क्रोधkrodha · Anger
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परिचयOverview
इच्छाओं के टूटने से भड़कने वाले क्रोध के चक्र को समझना और विवेक द्वारा शांति पाना।
Understanding how thwarted desire sparks rage, and mastering the pause that protects clarity and wisdom.
संबंधित श्लोकRelated verses
ध्यायतो विषयान्पुंसः सङ्गस्तेषूपजायते । सङ्गात्संजायते कामः कामात्क्रोधोऽभिजायते ॥ क्रोधाद्भवति संमोहः संमोहात्स्मृतिविभ्रमः । स्मृतिभ्रंशाद् बुद्धिनाशो बुद्धिनाशात्प्रणश्यति ॥
Bhagavad Gita 2.62–63अक्रोधेन जयेत्क्रोधमसाधुं साधुना जयेत् । जयेत्कदर्यं दानेन जयेत्सत्येन चानृतम् ॥
Vidura Niti 7.72