Chandogya Upanishad
104
अध्याय 104 / 154

Adhyāya 104

प्रपाठक खण्ड 104

6 श्लोक

पूर्ण अध्याय पाठ6 श्लोक

अध्याय 104

श्लोक 6.7.1

॥ षोडशकलः सोम्य पुरुषः पञ्चदशाहानि माशीः काममपः पिबापोमयः प्राणो नपिबतो विच्छेत्स्यत इति

|| ṣoḍaśakalaḥ somya puruṣaḥ pañcadaśāhāni māśīḥ kāmamapaḥ pibāpomayaḥ prāṇo napibato vicchetsyata iti

हिन्दी अर्थ

शृणु दृष्टन्तमस्य-- इस विषयमे ए टष्टान्त ज्नीवन्छवेयो मध्येऽभ्याहन्याजीवन्लवेयाऽमेऽभ्याह- न्यालीवन्छवेतंस एष जीवेनास्मनानुप्रभूतः पेपोयभानो हे सोम्य यदि कोई इस मन्‌ वृक्षके मूर्मे आधात करे तो यह जीवित रहते हुए दी केवर रसल्लाव करेगा, यदि मध्यमे आधात करे तो भी यह जीवित रहते हुए केवर रस्ाव करेगा ओर यदि इसके

English

'Man (purusha), my son, consists of sixteen parts. Abstain from food for fifteen days, but drink as much water as you like, for breath comes from water, and will not be cut off, if you drink water.'

अध्याय 104

श्लोक 6.7.2

स ह पञ्चदशाहानि नशाथ हैनमुपससाद किं ब्रवीमि भो इत्यृचः सोम्य यजूँषि सामानीति स होवाच न वै मा प्रतिभान्ति भो इति

sa ha pañcadaśāhāni naśātha hainamupasasāda kiṃ bravīmi bho ityṛcaḥ somya yajūm̐ṣi sāmānīti sa hovāca na vai mā pratibhānti bho iti

हिन्दी अर्थ

हे सोम्य महतोऽनेकश्चाखा-, दे-सोम्य इस प्रकार सम्बोधित दियुकतस्य वृ्स्यासयेत्यगरतः करके सामने स्थित वृक्षो दिखलते क „ इए कहते है इस महन्‌--अनेकं अस्य यदेका शाखां जीवो जहात्यथ सा शुष्यति यदि इस वृक्षकी एक ॒शाखाको जीव छोड़ देता है तो वह पू नाती हे; यदि दूसरीको छोड़ देता है ततो वह सूख जाती है भैर तीसरीको छोड़ देता है तो वह भी सूरं जाती है, इसी प्रकार यदि

English

Svetaketu abstained from food for fifteen days. Then he came to his father and said: 'What shall I say?' The father said: 'Repeat the Rik, Yagus, and Sâman verses.' He replied: 'They do not occur to me, Sir.'

अध्याय 104

श्लोक 6.7.3

तँ होवाच यथा सोम्य महतोऽभ्या हितस्यैकोऽङ्गारः खद्योतमात्रः परिशिष्टः स्यात्तेन ततोऽपि न बहु दहेदेवँसोम्य ते षोडशानां कलानामेका कलातिशिष्टा स्यात्तयैतर्हि वेदान्नानुभवस्यशानाथ मे विज्ञास्यसीति

tam̐ hovāca yathā somya mahato'bhyā hitasyaiko'ṅgāraḥ khadyotamātraḥ pariśiṣṭaḥ syāttena tato'pi na bahu dahedevam̐somya te ṣoḍaśānāṃ kalānāmekā kalātiśiṣṭā syāttayaitarhi vedānnānubhavasyaśānātha me vijñāsyasīti

हिन्दी अर्थ

तस्यास्य यदेकं शाखां, उस इस वृक्षकी यदि रोगग्रस्तामाहतां वा जीवो जषा. रोगग्रस्त भथवा जात शाला छोड देता है- उस शाखामिं जिस प्रकार कि हस पृष्षके ङ दृष्टान्ते यह दिखलया गया है छि जीवेन । क्तो इषोऽष्को जीवसे युक्त वृक्ष अशयुष्ठं भौर

English

The father said to him: 'As of a great lighted fire one coal only of the size of a firefly may be left, which would not burn much more than this (i. e. very little), thus, my dear son, one part only of the sixteen parts (of you) is left, and therefore with that one part you do not remember the Vedas. Go and eat!

अध्याय 104

श्लोक 6.7.4

स हशाथ हैनमुपससाद तँ ह यत्किंच पप्रच्छ सर्वँह प्रतिपेदे

sa haśātha hainamupasasāda tam̐ ha yatkiṃca papraccha sarvam̐ha pratipede

हिन्दी अर्थ

हे सोप्य ! टीक्‌ इसी प्रकार तू जान कि जीवसे रहित हीनेप यह शरीर मर नावा है, जीव नही मरताः- रसा आरूणिने क वह जो यह्‌ अणिमा है एतद्रेप ही यह्‌ सब है ¦! वह सव्य है, वह होवाच । जीवापेतं जीववियुक्तं जीवो भ्रियत इति । कार्यशेषे च सु्ोस्थितस्य ममेदं कायशेषम- हे सोम्य ! ठीक इसी प्रकार तू जान किं जीवापेत- जीवसे वियुक्त हुआ यह शरीर ही मरता

English

'Then wilt thou understand me.' Then Svetaketu. ate, and afterwards approached his father. And whatever his father asked him, he knew it all by heart. Then his father said to him:

अध्याय 104

श्लोक 6.7.5

तँ होवाच यथा सोम्य महतोऽभ्याहितस्यैकमङ्गारं खद्योतमात्रं परिशिष्टं तं तृणैरुपसमाधाय प्राज्वलयेत्तेन ततोऽपि बहु दहेत्

tam̐ hovāca yathā somya mahato'bhyāhitasyaikamaṅgāraṃ khadyotamātraṃ pariśiṣṭaṃ taṃ tṛṇairupasamādhāya prājvalayettena tato'pi bahu dahet

हिन्दी अर्थ

पकादशाखण्डमाष्यं सस्पणेम्‌ ॥ ११ ५ न्यग्रोधफलके टष्टान्त द्वारा उपदेश यदेतसतयक्षीकतमिच्छसि- यदि तू इस बातको प्रलक् इस (सामनेवाटे वटवृक्ष) से एक बड़का फर ठे भा । इवेतकेत्‌- “भगवन्‌ यह ले भाया ॥ आरुणि ¶से पोड़' खेत०-- -मगवन्‌ फोट दिथा । आरुणि- इसमे क्या देखता है ?

English

'As of a great lighted fire one coal of the size of a firefly, if left, may be made to blaze up again by putting grass upon it, and will thus burn more than this,

अध्याय 104

श्लोक 6.7.6

एवँ सोम्य ते षोडशानां कलानामेका कलातिशिष्टाभूत्सान्नेनोपसमाहिता प्राज्वाली तयैतर्हि वेदाननुभवस्यन्नमयँहि सोम्य मन आपोमयः प्राणस्तेजोमयी वागिति तद्धास्य विजज्ञाविति विजज्ञाविति

evam̐ somya te ṣoḍaśānāṃ kalānāmekā kalātiśiṣṭābhūtsānnenopasamāhitā prājvālī tayaitarhi vedānanubhavasyannamayam̐hi somya mana āpomayaḥ prāṇastejomayī vāgiti taddhāsya vijajñāviti vijajñāviti

हिन्दी अर्थ

अतोऽस्मान्मइतो न्यग्रोधात्‌ इन महान्‌ वलडृषसे षक फल स्लमेकमाहरयुक्स्तथा चकार वैसा ही किया जोर बोल-- 6 इस प्रकार फर दिश्वसनेवाले उश्से तब उससे ( आरुणिने › कडा-हे सोम्य इस वरबीजकी निस अणिमाको तू नहीं देखता है सोम्य उस अणिमाका दी यह इतना बड़ा वयवृक्ष खड़ा हा है । दे सोम्य । त्‌ इस कथने शद्धा करः तं पुत्रं होवाच बटधानायां उस तसे ( आरुणिने › कडा- निन्य यं बटमीलाणिमानं है सोम्य वटके दनिके टृटनेपर देसं ५ निभालयसे न देता, तथापि है सोम्य देख,

English

'Thus, my dear son, there was one part of the sixteen parts left to you, and that, lighted up with food, burnt up, and by it you remember now the Vedas.' After that, he understood what his father meant when he said: 'Mind, my son, comes from food, breath from water, speech from fire.' He understood what he said, yea, he understood it .

स्रोत: https://sanskritdocuments.org/doc_upanishhat/chhandogya.itx · प्राप्त 3/6/2026

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शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।