अध्याय 54
श्लोक 1
भगवतः विष्णोः प्रति देवर्षेः नारदस्य वचनं - भूर्लोकस्य वर्तमानावस्थायाः परिचयं दत्त्वा भगवन्तं अवतारग्रहणाय प्रेरणं कृतकार्ये गते काले जगत्यां च यथानयम् ।अंशावतरणे वृत्ते सुराणां भारते कुले
bhagavataḥ viṣṇoḥ prati devarṣeḥ nāradasya vacanaṃ - bhūrlokasya vartamānāvasthāyāḥ paricayaṃ dattvā bhagavantaṃ avatāragrahaṇāya preraṇaṃ kṛtakārye gate kāle jagatyāṃ ca yathānayam | aṃśāvataraṇe vṛtte surāṇāṃ bhārate kule
श्लोक 1–6 का हिन्दी अर्थ
बैशम्पायनजी कहते हैं—जनमेजय! जब पृथ्वी और काल दोनों कृतकृत्य होकर चले गये और देवताओंका भरतवंशमें यथोचितरूपसे अंशावतरणका कार्य सम्पन्न हो गया एवं धर्म, इन्द्र, वायु, देववैद्य अश्विनीकुमार तथा सूर्यदेवका पृथक्-पृथक् भाग जब भूतलपर अवतीर्ण हो गया, देवताओंके पुरोहित बृहस्पतिजी जब उनसे भी पहले ही पृथ्वीपर आ गये, वसुओंके अष्टम भाग भीष्म भी पहले ही पृथ्वीपर अवतीर्ण हो गये तथा मृत्यु (यम) और कलिके भाग भी जब पृथ्वीपर आ गये तथा शुक्र, सोम और वरुणके अंश भी भूतलपर अवतीर्ण हो गये, भगवान् शड्र, मित्र, कुबेर, गन्धर्व, नाग और यक्षोंके भागांश भी जब पृथ्वीपर आ गये, उपर्युक्त सभी भाग जब आकाशसे पृथ्वीपर उतर आये, तब देवपक्षमें स्थित रहनेवाले देवर्षि नारद भगवान् नारायणके निकट आते हुए दिखायी दिये
English
²⁴⁷ Sukra promised not to consign the _mantras_ of reviving a dead man to any body but this promise was falsified.