Chandogya Upanishad
141
अध्याय 141 / 154

Adhyāya 141

प्रपाठक खण्ड 141

10 श्लोक

पूर्ण अध्याय पाठ10 श्लोक

अध्याय 141

श्लोक 8.2.1

॥ स यदि पितृलोककामो भवति संकल्पादेवास्य पितरः समुत्तिष्ठन्ति तेन पितृलोकेन सम्पन्नो महीयते

|| sa yadi pitṛlokakāmo bhavati saṃkalpādevāsya pitaraḥ samuttiṣṭhanti tena pitṛlokena sampanno mahīyate

हिन्दी अर्थ

अथ यदि च्ञीरोककामो भवति संकल्पादेवास्य जियः समुत्तिष्ठन्ति तेन च्लीरोकेन सम्पन्नो महीयते छीर यदि वह ख्ीरोफकी कामनावाख होता है तो उके संकल्य- मात्रसे ही र्या उसके पास उपस्थित हो जातो है उ श्चीरो्षत घम्प्न हो वह महिमान्वित होता है समानमन्यत्‌ । मातरो जनयि- रोष सव इसीके समान है। त्योऽतीताः सुखहेतभूताः साम- मातुगण अर्थात्‌ अतीत जन्म देन ति । न हि दःखेतभूतस पुलकी हेतुभूता है, क्योंकि दुःखकी

English

'Thus he who desires the world of the fathers, by his mere will the fathers come to receive him, and having obtained the world of the fathers, he is happy.

अध्याय 141

श्लोक 8.2.2

अथ यदि मातृलोककामो भवति संकल्पादेवास्य मातरः समुत्तिष्ठन्ति तेन मातृलोकेन सम्पन्नो महीयते

atha yadi mātṛlokakāmo bhavati saṃkalpādevāsya mātaraḥ samuttiṣṭhanti tena mātṛlokena sampanno mahīyate

हिन्दी अर्थ

वह्‌ जिस-जिस मदेशकी कामना करनेवाला होता है ओर निघ जिस भोगकी इच्छा करता है वह सव उसके संकल्पसे ही उसको ध हो नाता है । उससे सम्पन्न होकर वह महिमाको भाप होता है यं यमन्तं प्रदेश्षमभिकामो वह जिस-जिस अन्त यानी ६ प्रदेशकी कामना करनेवाला होता वति । यं च कामं कामयते ३ वीर जन

English

'And he who desires the world of the mothers, by his mere will the mothers come to receive him, and having obtained the world of the mothers, he is happy.

अध्याय 141

श्लोक 8.2.3

अथ यदि भ्रातृलोककामो भवति संकल्पादेवास्य भ्रातरः समुत्तिष्ठन्ति तेन भ्रातृलोकेन सम्पन्नो महीयते

atha yadi bhrātṛlokakāmo bhavati saṃkalpādevāsya bhrātaraḥ samuttiṣṭhanti tena bhrātṛlokena sampanno mahīyate

हिन्दी अर्थ

न्तः प्राप्तुमिष्टः कामश्च संक- भसत्यसे जाव त सत्यक उपासना जर नामाक्षरेपा्तना यथोक्तातमध्यानसाधनानु- उपयुक्त ात्मध्यानरूप साषनके वानं प्रति सांथकानाघ्रुसाह- भनुष्ठानके प्रति साधकं. उतसाह वे ये सत्यकाम अनृताच्छादनयुक्त है । सत्य होनेपर भी भनृत (मिथ्या) उनक्रा अपिधान (आच्छादन करनेवासा) है, क्योंकि इस प्राणीक। जो-नो सम्बन्धी यंस मरकर जाता है वह-वह उसे फिर देखनेके

English

'And he who desires the world of the brothers, by his mere will the brothers come to receive him, and having obtained the world of the brothers, he is happy.

अध्याय 141

श्लोक 8.2.4

अथ यदि स्वसृलोककामो भवति संकल्पादेवास्य स्वसारः समुत्तिष्ठन्ति तेन स्वसृलोकेन सम्पन्नो महीयते

atha yadi svasṛlokakāmo bhavati saṃkalpādevāsya svasāraḥ samuttiṣṭhanti tena svasṛlokena sampanno mahīyate

हिन्दी अर्थ

त इभे सत्याः कामा अनृता- वे ये सकाम अनूतापिभान याणामेव सतामरतं बाह्यविषयेषु आतमस्थित कामना्ोंका अग क दष ष्ण अषिन है जी, न्त भा कारण स्त्यकामनार्ओंकी प्राप्ति नदीं होती इसलिये वह भपिधानके समान अपिधान है वास्तविक

English

'And he who desires the world of the sisters, by his mere will the sisters come to receive him, and having obtained the world of the sisters, he is happy.

अध्याय 141

श्लोक 8.2.5

अथ यदि सखिलोककामो भवति संकल्पादेवास्य सखायः समुत्तिष्ठन्ति तेन सखिलोकेन सम्पन्नो महीयते

atha yadi sakhilokakāmo bhavati saṃkalpādevāsya sakhāyaḥ samuttiṣṭhanti tena sakhilokena sampanno mahīyate

हिन्दी अर्थ

अथ ये चास्येह जीवा ये च परेता यचान्यदिच्छन्न रभते सर्वं तदत्र गत्वा विन्दतेऽत्र ह्यस्येते सत्याः कामा अहरहर्गच्छन्त्य पतं ब्रह्मलोकं न विन्दन्त्यनृतेन हि अथ पुनय चास्य विदुषो तथा इस विद्वान्‌ प्रणीक़ो जो जन्तोजीवा जीवन्तीह पुत्रा जीव--इस लोकम जीवित पुत्र य रोके षस्रान्नपानादि रत्नादि वा जो वज्ञ एवं अक्न-पानादि चैर उञ्च युवण॑निधिको जिम प्रकार शक्द्रारा निधिक्ेतरको न नानने- वलि पुरूष निधिकरे उपर सम्चार

English

'And he who desires the world of the friends, by his mere will the friends come to receive him, and having obtained the world of the friends, he is happy.

अध्याय 141

श्लोक 8.2.6

अथ यदि गन्धमाल्यलोककामो भवति संकल्पादेवास्य गन्धमाल्ये समुत्तिष्ठतस्तेन गन्धमाल्यलोकेन सम्पन्नो महीयते

atha yadi gandhamālyalokakāmo bhavati saṃkalpādevāsya gandhamālye samuttiṣṭhatastena gandhamālyalokena sampanno mahīyate

हिन्दी अर्थ

वह्‌ य आत्मा हृदयम है दि अयम्‌ ( यह हदे है ) यदी इसका निरुक्त ( व्युखपत्ि ) हैः । इसीसे यद “हदय' है । ईइ भशर जाननेवाला पुर्ष प्रतिदिन स्वरगरोकको नाता है हदि हृदयपुण्डरीक आकराश- स्वहृदय आत्मेत्यवगन्तन्थमि- त्यमिप्रायः । अदर प्रत्यह-

English

'And he who desires the world of perfumes and garlands (gandhamâlya), by his mere will perfumes and garlands come to him, and having obtained the world of perfumes and garlands, he is happy.

अध्याय 141

श्लोक 8.2.7

अथ यद्यन्नपानलोककामो भवति संकल्पादेवास्यान्नपाने समुत्तिष्ठतस्तेनान्नपानलोकेन सम्पन्नो महीयते

atha yadyannapānalokakāmo bhavati saṃkalpādevāsyānnapāne samuttiṣṭhatastenānnapānalokena sampanno mahīyate

हिन्दी अर्थ

यह जो सम्परसाद है वष्ट इस खरीरसे उत्थान कर परम ज्योतिको । प्राप्त हो पने स्वद्पसे युक्त हो जाता है । यह भासा है, य्ह सृत एवं घभय ह ओर यही ब्रहम है-रेसा आचायने कडा । उस इस खषुपकाछे स्वेनात्मना सता सुपुप्कास्मे अपने भाता सतसे सम्पन्न हमा पुष ्षम्यक्‌ सम्पमः सन्सम्यक्‌ ्रसीदूपीति सूपे प्रसन्न होता है, अतः बह वे ये सकारः, तकार भौर "यम्‌" तीन अक्षर है । उनम नो “सकार, है वह अमृत है, जो (तकार है वह म्यं है ओर जो म्‌ उससे वह ॒दोनोका नियमन फरता है; क्योंकि इससे वह उन दोनोका

English

'And he who desires the world of food and drink, by his mere will food and drink come to him, and having obtained the world of food and drink, he is happy.

अध्याय 141

श्लोक 8.2.8

अथ यदि गीतवादित्रलोककामो भवति संकल्पादेवास्य गीतवादित्रे समुत्तिष्ठतस्तेन गीतवादित्रलोकेन सम्पन्नो महीयते

atha yadi gītavāditralokakāmo bhavati saṃkalpādevāsya gītavāditre samuttiṣṭhatastena gītavāditralokena sampanno mahīyate

हिन्दी अर्थ

तानि हवा एतानि ब्रह्मणो वेये ब्रहमके तीन नामाक्षर है शसः, ती, जौर यम' अर्थात्‌ सकार, नामाक्षराणि त्रीण्येतानि सतीय- तङ्कार ओर यम्‌ है तारम नो वह मत्य॑है घ्र जो “यम्‌, अक्षर है उस जक्षरसे अमृत जोर मत्य॑- संज्ञक पहले दोनों भक्षरोका

English

'And he who desires the world of song and music, by his mere will song and music come to him, and having obtained the world of song and music, he is happy.

अध्याय 141

श्लोक 8.2.9

अथ यदि स्त्रीलोककामो भवति संकल्पादेवास्य स्त्रियः समुत्तिष्ठन्ति तेन स्त्रीलोकेन सम्पन्नो महीयते

atha yadi strīlokakāmo bhavati saṃkalpādevāsya striyaḥ samuttiṣṭhanti tena strīlokena sampanno mahīyate

हिन्दी अर्थ

सेतुरूप आत्माकी उपासना अथ य आत्मा स सेतुर्धृतिरेषां खोकानामसम्भे- दाय नेतश्सेतुमहोरात्रे तरतो न जरा न श्र्युनं शोको जो आतमा है वह इन रोकेके असम्भेद ( पारस्परिक असंघरष) के ख्ि इन्दं विशेषरूपसे धारण कटनेवाख सेतु है। इस सेतुका दिनि-शत भतिक्रिमण नहीं करते । इसे न जरा, न मृध्यु, न शोक ओर । है उसके स्वरूपकी आगे कहे नाने- मोरतलक्त कहे इए गुर्णोसे ब्रह्मचय॑रूप गग! पतः साधनसे सम्बन्ध करानेके ल्य पुनः

English

'And he who desires the world of women, by his mere will women come to receive him, and having obtained the world of women, he is happy. 'Whatever object he is attached to, whatever object he desires, by his mere will it comes to him, and having obtained it, he is happy.

अध्याय 141

श्लोक 8.2.10

यं यमन्तमभिकामो भवति यं कामं कामयते सोऽस्य संकल्पादेव समुत्तिष्ठति तेन सम्पन्नो महीयते

yaṃ yamantamabhikāmo bhavati yaṃ kāmaṃ kāmayate so'sya saṃkalpādeva samuttiṣṭhati tena sampanno mahīyate

हिन्दी अर्थ

कारण है जर कार्यके द्वारा कारण- का अकिक्रमण नही किया जा सव॒ सत्के हौ कायं ई; भौर यस्माच पाण्मकार्यमान्भ्यादि- क्योंकि पापके छायं अन्धलादि शरीरवानको ही होते रै, भद्यरीर-

English

Whatever object he is attached to, whatever object he desires, by his mere will it comes to him, and having obtained it, he is happy.

स्रोत: https://sanskritdocuments.org/doc_upanishhat/chhandogya.itx · प्राप्त 3/6/2026

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शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।