अध्याय 219
श्लोक 1
जगतेः सृष्ट्याः वर्णनं जगत्स्रष्टुमना देवश्चिन्तयामास पूर्वजः ।तस्य चिन्तयतो वक्त्रान्निःसृतः पुरुषः किल
jagateḥ sṛṣṭyāḥ varṇanaṃ jagatsraṣṭumanā devaścintayāmāsa pūrvajaḥ | tasya cintayato vaktrānniḥsṛtaḥ puruṣaḥ kila
श्लोक 1–5 का हिन्दी अर्थ
तुम अपने 'वरूपका विभाग करो।' ऐसा कहकर वे भगवान् वहीं प्न्तर्धान हो गये। भारत! जैसे दीपक बुझ जाय उसी कार शरीरसहित अन्तर्हित हुए उन भगवान्की कहीं कोई गति नहीं है। तदनन्तर भगवान्के मुखसे [कट हुए प्रभावशाली पुरुष भगवान् हिरण्यगर्भ, जिनका नाम वेदमन्त्रोंमें सुना गया है, भगवान्की कही ई पूर्वोक्त वाणीपर बास्म्बार विचार करने लगे। ये री सम्पूर्ण भुवनोंके अधिपति प्रजापति सबसे पहले त्पन्न हुए थे। अत: तभीसे यज्ञका प्रथम भाग उन्हींको दया जाता है ॥ रे—