लेश होता है, उसकी चर्चा हो चुकी है। यहाँसे लौटनेपर फिर गर्भवास, जन्म, मृत्यु तथा नरकका क्रम चालू हो जाता है। इस तरह जीव प्राकृत बन्धनोंमें बँधकर घटीयन्त्रकी भाँति इस संसारचक्रमें घूमते रहते हैं।

English

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अध्याय 8

श्लोक 83

कपालहस्तो दीर्घास्यो भैरवो ऽतिवदन् मुहुः ।श्वगणाभिवृतो घोरो यष्टिहस्तो निराकृतिः

kapālahasto dīrghāsyo bhairavo 'tivadan muhuḥ / śvagaṇābhivṛto ghoro yaṣṭihasto nirākṛtiḥ

हिन्दी अर्थ

पिताजी! मैंने आपसे रौरव नामक प्रथम नरकका वर्णन किया है। अब महारौरवका वर्णन सुनिये--इसका विस्तार सब ओरसे बारह हजार योजन है। वहाँकी भूमि ताँबेकी है, जिसके नीचे आग धधकती रहती है। उसकी आँचसे तपकर वह सारी ताम्रमयी भूमि चमकती हुई बिजलीके समान ज्योतिर्मयी दिखायी देती है। उसकी ओर देखना और स्पर्श

English

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स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_mArkaNDeyapurANa1-93.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।