Agni Purana
326
अध्याय 326 / 381

Adhyaya 327

3 श्लोक

पूर्ण अध्याय पाठ3 श्लोक

अध्याय 326

श्लोक 1

छन्दःसारः अग्निर् उवाच छन्दो वक्ष्ये मूलजैस्तैः पिङ्गलोक्तं यथाक्रमम् ।सर्वादिमध्यान्तगणौ म्लौ द्वौ जौ स्तौ त्रिकौ गणाः

chandaḥsāraḥ agnir uvāca chando vakṣye mūlajaistaiḥ piṅgaloktaṃ yathākramam / sarvādimadhyāntagaṇau mlau dvau jau stau trikau gaṇāḥ

हिन्दी अर्थ

२. आचार्य वामनने भी अग्निपुराणोक्त इन्हीं तीन गद्यभेदोंका उल्लेख किया है। यथा--' गद्यं वृत्तगन्धि चूर्णमुत्कलिकाप्रायं च।'

English

SV. 1.73a; 2.1096a.

अध्याय 326

श्लोक 2

१ धनस्यान्नाथमेकन्त्विति ख॥ :प् १८४ ह्रस्वो गुरुर्वा पादान्ते पूर्वो योगाद् विसर्गतः ।अनुस्वाराद्व्यञ्जनात् स्थात् जिह्वामूलीयतस् तथा

1 dhanasyānnāthamekantviti kha.. :p 184 hrasvo gururvā pādānte pūrvo yogād visargataḥ / anusvārādvyañjanāt sthāt jihvāmūlīyatas tathā

हिन्दी अर्थ

३. इसी भावकी छाया लेकर वामनने १।३ के २४-२५बें सूत्रोंका निर्माण किया है-- अनाविद्धललितपदं चूर्णम्' “ विपरीतमुत्कलिकाप्रायम्'

English

SV. 1.73a; 2.1096a.

अध्याय 326

श्लोक 3

उपाध्मानीयतो दीर्घो गुरुर्ग्लौ नौ गणाविह ।वसवोष्टौ च चत्वारो वेदादित्यादिलोपतः

upādhmānīyato dīrgho gururglau nau gaṇāviha / vasavoṣṭau ca catvāro vedādityādilopataḥ

हिन्दी अर्थ

४. वामनने जिसमें किसी पद्यका भाग प्रतीत होता हो, ऐसे गद्यको ' वृत्तगन्धि' कहा है । यथा--' पद्यभागवद्वृत्तगन्धि' ॥ १।३

English

SV. 1.73a; 2.1096a.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_agnipurANa.txt · प्राप्त 3/6/2026

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शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।