Agni Purana
152
अध्याय 152 / 381

Adhyaya 152

5 श्लोक

पूर्ण अध्याय पाठ5 श्लोक

अध्याय 152

श्लोक 1

गृहस्थवृत्तिः पुष्कर उवाच आजीवंस्तु यथोक्तेन ब्राह्मणः स्वेन कर्मणा ।क्षत्रविट्शूद्रधर्मेण जीवेन्नैव तु शूद्रजात्

gṛhasthavṛttiḥ puṣkara uvāca ājīvaṃstu yathoktena brāhmaṇaḥ svena karmaṇā / kṣatraviṭśūdradharmeṇa jīvennaiva tu śūdrajāt

हिन्दी अर्थ

आइये। ॐ आकाशरेबति! आइये। ३ हिमालयपर विचरनेवाली देवि! आइये। 3३» रुरुमर्दिनि! असुरक्षयंकरि (असुरविनाशिनि) ! आकाशगामिनि देवि! विरोधियोंको पाशसे बाँधिये, बाँधिये।

English

A brahmin may engage himself in agriculture, trade, keeping cows and usury. But he should abstain from taking milk, jaggery, salt and meat and using red-dye.

अध्याय 152

श्लोक 2

कृषिबाणिज्यगोरक्ष्यं कुशीदञ्च द्विजश् चरेत् ।गोरसं गुडलवणलाक्षामांसानि वर्जयेत्

kṛṣibāṇijyagorakṣyaṃ kuśīdañca dvijaś caret / gorasaṃ guḍalavaṇalākṣāmāṃsāni varjayet

हिन्दी अर्थ

अङ्कुशसे आच्छादित कीजिये, आच्छादित कीजिये। अपनी प्रतिज्ञापर स्थिर रहिये। ३ मण्डलमें प्रवेश कराइये। ३ शत्रुको पकड़िये और उसका पैर भी बाँध दीजिये। हमें सतानेवाले समस्त दुष्ट

English

One gets purified from the sin accruing from ploughing the earth and cutting the plants and killing insects and ants by doing a sacrifice. The cultivator (gets free from the sin) by worshipping the god.

अध्याय 152

श्लोक 3

१ श्रीजीवनञ्च तत्र स्यात् प्रोक्तमिति ग॥ , घ॥ , ङ॥ , ञ॥ च :प् ११९ भूमिं भित्वौषधीश्छित्वा हुत्वा कोटपिपीलिकान् ।पुनन्ति खलु यज्ञेन कर्षका देवपूजनात्

1 śrījīvanañca tatra syāt proktamiti ga.. , gha.. , ṅa.. , ña.. ca :p 119 bhūmiṃ bhitvauṣadhīśchitvā hutvā koṭapipīlikān / punanti khalu yajñena karṣakā devapūjanāt

हिन्दी अर्थ

ग्रहोंको बाँध दीजिये। ३ दिशाओंको बाँधिये। ॐ विदिशाओंको बाँधिये। नीचे बाँधिये। ३ सब ओरसे बाँधिये। ३» भस्मसे, जलसे, मिट्टीसे अथवा सरसोंसे सबको आविष्ट कोजिये।

English

A virtuous man (should yoke) eight bullocks, one who lives by any means six bullocks, wicked men four bullocks and those who have transgressed rightful living two bullocks.

अध्याय 152

श्लोक 4

हलमष्टगवं धर्म्यं षड्गवं जीवितार्थिनां ।चर्तुर्गवं नृशंसानां द्विगवं धर्मघातिनां

halamaṣṭagavaṃ dharmyaṃ ṣaḍgavaṃ jīvitārthināṃ / carturgavaṃ nṛśaṃsānāṃ dvigavaṃ dharmaghātināṃ

हिन्दी अर्थ

यह “जया' नामक पदमाला है, जो समस्त कर्माको सिद्ध करनेवाली है। इसके द्वारा होम करनेसे तथा इसका जप एवं पाठ आदि करनेसे सदा ही युद्धमें विजय प्राप्त होती है। अट्राईस भुजाओंसे युक्त चामुण्डा देवीका ध्यान करना चाहिए। उनके दो हाथोंमें तलवार और खेटक हैं। दूसरे दो हाथोंमें गदा और दण्ड हैं। अन्य दो हाथ धनुष और बाण धारण करते हैं। अन्य दो हाथ

English

One should live by picking grains in the field and on alms got without solicitation. (One may live) on alms got by solici-

अध्याय 152

श्लोक 5

ऋतामृताभ्यां जीवेत मृतेन प्रमृतेन वा ।सत्यानृताभ्यामपिवा न स्ववृत्त्या कदा च न

ṛtāmṛtābhyāṃ jīveta mṛtena pramṛtena vā / satyānṛtābhyāmapivā na svavṛttyā kadā ca na

हिन्दी अर्थ

मुष्टि और मुद्गरसे युक्त हैं। दूसरे दो हाथोंमें शङ्क और खड्ग हैं। अन्य दो हाथोंमें ध्वज और वत्र हैं। दूसरे दो हाथ चक्र और परशु धारण करते हैं। अन्य दो हाथ डमरू और दर्पणसे सम्पन्न हैं।

English

One should live by picking grains in the field and on alms got without solicitation. (One may live) on alms got by solici-

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_agnipurANa.txt · प्राप्त 3/6/2026

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शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।