Agni Purana
3
अध्याय 3 / 381

Adhyaya 3

आयुर्वेदसार

3 श्लोक

पूर्ण अध्याय पाठ3 श्लोक

अध्याय 3

श्लोक 1

धर्मार्थकाममोक्षाणाम् आरोग्यं मूलमुत्तमम् ।रोगास्तस्यापहर्तारः श्रेयसो जीवितस्य च

dharmārthakāmamokṣāṇām ārogyaṃ mūlamuttamam | rogāstasyāpahartāraḥ śreyaso jīvitasya ca

हिन्दी अर्थ

धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष — इन सबकी जड़ है आरोग्य (स्वास्थ्य)। रोग इस जड़ को नष्ट करने वाले हैं — जीवन के सभी श्रेयों को नष्ट करने वाले।

English

Health is the supreme root of dharma, wealth, pleasure, and liberation. Diseases are the destroyers of this root — of all that is good in life.

अध्याय 3

श्लोक 2

हिताहितं सुखं दुःखं आयुस्तस्य हिताहितम् ।मानं च तच्च यत्रोक्तम् आयुर्वेदः स उच्यते

hitāhitaṃ sukhaṃ duḥkhaṃ āyustasya hitāhitam | mānaṃ ca tacca yatroktam āyurvedaḥ sa ucyate

हिन्दी अर्थ

जो हित-अहित, सुख-दुःख, आयु के लिए हितकर-अहितकर और उनके मान को बताता है — वह आयुर्वेद कहलाता है।

English

That which tells us what is beneficial and what is harmful, what is happy life and what is suffering, what lengthens life and what shortens it — that is called Ayurveda.

अध्याय 3

श्लोक 3

आयुर्वेदो वेदशाखा प्राणिनां प्राणरक्षणी ।आहारनियमो मूलं रोगाणां चापनोदनम्

āyurvedo vedaśākhā prāṇināṃ prāṇarakṣaṇī | āhāraniyamo mūlaṃ rogāṇāṃ cāpanodanam

हिन्दी अर्थ

आयुर्वेद वेद की शाखा है, प्राणियों के प्राण की रक्षक। आहार-नियम मूल है; रोगों का निवारण इसी से होता है।

English

Ayurveda is a branch of the Vedas, the protector of life for all beings. Regulation of diet is the root; diseases are dispelled by it.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_agnipurANa.txt · प्राप्त 3/6/2026

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शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।