Mahanarayana Upanishad
5
अध्याय 5 / 79

Anuvāka 5

1 श्लोक

पूर्ण अध्याय पाठ1 श्लोक

अध्याय 5

श्लोक 1

भूरग्नये च पृथिव्यै च महुते च स्वाहा भुवो वायवे चान्तरिक्षाय च महते च स्वाहा सुवरादित्याय च दिवे च महते च स्वाहा भूर्भुवस्सुवश्चन्द्रमसे च नक्षत्रेभ्यश्च दिग्भ्यश्च महते च स्वाहा नमो देवेभ्यः स्वधा पितृभ्यो भूर्भुवः सुवर्महरोम्

bhūragnaye ca pṛthivyai ca mahute ca svāhā bhuvo vāyave cāntarikṣāya ca mahate ca svāhā suvarādityāya ca dive ca mahate ca svāhā bhūrbhuvassuvaścandramase ca nakṣatrebhyaśca digbhyaśca mahate ca svāhā namo devebhyaḥ svadhā pitṛbhyo bhūrbhuvaḥ suvarmaharom

हिन्दी अर्थ

भूः अग्नि, पृथ्वी और महत् के लिए, स्वाहा। भुवः वायु, अन्तरिक्ष और महत् के लिए, स्वाहा। सुवः आदित्य, द्युलोक और महत् के लिए, स्वाहा। भूर्भुवः सुवः चन्द्रमा, नक्षत्रों, दिशाओं और महत् के लिए, स्वाहा। देवताओं को नमस्कार, पितरों को स्वधा। भूर्भुवः सुवः महः। ॐ।

English

Bhuh to Agni and Earth and the Great, svaha. Bhuvah to Vayu and the Air and the Great, svaha. Svah to Aditya and Heaven and the Great, svaha. Bhur Bhuvah Svah to the Moon, the Stars, the Directions and the Great, svaha. Homage to the gods; svadha to the fathers. Bhur Bhuvah Svah Mahah. Om.

स्रोत: https://sanskritdocuments.org/doc_upanishhat/mahanarayana.itx · प्राप्त 30/9/2026

धर्म ग्रंथ निःशुल्क और विज्ञापन-रहित है। Dharma Granth is free and has no ads. इसे ऐसा बनाए रखने में सहयोग करेंHelp keep it that way → How it is funded

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पाठ-भेद एवं संशोधनVariants & corrections

पाठ-भेद टिप्पणी (Alternative Reading / Variant Notes):

Collated with Andhra recension (64 anuvākas) and standard 80-anuvāka recension.