Mahanarayana Upanishad
71
अध्याय 71 / 79

Anuvāka 71

1 श्लोक

पूर्ण अध्याय पाठ1 श्लोक

अध्याय 71

श्लोक 1

वाङ् म आसन् ।नसोः प्राणः ।अक्ष्योश्चक्षुः ।कर्णयोः श्रोत्रम् ।बाहुवोर्बलम् ।उरुवोरोजः ।अरिष्टा विश्वान्यङ्गानि तनूः ।तनुवा मे सह नमस्ते अस्तु मा मा हिँसीः

vāṅ ma āsan | nasoḥ prāṇaḥ | akṣyoścakṣuḥ | karṇayoḥ śrotram | bāhuvorbalam | uruvorojaḥ | ariṣṭā viśvānyaṅgāni tanūḥ | tanuvā me saha namaste astu mā mā hi~sīḥ

हिन्दी अर्थ

मेरे मुख में वाणी रहे; नासिका में प्राण; आँखों में दृष्टि; कानों में श्रवण; भुजाओं में बल; जंघाओं में ओज; मेरे सब अंग और शरीर अक्षत रहें; मेरे शरीर के साथ तुम्हें नमस्कार हो; मुझे हानि मत पहुँचाओ।

English

Speech was in my mouth; breath in my nostrils; sight in my eyes; hearing in my ears; strength in my arms; vigor in my thighs; unharmed all my limbs and body; with my body, homage to you; do not harm me.

स्रोत: https://sanskritdocuments.org/doc_upanishhat/mahanarayana.itx · प्राप्त 30/9/2026

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शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पाठ-भेद एवं संशोधनVariants & corrections

पाठ-भेद टिप्पणी (Alternative Reading / Variant Notes):

Collated with Andhra recension (64 anuvākas) and standard 80-anuvāka recension.