Mahanarayana Upanishad
24
अध्याय 24 / 79

Anuvāka 24

1 श्लोक

पूर्ण अध्याय पाठ1 श्लोक

अध्याय 24

श्लोक 1

सर्वो वै रुद्रस्तस्मै रुद्राय नमो अस्तु ।पुरुषो वै रुद्रः सन्महो नमो नमः ।विश्वं भूतं भुवनं चित्रं बहुधा जातं जायमानं च यत् ।सर्वो ह्येष रुद्रस्तस्मै रुद्राय नमो अस्तु

sarvo vai rudrastasmai rudrāya namo astu | puruṣo vai rudraḥ sanmaho namo namaḥ | viśvaṃ bhūtaṃ bhuvanaṃ citraṃ bahudhā jātaṃ jāyamānaṃ ca yat | sarvo hyeṣa rudrastasmai rudrāya namo astu

हिन्दी अर्थ

सब कुछ रुद्र ही है; उस रुद्र को नमस्कार हो। पुरुष ही रुद्र है, महान सत्ता; बारम्बार नमस्कार। विश्व, भूत, भुवन, विचित्र, जो अनेक प्रकार से उत्पन्न हुआ और उत्पन्न हो रहा है — यह सब रुद्र ही है; उस रुद्र को नमस्कार हो।

English

All is Rudra; homage to that Rudra. The Person is Rudra, great being; homage, homage. The universe, being, world, the wondrous, born in many ways and being born — all this is Rudra; homage to that Rudra.

स्रोत: https://sanskritdocuments.org/doc_upanishhat/mahanarayana.itx · प्राप्त 30/9/2026

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शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पाठ-भेद एवं संशोधनVariants & corrections

पाठ-भेद टिप्पणी (Alternative Reading / Variant Notes):

Collated with Andhra recension (64 anuvākas) and standard 80-anuvāka recension.