Agni Purana
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अध्याय 1 / 381

Adhyaya 1

धर्मज्ञान

3 श्लोक

पूर्ण अध्याय पाठ3 श्लोक

अध्याय 1

श्लोक 1

अनित्यानि शरीराणि विभवो नैव शाश्वतः ।नित्यं सन्निहितो मृत्युः कर्तव्यो धर्मसंग्रहः

anityāni śarīrāṇi vibhavo naiva śāśvataḥ | nityaṃ sannihito mṛtyuḥ kartavyo dharmasaṃgrahaḥ

हिन्दी अर्थ

शरीर अनित्य हैं, वैभव शाश्वत नहीं, मृत्यु सदा समीप है — इसलिए धर्म का संग्रह करना चाहिए।

English

Bodies are impermanent, wealth is never eternal, death is always near — therefore one should gather dharma.

अध्याय 1

श्लोक 2

विद्या विनयसम्पन्ने ब्राह्मणे गवि हस्तिनि ।शुनि चैव श्वपाके च पण्डिताः समदर्शिनः

vidyā vinayasampanne brāhmaṇe gavi hastini | śuni caiva śvapāke ca paṇḍitāḥ samadarśinaḥ

हिन्दी अर्थ

पण्डित लोग विद्या और विनय से सम्पन्न ब्राह्मण में, गाय में, हाथी में, कुत्ते में और चाण्डाल में भी समान दृष्टि रखते हैं।

English

The learned see equally in a Brahmin endowed with knowledge and humility, a cow, an elephant, a dog, and one who cooks dogs.

अध्याय 1

श्लोक 5

आयुर्वेदो वेदशाखा प्राणिनां प्राणरक्षणी ।आहारनियमो मूलं रोगाणां चापनोदनम्

āyurvedo vedaśākhā prāṇināṃ prāṇarakṣaṇī | āhāraniyamo mūlaṃ rogāṇāṃ cāpanodanam

हिन्दी अर्थ

आयुर्वेद वेद की शाखा है, प्राणियों के प्राण की रक्षक। आहार-नियम मूल है; रोगों का निवारण इसी से होता है।

English

Ayurveda is a branch of the Vedas, the protector of life for all beings. Regulation of diet is the root; diseases are dispelled by it.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_agnipurANa.txt · प्राप्त 3/6/2026

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शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।