Garuda Purana
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अध्याय 250 / 317

Book 2 - Adhyaya 11

11 श्लोक

पूर्ण अध्याय पाठ11 श्लोक

अध्याय 250

श्लोक 1

इति श्रीगारुडे महापु- उत्तरखण्डे द्वितीदृधर्मदृप्रेतकल्पे श्रीकृष्णगरुडसंवादे श्राद्धस्य तृप्तिदत्वादिनिरूपणं नाम दशमो ऽध्यायः श्रीगरुडमहापुराणम्- ११ गरुड उवाच ।मानुषत्वं लभेत्कस्मान्मृत्युमाप्नोति तत्कथम् ।म्रियते कः सुरश्रेष्ठ देहमाश्रित्य कुत्रचित्

iti śrīgāruḍe mahāpu- uttarakhaṇḍe dvitīdṛdharmadṛpretakalpe śrīkṛṣṇagaruḍasaṃvāde śrāddhasya tṛptidatvādinirūpaṇaṃ nāma daśamo 'dhyāyaḥ śrīgaruḍamahāpurāṇam- 11 garuḍa uvāca / mānuṣatvaṃ labhetkasmānmṛtyumāpnoti tatkatham / mriyate kaḥ suraśreṣṭha dehamāśritya kutracit

हिन्दी अर्थ

कायस्थ नामकी एक देवयोनि विशेष है।

English

He should give Agneya cow for the propitiation of Rudra and Yamya cow for the propitiation of Surya. He should give a vessel full of gingelly see for the propitiation of VUvedevas.

अध्याय 250

श्लोक 2

इन्द्रियाणि कुतो यान्ति ह्यस्पृश्यः स कथं भवेत् ।क्व कर्माणि कृतानीह कथं भुङ्क्ते प्रसर्पति

indriyāṇi kuto yānti hyaspṛśyaḥ sa kathaṃ bhavet / kva karmāṇi kṛtānīha kathaṃ bhuṅkte prasarpati

हिन्दी अर्थ

प्रेतकल्प प्रेतबाधाका स्वरूप तथा मुक्तिके उपाय ५२५

English

Then uttering svasti and giving sacred water (as that of the Ganges) he should dismiss the Br&hmats (i.e. ask them to go away as they liked)» while he himself should set his heart on the eight-syllabled Vifu.

अध्याय 250

श्लोक 3

प्रसादं कुरु मे मोहं छेत्तुमर्हस्यशेषतः ।काश्यपो ऽहं सुरश्रेष्ठ विनतागर्भ संभवः ।यमलोकं कथं यान्ति विष्णुलोकं च मानवाः

prasādaṃ kuru me mohaṃ chettumarhasyaśeṣataḥ / kāśyapo 'haṃ suraśreṣṭha vinatāgarbha saṃbhavaḥ / yamalokaṃ kathaṃ yānti viṣṇulokaṃ ca mānavāḥ

हिन्दी अर्थ

जो प्रशस्त एवं सुन्दर स्वरूप है, उस स्वरूपका यथाशक्ति दान देना चाहिए। दान न देनेपर प्राणी दर्शन सज्जन और सुकृतियोंको प्राप्त होता है। जो पशुके समान यमदूतोंके द्वारा पाशमें बाँधकर ले दुराचारी जन हैं, वे अत्यन्त भयंकर यमके स्वरूपको जाया जाता है। मनुष्य जैसा-जैसा कर्म करता है, देखकर भयभीत होकर हाहाकार करते हैं। उसी प्रकारकी योनिमें उसको जाना पड़ता है।

English

Muttering the mantra Vastrini lohakhandni jihfh ti he should light fire facing the south.

अध्याय 250

श्लोक 4

श्रीकृष्ण उवाच ।परस्य योषितं हृत्वा ब्रह्मस्वमपहृत्य च

śrīkṛṣṇa uvāca / parasya yoṣitaṃ hṛtvā brahmasvamapahṛtya ca

हिन्दी अर्थ

जिन मनुष्योंने दान किया है, उनके लिये वहाँपर वैसा ही उन योनियोंमें भोग भोगता हुआ वह सभी कहीं भी भय नहीं है। आये हुए सुकृती जनको देखकर प्रकारके लोकोंमें विचरण करता है । जब मनुष्य- यमराज अपने आसनका इसलिये परित्याग कर देते योनि प्राप्त होती है, तब भी लौकिक सुखोंको हैं कि यह सुकृती मेरे इस मण्डलका भेदन करके अनित्य जानकर प्राणीको धर्माचरण करना चाहिए।

English

Then making a Brahmi image with fifty Kuias he should burn the same in fire. He should perform the sacrifice usually done in the crematorium and oflfer the final oblation (Purnahuii).

अध्याय 250

श्लोक 5

अरण्ये निर्जने देशे जायते ब्रह्मराक्षसः ।हीनजातौ प्रजायेत रत्नानामपहारकः

araṇye nirjane deśe jāyate brahmarākṣasaḥ / hīnajātau prajāyeta ratnānāmapahārakaḥ

हिन्दी अर्थ

ब्रह्मलोकको जायगा।' दानसे धर्म सुलभ हो जाता है कृमि, भस्म अथवा विष्ठा ही शरीरकी परिणति और यममार्ग सुखावह हो जाता है। इस यमलोकका है। जो मनुष्य-शरीर प्राप्त करके भी धर्माचरण नहीं मार्ग अत्यन्त विशाल है, इसकी दुर्गमताके कारण करता, वह हाथमें दीपक रखता हुआ भी महाभयंकर इसका अनुगमन कोई नहीं करना चाहता। है वत्स! अन्धकूपमें गिरता है। मनुष्य-जन्म प्राणीको बहुत बड़े

English

Or he should not kindle fire but simply propitiate Earth» Yama and Rudra. He should invoke each one of them separately and give offering at the appropriate place.

अध्याय 250

श्लोक 6

यंयं काममभिध्यायेत्स तल्लिङ्गो ऽभिजायते ।नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः

yaṃyaṃ kāmamabhidhyāyetsa talliṅgo 'bhijāyate / nainaṃ chindanti śastrāṇi nainaṃ dahati pāvakaḥ

हिन्दी अर्थ

बिना दान-पुण्य किये प्राणीका धर्मराजके भवनमें पुण्यसे प्राप्त होता है। जो जीव इस योनिको पाकर पहुँचना सम्भव नहीं है। उस रौद्र मार्गमें महाभयंकर धर्मका आचरण करता है, उसे परम गतिको प्राप्ति यमके सेवक रहते हैं। एक-एक पुरके आगे एक-एक होती है। धर्मको व्यर्थ माननेवाला प्राणी दुःखपूर्वक हजार सेवकोंकी उपस्थिति रहती है। यातना देनेवाले जन्म-मरण प्राप्त करता है। है पक्षिन्! सैकड़ों बार

English

He should sacrifice caru mixed with mudga into the fire. He should offer sacred thread, rice and gingelly seeds to a Brahmana.

अध्याय 250

श्लोक 7

न चैनं क्लेदयन्त्यापो न शोषयति मारुतः ।वाक् चक्षुर्नासिका कर्णौ गुदं मूत्रस्य सञ्चरः

na cainaṃ kledayantyāpo na śoṣayati mārutaḥ / vāk cakṣurnāsikā karṇau gudaṃ mūtrasya sañcaraḥ

हिन्दी अर्थ

यमदूत पापीको प्राप्त करके पकाते हैं। वहाँपर यमदूत विभिन्न योनियोंमें जन्म लेनेके बाद प्राणीको मनुष्य- उसको एक मासतक रखते हैं। उस मासके बीतते ही योनि प्राप्त होती है, उसमें भी द्विज होना अत्यन्त दुर्लभ वह एक चौथाई शेष रह जाता है। है। जो व्यक्ति द्विज होकर धर्मका पालन करता है और हे कश्यपपुत्र ! जिन लोगोंने और्ध्वहैहिक क्रियामें विभिन्न ब्रतोंका आदर एवं श्रद्धापूर्वक अनुष्ठान करता

English

He should say; *Otb homage to Earlh\ Orii homage to Yama.

अध्याय 250

श्लोक 8

अण्डजादिकजन्तूनां छिद्राण्येतानि सर्वशः ।आनाभेर्मूर्धपर्यन्तमूर्ध्वच्छिद्राणि चाष्ट वै

aṇḍajādikajantūnāṃ chidrāṇyetāni sarvaśaḥ / ānābhermūrdhaparyantamūrdhvacchidrāṇi cāṣṭa vai

हिन्दी अर्थ

विहित दानोंको नहीं किया है, वे लोग बहुत कष्ट है, वह उस धर्मको ही कृपासे अमरत्व हस्तगत कर झेलते हुए उस मार्गमें चलते हैं। अतः प्राणीको लेता है। (अध्याय १९)

English

He should say; *Otb homage to Earlh\ Orii homage to Yama.

अध्याय 250

श्लोक 9

सन्तः सुकृतिनो मर्त्या ऊर्ध्वच्छिद्रेण यान्ति वै ।मृताहे वार्षिकं यावद्यथोक्तविधिना खग

santaḥ sukṛtino martyā ūrdhvacchidreṇa yānti vai / mṛtāhe vārṣikaṃ yāvadyathoktavidhinā khaga

हिन्दी अर्थ

प्रेतबाधाका स्वरूप तथा मुक्तिके उपाय श्रीगरुडने कहा- है प्रभो! प्रेतयोनिमें चले जाते हैं? चौरासी लाख योनियोंसे परिव्यापत, जो कोई भी प्राणी जाते हैं, वे कहाँ वास करते हैं 2 यम तथा हजारों भूतोंसे रक्षित होनेपर भी प्राणी प्रेतलोकसे निकलकर वे कैसे और किस स्थानमेंनरकसे निकलकर कैसे इस संसारमें विचरण करते

English

He should say; *Otb homage to Earlh\ Orii homage to Yama.

अध्याय 250

श्लोक 10

कुर्यात्सर्वाणि कर्माणि निर्धनो ऽपि हि मानवः ।देहे यत्र वसेज्जन्तुस्तत्र भुङ्क्ते शुभाशुभम्

kuryātsarvāṇi karmāṇi nirdhano 'pi hi mānavaḥ / dehe yatra vasejjantustatra bhuṅkte śubhāśubham

हिन्दी अर्थ

१-प्राप्तं सुकृतिनं दृष्टा स्थानाच्चलति सूर्यजः। एष मे मण्डलं भित्त्वा ब्रह्मलोकं प्रयास्यति॥ (१९।९) २-यथा यथा कृतं कर्म तां तां योनिं ब्रजेन्नरः। तत्तथैव च भुञ्जानो विचरेत् सर्वलोकगः॥ अशाश्वतं परिज्ञाय सर्वलोकोत्तरं सुखम्। यदा भवति मानुष्यं तदा धर्म समाचरेत् ॥

English

He should say; *Otb homage to Earlh\ Orii homage to Yama.

अध्याय 250

श्लोक 11

मनोवाक्कायजान्दोषांस्तथां भुङ्क्ते खगेश्वर ।मृतः स सुखमाप्नोति मायापाशैर्न बध्यते ।पाशबद्धो नरो यस्तु विकर्मनिरतो भवेत्

manovākkāyajāndoṣāṃstathāṃ bhuṅkte khageśvara / mṛtaḥ sa sukhamāpnoti māyāpāśairna badhyate / pāśabaddho naro yastu vikarmanirato bhavet

हिन्दी अर्थ

महापुण्यप्रभावेण मानुष्यं जन्म लभ्यते। यस्तत् प्राप्य चरेद्धर्म स गच्छेत् परमां गतिम्॥ अपि जानन् वृथा धर्म दुःखमायाति याति च॥

English

He should say; *Otb homage to Earlh\ Orii homage to Yama.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_garuDapurANa.txt · प्राप्त 3/6/2026

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शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

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व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

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