Harivamsha Purana
282
अध्याय 282 / 318

Parva 3, Adhyāya 99

15 श्लोक

पूर्ण अध्याय पाठ15 श्लोक

अध्याय 282

श्लोक 1

बलभद्रस्य एकलव्येन सार्धं एवं पौण्ड्रकस्य सात्यकिना सार्धं युद्धं क्रव्यादाः सर्व एवाशु भक्षयन्तस्तदा शवम् ।हसन्तो विविधं घोरं नादयन्तो वसुन्धराम्

balabhadrasya ekalavyena sārdhaṃ evaṃ pauṇḍrakasya sātyakinā sārdhaṃ yuddhaṃ kravyādāḥ sarva evāśu bhakṣayantastadā śavam | hasanto vividhaṃ ghoraṃ nādayanto vasundharām

हिन्दी अर्थ

वैशम्पायनजी कहते हैं—जनमेजय ! समस्त मांसभक्षी जीव उस समय शीघ्रतापूर्वक मृतकोंका मांस खाते और नाना प्रकारका घोर अट्रहास करते हुए पृथ्वीको प्रतिध्वनित करते थे

अध्याय 282

श्लोक 2

राक्षसाश्च पिशाचाश्च पिबन्तः शोणितं बहु ।आशिखं भुञ्जते राजञ्छवस्य पिशिताशनाः

rākṣasāśca piśācāśca pibantaḥ śoṇitaṃ bahu | āśikhaṃ bhuñjate rājañchavasya piśitāśanāḥ

हिन्दी अर्थ

राजन्‌ । कच्चा मांस खानेवाले राक्षस और पशाच बहुत-सा रक्त पीते और नखसे शिखतक मृतकोंका मांस खाकर तृप्त होते थे

अध्याय 282

श्लोक 3

नृत्यन्ति स्म तदा राजन् नगर्यां रणतोषिताः ।काका बलाका गृध्राश्च श्येना गोमायवस्तथा

nṛtyanti sma tadā rājan nagaryāṃ raṇatoṣitāḥ | kākā balākā gṛdhrāśca śyenā gomāyavastathā

श्लोक 3–5 का हिन्दी अर्थ

नरेश्वर ! उस नगरीमें उस पुद्धसे संतुष्ट हुए कौए, बक, गृध्र, श्येन और गीदड़ उस प्रमय नृत्य करते थे। भयानक राक्षस भी मृतकोंके गंस-भक्षणमें लगे थे । इसी बीचमें वीर निषाद एकलव्यको तरेतना प्राप्त हुई, समस्त पर्वतवासी निषादोंको मारा गया देख, कुपित हो गदा लेकर वह बलरामजीकी ओर त्रला

अध्याय 282

श्लोक 4

भक्षयन्तः प्रवर्तन्ते राक्षसाश्चैव दारुणाः ।एतस्मिन्नन्तरे वीरो निषादो लब्धसंज्ञकः

bhakṣayantaḥ pravartante rākṣasāścaiva dāruṇāḥ | etasminnantare vīro niṣādo labdhasaṃjñakaḥ

अर्थ श्लोक 3 के साथ

अध्याय 282

श्लोक 5

हतान् सर्वान् समालोक्य निषादान् नगचारिणः ।गदामादाय कुपितो राममेव जगाम ह

hatān sarvān samālokya niṣādān nagacāriṇaḥ | gadāmādāya kupito rāmameva jagāma ha

अर्थ श्लोक 3 के साथ

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श्लोक 6

जघान गदया राजञ्जत्रुदेशे निषादपः ।ततो रामो गदी राजन् निषादं बाहुशालिनम्

jaghāna gadayā rājañjatrudeśe niṣādapaḥ | tato rāmo gadī rājan niṣādaṃ bāhuśālinam

श्लोक 6–8 का हिन्दी अर्थ

राजन्‌! उस निषादराजने बलरामजीकी रँसलीपर गदासे आघात किया। तब गदाधारी मदमत्त डलधर बलरामने उस बाहुशाली क्रूरकर्मा निषादको दासे गहरी चोट पहुँचायी । फिर तो उन दोनोंमें गदाओंद्वारा मुल युद्ध होने लगा। महाबाहो! उन दोनोंके युद्धमें रस्पर मिलते हुए समस्त समुद्रोंकें गम्भीर घोषकी गाँति आकाशमें बड़ा भारी शब्द होने लगा

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श्लोक 7

आजघ्ने गदया क्रूरं मदमत्तो हलायुधः ।तयोश्च तुमुलं युद्धं गदाभ्यां समवर्तत

ājaghne gadayā krūraṃ madamatto halāyudhaḥ | tayośca tumulaṃ yuddhaṃ gadābhyāṃ samavartata

अर्थ श्लोक 6 के साथ

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श्लोक 8

आकाशे शब्द आसीत् तु तयोर्युद्धे महाभुज ।समुद्राणां यथा घोषः सर्वेषां सन्निगच्छताम्

ākāśe śabda āsīt tu tayoryuddhe mahābhuja | samudrāṇāṃ yathā ghoṣaḥ sarveṣāṃ sannigacchatām

अर्थ श्लोक 6 के साथ

अध्याय 282

श्लोक 9

कल्पक्षये महाराज शब्दः सुतुमुलोऽभवत् ।क्षोभितो नागराजश्च नागाः क्षोभं समाययुः

kalpakṣaye mahārāja śabdaḥ sutumulo'bhavat | kṣobhito nāgarājaśca nāgāḥ kṣobhaṃ samāyayuḥ

हिन्दी अर्थ

उध्याय: + १२९५ महाराज! प्रलयकालमें समुद्रोंका जो तुमुल घोष होता है, वैसा ही शब्द होने लगा। उससे नागराज शेष भी क्षुब्ध हो उठे और दिग्गजोंको भी महान्‌ क्षोभ प्राप्त हुआ

अध्याय 282

श्लोक 10

पृथिवी चान्तरिक्षं च सर्वं शब्दमयं बभौ ।ततः स पौण्ड्रको राजा सात्यकिं वृष्णिनन्दनम्

pṛthivī cāntarikṣaṃ ca sarvaṃ śabdamayaṃ babhau | tataḥ sa pauṇḍrako rājā sātyakiṃ vṛṣṇinandanam

श्लोक 10–11 का हिन्दी अर्थ

पृथ्वी और आकाश-ये सब-के-सब शब्दमय ही प्रतीत होने लगे। इसी बीचमें रणकुशल राजा पौण्ड्रकने तुरंत ही वृष्णिनन्दन सात्यकिपर गदासे आघात किया। राजन्‌ ! तब बलवान्‌ सात्यकिने भी मिथ्या वासुदेवपर गदाका प्रहार किया

अध्याय 282

श्लोक 11

गदयैव जघानाशु सत्वरं रणकोविदः ।युयुधानो बली राजन् वासुदेवं जघान ह

gadayaiva jaghānāśu satvaraṃ raṇakovidaḥ | yuyudhāno balī rājan vāsudevaṃ jaghāna ha

अर्थ श्लोक 10 के साथ

अध्याय 282

श्लोक 12

तयोश्च तुमुलः शब्दः प्रादुरासीन्महारणे ।चतुर्णां युध्यतां राजन् परस्परवधैषिणाम्

tayośca tumulaḥ śabdaḥ prādurāsīnmahāraṇe | caturṇāṃ yudhyatāṃ rājan parasparavadhaiṣiṇām

श्लोक 12–15 का हिन्दी अर्थ

राजन्‌ ! उन दोनोंके महासमरमें बड़ा भयंकर शब्द प्रकट होने लगा। एक-दूसरेके वधकी इच्छावाले इन चारों योद्धाओंका अत्यन्त भयानक शब्द समूचे ब्रह्माण्डमें क्षोभ उत्पन्न करनेवाला था। राजन्‌! तदनन्तर उस संग्रामके मुहानेपर प्रात:क्लालकी लाली प्रकट हुई, तारे प्रकाशहीन हो गये। इसी तरह अन्धकार क्षीण होने लगा। उष:कालके जाग्रतू होनेपर अन्धकार पूर्णत: मिट गया। भगवान्‌ सूर्यका उदय हुआ और चन्द्रमा क्षीण हो चले। राजन्‌ ! भगवान्‌ भास्करका उदय होनेपर उन चारों बाहुशाली वीरोंका महानू युद्ध होने लगा, जो देवताओं और असुरोंके संग्राम-सा प्रतीत होता था

अध्याय 282

श्लोक 13

ब्रह्माण्डक्षोभणो राजञ्छब्द आसीत् सुदारुणः ।ततो रजः प्रादुरभूत् तस्मिन् सङ्ग्राममूर्धनि

brahmāṇḍakṣobhaṇo rājañchabda āsīt sudāruṇaḥ | tato rajaḥ prādurabhūt tasmin saṅgrāmamūrdhani

अर्थ श्लोक 12 के साथ

अध्याय 282

श्लोक 14

तारका निष्प्रभा राजंस्तमस्येवं क्षयं गते ।उषसि प्रतिबुद्धायां ततो निःशेषतां ययौ

tārakā niṣprabhā rājaṃstamasyevaṃ kṣayaṃ gate | uṣasi pratibuddhāyāṃ tato niḥśeṣatāṃ yayau

अर्थ श्लोक 12 के साथ

अध्याय 282

श्लोक 15

उदितो भगवान् सूर्यश्चन्द्रश्च क्षयमाययौ ।तेषां युद्धं प्रादुरभूच्चतुर्णां बाहुशालिनाम् ।देवासुरसमं राजन्नुदिते भास्करे महत्

udito bhagavān sūryaścandraśca kṣayamāyayau | teṣāṃ yuddhaṃ prādurabhūccaturṇāṃ bāhuśālinām | devāsurasamaṃ rājannudite bhāskare mahat

अर्थ श्लोक 12 के साथ

स्रोत: local proofread transcription: Sanskrit shlokas of the Harivamsa (Harivamsha, Vishnu and Bhavishya parvas) from sanskritdocuments.org. One chapter per adhyaya; verse numbers as printed in the source (restarting in each adhyaya). Appendix sections are not included. · प्राप्त 19/10/2026

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स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

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6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
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व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

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