Agni Purana
228
अध्याय 228 / 381

Adhyaya 229

13 श्लोक

पूर्ण अध्याय पाठ13 श्लोक

अध्याय 228

श्लोक 1

शकुनानि पुष्कर उवाच औषधानि च युक्तानि धान्यं कृष्णमशोभनं ।कार्पासं तृणशुष्कञ्च गोमयं वै धनानि च

śakunāni puṣkara uvāca auṣadhāni ca yuktāni dhānyaṃ kṛṣṇamaśobhanaṃ / kārpāsaṃ tṛṇaśuṣkañca gomayaṃ vai dhanāni ca

हिन्दी अर्थ

संगठित वीरोंमेंसे जो मारे जायँ अथवा घायल

English

If the (king thinks that the) warriors had been well- cared for and the servants well supported and he feels, "I have a strong army and I am capable of protecting the central (army)", he should go with them and move into the camp.

अध्याय 228

श्लोक 2

अङ्गारं गुडसर्जौ च(१) मुण्डाभ्यक्तञ्च नग्नकं ।अयः पङ्कं चर्मकेशौ उन्मत्तञ्च नपुंसकं

aṅgāraṃ guḍasarjau ca(1) muṇḍābhyaktañca nagnakaṃ / ayaḥ paṅkaṃ carmakeśau unmattañca napuṃsakaṃ

हिन्दी अर्थ

हों, उनको युद्धभूमिसे दूर हटाना, युद्धके भीतर जाकर हाथियोंको पानी पिलाना तथा हथियार पहुँचाना -ये सब पैदल सिपाहियोंके कार्य हैं। अपनी सेनाका भेदन करनेकी इच्छा रखनेवाले शत्रुओंसे उसकी रक्षा करना और संगठित होकर युद्ध करनेवाले शत्रु-वीरोँका व्यूह तोड़ डालना यह ढाल लेकर युद्ध करनेवाले योद्धाओंका कार्य बताया गया है। युद्धमें विपक्षी योद्धाओंको मार

English

In the early and advanced winter it should consist of chariots and cavalry, while it should consist of four divisions of an army (cavalry, infantry etc. ) in the spring and autumn.

अध्याय 228

श्लोक 3

चण्डालश्वपचाद्यानि नरा बन्धनपालकाः ।गर्भिणी स्त्री च विधवाः पिण्यकादीनि वै मृतं

caṇḍālaśvapacādyāni narā bandhanapālakāḥ / garbhiṇī strī ca vidhavāḥ piṇyakādīni vai mṛtaṃ

हिन्दी अर्थ

भगाना धनुर्धर वीरोंका काम है। अत्यन्त घायल हुए योद्धाको युद्धभूमिसे दूर ले जाना, फिर युद्धमें आना तथा शत्रुकी सेनामें त्रास उत्पन्न करना-- यह सब रथी वीरोंका कार्य बतलाया जाता है।

English

An army consisting of a large number of infantry would always win the enemies. The throbbing (of the muscles) on the right side (of the body) would be commendable.

अध्याय 228

श्लोक 4

तुषभस्मकपालास्थिभिन्नभाण्डमशस्तकं ।अशस्तो वाद्यशब्दश् च भिन्नभैरवझर्झरः

tuṣabhasmakapālāsthibhinnabhāṇḍamaśastakaṃ / aśasto vādyaśabdaś ca bhinnabhairavajharjharaḥ

हिन्दी अर्थ

संगठित व्यूहको तोड़ना, टूटे हुएको जोड़ना तथा चहारदीवारी, तोरण (सदर दरवाजा), अट्टालिका और वृक्षोंको भङ्ग कर डालना-यह अच्छे हाथीका पराक्रम है। ऊँची-नीची भूमिको पैदल सेनाके लिये उपयोगी जानना चाहिए, रथ और घोड़ोंके लिये समतल भूमि उत्तम है तथा कीचड़से भरी हुई युद्धभूमि हाथियोंके लिये उपयोगी बतायी गयी है॥ ४४-४९ ३ ॥

English

So also the palpitation on the left back and the heart and mark of mole (on the left side) should be known as not commen¬ dable. While the contrary to what has been told on the left side would be auspicious for women.

अध्याय 228

श्लोक 5

एहीति पुरतः शब्दः शस्यते न तु पृष्ठतः ।गच्छेति पश्चाच्छब्दो ऽग्र्यः पुरस्तात्तु विगर्हितः

ehīti purataḥ śabdaḥ śasyate na tu pṛṣṭhataḥ / gaccheti paścācchabdo 'gryaḥ purastāttu vigarhitaḥ

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार व्यूह-रचना करके जब सूर्य पीठको

English

The sound "come" in front is praised, but not behind; "go" behind is chief, but in front it is censured;

अध्याय 228

श्लोक 6

क्व यासि तिष्ठ मा गच्छ किन्ते तत्र गतस्य च ।अनिष्टशब्दा मृत्यर्थं क्रव्यादश् च ध्वजादिगः

kva yāsi tiṣṭha mā gaccha kinte tatra gatasya ca / aniṣṭaśabdā mṛtyarthaṃ kravyādaś ca dhvajādigaḥ

हिन्दी अर्थ

अनुकूल हों, सामनेसे मन्द-मन्द हवा आ रही हो, उस समय उत्साहपूर्वक युद्ध करे तथा नाम एवं गोत्रकी प्रशंसा करते हुए सम्पूर्ण योद्धाओमें उत्तेजना भरता रहे। साथ ही यह बात भी बताये कि 'युद्धमें विजय होनेपर उत्तम-उत्तम भोगोंको प्राप्ति होगी और मृत्यु हो जानेपर स्वर्गका सुख मिलेगा।' वीर पुरुष शत्रुओंको जीतकर मनोवाञ्छित भोग प्राप्त करता है और युद्धमें

English

"where are you going — stay, do not go — what is it to you going there?" — inauspicious sounds mean death; a flesh-eater on a banner and the like;

अध्याय 228

श्लोक 7

स्खलनं वाहनानाञ्च शस्त्रभङ्गस्तथैव च ।शिरोघातश् च द्वाराद्यैश्च्छत्रवासादिपातनं

skhalanaṃ vāhanānāñca śastrabhaṅgastathaiva ca / śiroghātaś ca dvārādyaiścchatravāsādipātanaṃ

हिन्दी अर्थ

प्राणत्याग करनेपर उसे परमगति मिलती है । इसके सिवा वह जो स्वामीका अन्न खाये रहता है, उसके ऋणसे छुटकारा पा जाता है; अतः युद्धके समान श्रेष्ठ गति दूसरी कोई नहीं है। शूरवीरोंके

English

stumbling of vehicles, breaking of weapons, a blow on the head from a door and the like, and fall of umbrella or dwelling;

अध्याय 228

श्लोक 8

हरिमभ्यर्च्य संस्तुत्य स्यादमङ्गल्यनाशनं ।द्वितीयन्तु ततो दृष्ट्वा विरुद्धं प्रविशेद्गृहं

harimabhyarcya saṃstutya syādamaṅgalyanāśanaṃ / dvitīyantu tato dṛṣṭvā viruddhaṃ praviśedgṛhaṃ

हिन्दी अर्थ

शरीरसे जब रक्त निकलता है, तब वे पापमुक्त हो जाते हैं। युद्धमें जो शस्त्र-प्रहार आदिका कष्ट सहना पड़ता है, वह बहुत बड़ी तपस्या है। रणमें प्राणत्याग करनेवाले शूरवीरके साथ हजारों सुन्दरी अप्सराएँ चलती हैं। जो सैनिक हतोत्साह होकर युद्धसे पीठ दिखाते हैं, उनका सारा पुण्य मालिकको मिल जाता है और स्वयं उन्हें पग- पगपर एक-एक ब्रह्महत्याके पापका फल प्राप्त

English

having worshipped and praised Hari, inauspiciousness is destroyed; then having seen a second one, one should enter the house against it.

अध्याय 228

श्लोक 9

श्वेताः सुमनसः श्रेष्ठाः पूर्णकुम्भो महोत्तमः ।मांसं मत्स्या दूरशब्दा वृद्ध एकः पशुस्त्वजः

śvetāḥ sumanasaḥ śreṣṭhāḥ pūrṇakumbho mahottamaḥ / māṃsaṃ matsyā dūraśabdā vṛddha ekaḥ paśustvajaḥ

हिन्दी अर्थ

होता है। जो अपने सहायकोंको छोड़कर चल देता है, देवता उसका विनाश कर डालते हैं। जो युद्धसे पीछे पैर नहीं हटाते, उन बहादुरोंके लिये अश्वमेध-यज्ञका फल बताया गया है

English

White flowers are excellent; a full pot is greatest; meat, fish, distant sounds, a single old animal, a goat,

अध्याय 228

श्लोक 10

गावस्तरङ्गमा नागा देवश् च ज्वलितो ऽनलः ।दूर्वार्द्रगोमयं वेश्या स्वर्णरूप्यञ्च रत्नकं

gāvastaraṅgamā nāgā devaś ca jvalito 'nalaḥ / dūrvārdragomayaṃ veśyā svarṇarūpyañca ratnakaṃ

हिन्दी अर्थ

यदि राजा धर्मपर दृढ़ रहे तो उसकी विजय होती है। योद्धाओंको अपने समान योद्धाओंके साथ ही युद्ध करना चाहिए। हाथीसवार आदि सैनिक हाथीसवार आदिके ही साथ युद्ध करें। भागनेवालोंको न मारें। जो लोग केवल युद्ध देखनेके लिये आये हों, अथवा युद्धमें सम्मिलित होनेपर भी जो शस्त्रहीन एवं भूमिपर गिरे हुए हों, उनको भी नहीं मारना चाहिए। जो योद्धा

English

cows, horses, elephants, a god, a blazing fire, durva, wet cow-dung, a courtesan, gold, silver and jewels,

अध्याय 228

श्लोक 11

वचासिद्धार्थकौषध्यो मुद्ग आयुधखड्गकं ।छत्रं पीठं राजलिङ्गं शवं रुदितवर्जितं

vacāsiddhārthakauṣadhyo mudga āyudhakhaḍgakaṃ / chatraṃ pīṭhaṃ rājaliṅgaṃ śavaṃ ruditavarjitaṃ

हिन्दी अर्थ

शान्त हो या थक गया हो, नींदमें पड़ा हो तथा नदी या जंगलके बीचमें उतरा हो, उसपर भी प्रहार न करे। दुर्दिनमें शत्रुके नाशके लिये कूटयुद्ध (कपटपूर्ण संग्राम) करे। दोनों बाहे ऊपर उठाकर

English

vacha, mustard, herbs, mudga, weapon, sword, umbrella, seat, royal insignia, a corpse without weeping,

अध्याय 228

श्लोक 12

फलं घृटं दधि पयो अक्षतादर्शमाक्षिकं ।शङ्खं इक्षुः शुभं वाक्यं भक्तवादितगीतकं

phalaṃ ghṛṭaṃ dadhi payo akṣatādarśamākṣikaṃ / śaṅkhaṃ ikṣuḥ śubhaṃ vākyaṃ bhaktavāditagītakaṃ

हिन्दी अर्थ

जोर-जोरसे पुकारकर कहे-- यह देखो, हमारे मित्रोंकी बहुत बड़ी सेना आ पहुँची; शत्रुओंकी सेनाका संचालन करनेवाला मार गिराया गया। यह सेनापति भी मौतके घाट उतर गया। साथ ही शत्रुपक्षके राजाने भी प्राणत्याग कर

English

fruit, ghee, curds, milk, unbroken rice, mirror, honey, conch, sugarcane, auspicious words, devoted music and song,

अध्याय 228

श्लोक 13

१ गुडसर्पौ चेति ग॥ , घ॥ , ञ॥ च :प् ३३४ गम्भीरमेघस्तनितं तडित्तुष्टिश् च मानसी ।एकतः सर्वलिङ्गानि मनसस्तुष्टिरेकतः

1 guḍasarpau ceti ga.. , gha.. , ña.. ca :p 334 gambhīrameghastanitaṃ taḍittuṣṭiś ca mānasī / ekataḥ sarvaliṅgāni manasastuṣṭirekataḥ

हिन्दी अर्थ

भागते हुए विपक्षी योद्धाओंको अनायास ही मारा जा सकता है। धर्मके जाननेवाले परशुरामजी ! शत्रुओंको मोहित करनेके लिये कृत्रिम धूपकी

English

a deep thunder of clouds and lightning, and mental contentment — on one side all signs, on one side mental satisfaction.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_agnipurANa.txt · प्राप्त 3/6/2026

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शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।