Chandogya Upanishad
78
अध्याय 78 / 154

Adhyāya 78

प्रपाठक खण्ड 78

2 श्लोक

पूर्ण अध्याय पाठ2 श्लोक

अध्याय 78

श्लोक 5.5.1

॥ पर्जन्यो वाव गौतमाग्निस्तस्य वायुरेव समिदभ्रं धूमो विद्युदर्चिरशनिरङ्गाराह्रादनयो विस्फुलिङ्गाः

|| parjanyo vāva gautamāgnistasya vāyureva samidabhraṃ dhūmo vidyudarciraśaniraṅgārāhrādanayo visphuliṅgāḥ

हिन्दी अर्थ

वह उनसे बोखा-“णच्छा, यै प्ातःकाक आपलोर्मोको इसका उत्तर दूगा ' तब दसरे दिन वे पूर्वाह्न हाथमे समिषा रकर राजाके पास गये । उनका उपनयन न करके ही रानाने उस विधाका उपदेश वह॒ उनसे बोल--भें आप. ोर्गोको इसका उच्चर प्रातःकार द्‌गा। इस प्रकार कहे जानेपर

English

'The altar is Parganya (the god of rain), O Gautama; its fuel is the air itself, the smoke the cloud, the light the lightning, the coals. the thunderbolt, the sparks the thunderings .

अध्याय 78

श्लोक 5.5.2

तस्मिन्नेतस्मिन्नग्नौ देवाः सोमँ राजानं जुह्वति तस्या आहुतेर्वर्षँ संभवति

tasminnetasminnagnau devāḥ somam̐ rājānaṃ juhvati tasyā āhutervarṣam̐ saṃbhavati

हिन्दी अर्थ

अश्वपति ओर ओपमन्यवका संवाद स॒ कथमुवाच १ इत्याद-- उपने किस भकार उपदेश दिथा ? यं तवमात्मानसुपास्से तस्मात्तव सुतं प्रसुतमासुतं राजा-- है उपमन्युकुमार ठम किस आलमाकी उपासना करते हो ¢ है पूज्य राजन्‌ युरोककी ही उपसना करता ह' देसा उसने उत्तर दिया । राजा-- वम निस आस्माकी उपासना ओपमन्यव है कमात्मानं ह भौपमन्यव तुम किंस वै वैश्वानरं त्वभरपास्स इति वैश्वानर आस्माकी उपासना करते नन्वयमन्याय आचार्यः स- शङ्का-क्रितभाचायं॑होकर

English

'On that altar the Devas offer Soma, the king (the moon). From that oblation rises rain .

स्रोत: https://sanskritdocuments.org/doc_upanishhat/chhandogya.itx · प्राप्त 3/6/2026

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शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।